Archive | January, 2012

नेताजी का इटावा प्रेम

Posted on 14 January 2012 by admin

मुलायम सिंह का इटावा प्रेम जगजाहिर है। कन्नौज जहां से उनके लाडले अखिलेश सिंह सांसद हैं तो यहां के आलू किसानों की समस्याएं जब नेताजी के पास पहुंची तो वे किसानों के दुख से द्रवित हो गए और यह जानकर परेशान भी हो गए कि किसानों की आलू की फसलें मंडी तक ही नहीं पहुंच पा रहीं, आलू का कोई खरीदार नहीं। बहुत बार तो यह फसल खेत में खड़ी-खड़ी ही खराब हो जाती है। नेताजी ने एक विशेषज्ञ राजीव टंडन को आलू पर एक प्रपोजल तैयार करने का जिम्मा सौंपा, यह प्रपोजल था कि कैसे आलू किसानों को राहत मिले? प्रपोजल तैयार हुआ, टंडन इसे लेकर नेताजी के पास पहुंचे तो नेताजी ने कहा कि इसमें इटावा भी जोड़ दो। बाद में नेताजी ने तय किया कि अब जो आलू प्रोसेसिंग यूनिट लगना है वह तो इटावा में ही लगेगा। यानी कन्नौज के आलू किसान अपनी दुर्दशा पर यूं ही आंसू बहाते रहेंगे।

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क्या करें किरीट

Posted on 11 January 2012 by admin

बिचारे किरीट सौमेया को क्या मालूम था कि जिस राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के फंड में घपले का रिकॉर्ड वे दिन-रात एक-एक कर खंगाल रहे हैं, वही बाबू सिंह कुशवाहा एक दिन उनकी पार्टी के झंडाबरदार हो जाएंगे। समझा जाता है कि सीबीआई को कुशवाहा के खिलाफ आरटीआई से दस्तावेज निकलवाने व उन्हें उपलब्ध कराने में सौमेया की एक महती भूमिका थी, आज सौमेया बगले झांक रहे हैं बिचारे अपनी पार्टी के महान अध्यक्ष को कौन-सा मुंह दिखाएंगे?

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…और अंत में

Posted on 11 January 2012 by admin

सूत्र बताते हैं कि इस दफे के यूपी चुनाव में भाजपा का बजट तकरीबन ढाई सौ करोड़ रुपयों का है।

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धनंजय की जयकार

Posted on 11 January 2012 by admin

सवाल अहम हैं कि क्या यूपी के बाहुबली नेता धनंजय सिंह से जेल में मिलने राजनाथ सिंह के पुत्र पंकज सिंह भी गए थे? वैसे भी धनंजय से जेल में मिलने के लिए गडकरी ने अपनी चार लोगों की एक टीम यूपी भेजी थी, इस टीम की अगुवाई गडकरी के खास अरुण नरेंद्रनाथ कर रहे थे।

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शाही इमाम की 15 सूत्री मांग

Posted on 11 January 2012 by admin

इस हफ्ते जब मुलायम सिंह दिल्ली में थे तो उन्होंने अपने तार जामा मस्जिद के इमाम अहमद बुखारी से जोड़ लिए, अहमद बुखारी की सक्रियता भी देखते ही बनती थी। मुलायम चाहते थे कि शाही इमाम यूपी के मुसलमानों के लिए एक अपील जारी करें कि इस दफे के यूपी चुनाव में राज्य के मुसलमान सपा के पक्ष में वोट करेंगे। शाही इमाम ने इसके लिए फौरन हामी भर दी और कहा कि वे अपील जारी करने को राजी हैं, पर पहले मुलायम उनके 15 सूत्री मांग की एक फेहरिस्त स्वीकार करने की हामी भरे, जो मांगे प्रदेश के मुसलमानों की बेहतरी से जुड़ी हैं। इमाम साहब की उम्मीदों के विपरीत मुलायम इन मांगों को मानने के लिए एक पल में तैयार हो गए। और उन्होंने इमाम साहब से अर्ज किया कि वे अपनी मांगों की सूची फौरन उन्हें सौंप दें। शाही इमाम अब जाकर मुस्लिम बुध्दिजीवियों को याद कर रहे हैं कि वे जल्दी से ऐसे 15 सूत्री मांगों की एक सूची तैयार करें, जिन्हें मुलायम के आगे रखा जा सके। मुलायम सिंह को इस बात का बखूबी एहसास है कि जामा मस्जिद के शाही इमाम अहमद बुखारी का साथ यूपी चुनाव में उनकी नैया पार लगा देगी।

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चक्कर 5-25 का

Posted on 11 January 2012 by admin

कभी बहिनजी के दायां हाथ रहे बाबू सिंह कुशवाहा ने जब से भगवा राजनीति में अपना हाथ आजमाया है, भाजपा में तूफान मच गया है। यूपी चुनाव में अन्ना इफैक्ट के हिंडोलों पर सवार होने की भाजपा की मंशा पर घड़ों पानी फिर गया है। पार्टी के अंदर गडकरी व राजनाथ की विश्वसनीयता पर सवाल किए जा रहे हैं, पार्टी जन इसे खुल्लम-खुल्ला 5-25 का चक्कर बता रहे हैं। राजनीति में नैतिकता व शुचिता की दुहाई देने वाले संघ की चुप्पी सबसे हैरान करने वाली है, दबी जुबान से भगवा हलकों में चिंता जताई जा रही है कि कहीं संघ भी तो 5-25 के लाभार्थियों में शामिल नहीं है? चिंतित अडवानी ने जब गडकरी को फोन किया कि ‘वे कुशवाहा को पार्टी में लेने की कैसे सोच सकते हैं?’ तो गडकरी ने फौरन जवाब दिया कि ‘अगर हमने इन्हें नहीं लिया होता तो सपा-कांग्रेस इन्हें कब से अपनी पार्टी में शामिल करने को तैयार बैठी थी’, गडकरी का भरोसा है कि कुशवाहा के भाजपा में आने से पिछड़े वोट भाजपा के साथ जुड़ेंगे और जो भी गडकरी के साथ जुड़ा है वह तो बोनस है ही।

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कम नहीं हैं नारायण

Posted on 11 January 2012 by admin

आखिरकार वयोवृध्द कांग्रेसी नेता नारायण दत्त तिवारी की धमकी रंग लाई, कांग्रेस हाईकमान को उन्हें किंचित गंभीरता से लेना पड़ा और कई तिवारी करीबियों को पार्टी टिकट से नवाजा गया है। अपनी उपेक्षा से नाराज होकर तिवारी जी ने आह्वान कर दिया था कि वे उत्तराखंड की तमाम 70 विधानसभा सीटों पर अपने गैर राजनीतिक मंच की ओर से उम्मीदवार खड़े कर देंगे। जाहिर है अगर तिवारी जी ऐसा कर देते तो भाजपा इसकी लाभार्थी रहने वाली थी, सो तिवारी जी को मनाने के लिए आनन-फानन में उनके भतीजे मनीष तिवारी को नैनीताल से, हरेंद्र शर्मा को सहसपुर से, तिवारी जी के दामाद नवप्रभात को विकास नगर से पार्टी टिकट दे दिया गया। नवप्रभात पिछले चुनाव में भी कांग्रेस की टिकट पर ही देहरादून के विकास नगर से चुनाव लड़े थे और उन्होंने वहां भाजपा उम्मीदवार को कड़ी टक्कर दी थी।

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मंत्री भी नहीं ले पाए फैसला

Posted on 11 January 2012 by admin

जब यह मसला सरकार के पास आया तो उस वक्त कैबिनेट की मीटिंग चल रही थी। मीटिंग के बाद इस मसले पर विचार करने के लिए 5 लोग रूक गए, प्रधानमंत्री, चिदंबरम, प्रणब मुखर्जी, ए.के.एंटोनी व सलमान खुर्शीद। प्रणब इस पक्ष में थे कि इस मसले को और उलझाना ठीक नहीं क्यों नहीं इन्हें 2012 में ही रिटायर कर दिया जाए, तो पीएम ने कहा कि अगर ये 2012 में रिटायर होंगे तब एक सिख सेना प्रमुख बन जाएगा। और तब अंगुली उनकी ओर उठेगी, तब चिदंबरम ने कहा ठीक है अगले को बना देते हैं, इस पर पीएम ने कहा कि वह एक मराठी है उसे बनाने से सिख समुदाय में मेरे प्रति नाराजगी जाएगी कि मैंने जे.जे.सिंह को तो बनवा दिया, पर एक जट सिख को नहीं बनने दिया। ये पांचों शीर्ष नेता मिलकर भी किसी सामूहिक फैसले पर नहीं पहुंच पाए, नतीजन ऊहापोह का आलम बरकरार है।

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सिंह का हरियाणा कनेक्शन

Posted on 11 January 2012 by admin

पहले तो सेनाध्यक्ष की पत्नी की ओर से विचार याचिका प्रस्तुत की गई, फिर इनकी याचिका विचारार्थ फौज की वैधानिक समिति के पास आई। जहां इसे सरकार के समक्ष सुनवाई के लिए भेज दिया गया। वी.के. सिंह मूलत: हरियाणा के भिवानी के रहने वाले हैं। इनकी पत्नी सोहना की हैं, इनके पिता ठाकुर विजय पाल सिंह पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के करीबियों में शुमार होते थे। जो 1977 में सोहना विधानसभा क्षेत्र से चुने गए थे। और वे 1980 में भजनलाल के साथ कांग्रेस में शामिल हो गए। इनके परिवार के कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ घरेलू रिश्ते हैं।

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क्या है सेनाध्यक्ष की जन्म-तारीख का बवाल?

Posted on 11 January 2012 by admin

आर्मी प्रमुख वी.के.सिंह के जन्म प्रमाण पत्र का मसला फिर से सुर्खियों में है। वे जब 1965 में एनडीए में शामिल हुए थे तो 1951 के हिसाब से कम उम्र थे, तब संभवत: इनके पिता ने इनकी 1950 की तिथि लिखवा दी थी। इन्होंने अपनी उम्र का मुद्दा खुद ही उठाया। इनके पिता जब पुणे में थे तब वे वहां के आर्मी अस्पताल में पैदा हुए थे, उनका बर्थ सर्टिफिकेट भी वहीं का लगा है। जब उन्होंने अपने जन्मतिथि का मुद्दा उठाया तो सरकार ने मान लिया कि ‘ठीक है आपके जन्म का वर्ष 1950 ही रहेगा’ और तब उन्होंने इसे मंजूर भी कर लिया था। जब वे थल सेना प्रमुख बनाए गए तो सरकार ने मान रखा था कि वे 31 मई 2012 को रिटायर हो जाएंगे। अब इसमें पेंच यह है कि अगर वे 2012 में रिटायर होते हैं तो अगले सेना प्रमुख बिक्रम सिंह बनेंगे, जो एक जट सिख हैं। अगर इनकी जन्मतिथि 1951 मान ली जाती है तब ये 2013 में रिटायर होंगे और इनकी जगह नार्दन आर्मीकमांडर महाराष्ट्र के लेफ्टिनेंट जनरल के.टी.परनाईक आर्मीचीफ बनेंगे।

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