एक मुख्तार सरकार

February 06 2018


कोई नेपथ्य के सन्नाटों से खामोशियों के ताने-बाने चुगकर अपने ख्वाहिशों के आशियाने को महत्वाकांक्षाओं के रंग रौगन से सराबोर करने का हुनर केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी से सिखे। मोदी सरकार जब दिल्ली के निज़ाम पर काबिज हुई तो उन्हें महज एक राज्य मंत्री बनाया गया, मीडिया में खूब षोर शराबा भी हुआ पर क्या मजाल नकवी ने कोई नानुकर भी की हो। वक्त गुजरा, नकवी इन सियासी हालात से तप कर कुंदन हुए, पूर्णकालिक केंद्रीय मंत्री बने तो मंत्रालय पर उनकी छाप दिखने लगी। अल्पसंख्यक मंत्रालय को एक नया चेहरा-मोहरा देने की कवायद और चंद बड़े अप्रिय फैसले मसलन हज सब्सिडी खत्म करने के फैसले में नकवी ने कई बड़े विपक्षी नेताओं की भी हामी जुटा ली। मदरसे रिफॉर्म से लेकर अल्पसंख्यक युवाओं को हुनरमंद बनाने के लिए न केवल मंत्रालय की स्कीम सिरे चढ़ी, बल्कि मुस्लिम लड़कियों को गुणात्मक शिक्षा मुहैया कराने के लिए भी बड़े कदम उठाए गए। शायद यही वजह रही हो कि पिछले वर्ष के बजट की तुलना में इस दफे केंद्रीय वित्त मंत्री ने बजट मद में नकवी के मंत्रालय को लगभग 550 करोड़ की अतिरिक्त रकम मुहैया कराई और मंत्रालय का बजट आबंटन 2018-19 में बढ़कर 4700 करोड़ रूपयों तक पहुंच गया है।

 
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