Posted on 11 December 2011 by admin
देश के प्रमुख ज्योतिषगण मनमोहन सरकार के भविष्य को लेकर चिंता जता रहे हैं। इन भविष्यवेताओं की राय है कि अप्रैल 2012 में केंद्र में सत्ता पलट हो सकता है या सरकार की कमान बदल सकती है। इस समय केंद्र में शुक्र की दशा चल रही है। फरवरी से शुक्र में राहू की अंतर्दशा शुरू हो जाएगी। शनै:शनै: यह भयंकर सियासी उथल-पुथल लेकर आएगा। केंद्र में वी.पी. सिंह और चंद्रशेखर की सरकार के रूखसती के वक्त भी ग्रह-नक्षत्रों की यही दशा-दिशा थी। यानी अप्रैल 2012 में मनमोहन सरकार का जाना ज्योतिषगण तय बता रहे हैं। देखना दिलचस्प रहेगा कि तब क्या नए निजाम राहुल गांधी के हाथों में सत्ता की बागडोर आ सकती है?
Posted on 11 December 2011 by admin
आखिर बकरे की मां कब तक खैर मनाएगी। अौर कब तक तमाम विपक्षी हमलों को झेलते हुए सुरक्षित रह पाएंगे पी. चिदंबरम। विपक्ष संसद में उनका बायकॉट कर रहा है, एक स्वामी तो बकायदा उनके खिलाफ धूनी रमा रहे हैं। कोर्ट में उनके खिलाफ दो गवाहों की गवाहियां अहम हैं, साथ 2जी मामले में फाइलों में कई अहम राज दफन हैं, जिससे चिदंबरम का भविष्य तय हो सकता है। वे अपने को बचाने की निर्णायक लड़ाई लड़ रहे हैं। उनकी इस लड़ाई में दिल्ली के दो बड़े अंग्रेजी दैनिक उनका साथ दे रहे हैं। दक्षिण भारत का भी एक अग्रणी अंग्रेजी दैनिक अब भी उनके स्तुतिगान में लगा है। एक वकील होने के नाते ज्यूडिशयरी में भी उनकी अच्छी पहचान है। एक कॉरपोरेट वकील होने के साथ वे देश के वित्त मंत्री भी रह चुके हैं। चुनांचे कॉरपोरेट जगत में भी उनके दोस्तों की काफी तादाद है। बावजूद इसके इस दफे पीसी के लिए इस सियासी लाक्षागृह से बच निकल पाना इतना आसान नहीं होगा, क्योंकि विपक्ष अपने पूरे हमलावर अंदाज में उनके खिलाफ पूरी तरह मुस्तैद है।
Posted on 04 December 2011 by admin
कभी जब जगन मोहन रेड्डी कांग्रेस के सांसद हुआ करते थे तो उन्हें सत्ता पक्ष की सीटों में ठीक राहुल गांधी की बगल वाली सीट आबंटित थी। पर जब से उन्हाेंने कांग्रेस छोड़कर कडप्पा उप चुनाव में जीत हासिल की है, उन्हें लोकसभा में सबसे आखिरी यानी 11वीं पंक्ति में डिविजन नंबर 363 की सीट एलॉट हुई है, जाहिर है यह सीट सत्ता पक्ष की बेंचों से काफी दूर हैं, इस दूरी को जगन भी समझते हैं, और कांग्रेस भी।
Posted on 04 December 2011 by admin
नेताजी मुलायम सिंह यादव के दूसरे बेटे प्रतीक यादव की सैफई में आज शादी है। प्रतीक अरविंद सिंह बिष्ट की बेटी अपर्णा के साथ विवाह बंधन में बंध जाएंगे। दोनों की दोस्ती पुरानी है। पर नेताजी ने प्रतीक व अपर्णा से साफ-साफ कह दिया है कि वे दोनों अपनी कोई राजनैतिक महत्त्वाकांक्षा न पालें, क्योंकि उन्होंने तय कर दिया है कि अखिलेश ही उनकी राजनैतिक विरासत के उत्तराधिकारी होंगे। पर नेताजी इस शादी से खुश हैं और 7 तारीख को लखनऊ में एक बड़ा रिसेप्शन भी दे रहे हैं।
Posted on 04 December 2011 by admin
आनंद शर्मा को लेकर कांग्रेस के अंदर बड़ा असंतोष है, दरअसल यह आनंद शर्मा ही थे जिन्होंने सरकर को फीडबैक दिया था कि खुदरा क्षेत्र में विदेशी निवेश को लेकर भाजपा शासित राज्यों को भी कोई आपत्ति नहीं है, भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बात करने और उन्हें तैयार करने की जिम्मेदारी शर्मा को ही सौंपी गई थी। अब तो सीधे-सीधे गुजरात की मोदी सरकार ने भी केंद्र सरकार से अपना विरोध दर्ज करा दिया है। मोदी का कहना है कि उन्होंने आनंद शर्मा से अमूल की तरह ही कोई ‘कोऑपरेटिव चेन’ लाने को कहा था, रिटेल में एफडीआई के समर्थन का तो सवाल ही नहीं उठता। कुछ ऐसी ही बातें हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री भी कर रहे हैं यानी शर्मा और भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच तलवारें खिंच चुकी हैं।
Posted on 04 December 2011 by admin
सियासत की कबड्डी खेलने में कांग्रेस का भी जवाब नहीं। कांग्रेस सरेआम भाजपा को ललकार रही है कि ‘हिम्मत है तो सदन में अविश्वास प्रस्ताव लेकर आओ’, वैसे भी सदन में अविश्वास प्रस्ताव लाने का पहला हक प्रमुख विपक्षी दल का ही होता है, पर भाजपा सिर्फ इसीलिए हिम्मत नहीं जुटा पा रही कि उसे मालूम है कि अगर वह सदन में अविश्वास प्रस्ताव लेकर आती है तो उसे सपा, बसपा और वामपंथी दलों का समर्थन व वोट नहीं मिल पाएगा, चूंकि यूपी में विधानसभा चुनाव सिर पर हैं सो ये दल कांग्रेस को यूपी के मतदाताओं से यह कहने का मौका नहीं देना चाहते कि भाजपा के साथ सपा, बसपा और वामपंथियों की सांठ-गांठ है।
Posted on 04 December 2011 by admin
खुदरा क्षेत्र में एफडीआई के मुद्दे ने भारतीय सियासत में तूफान ला दिया है। पक्ष-विपक्ष में घमासान का यह आलम है कि मध्यावधि चुनाव की गुपचुप आहटें भी सुनी जा सकती हैं। भाजपानीत विपक्ष एक समय गिनती के दौर में आगे चल रहा था, समझा जाता है कि एफडीआई के विरोध में अलख जगाने के लिए उसे लोकसभा में 295 सांसदों का समर्थन हासिल हो गया था, यानी परिस्थितियां इतने विस्फोटक मुहाने पर पहुंच चुकी थीं कि मनमोहन सरकार फ्लोर पर औंधे मुंह लुढ़क भी सकती थी। ऐसे में सरकार के संकटमोचक कांग्रेसी मैनेजर हरकत में आए, तृणमूल व डीएमके जैसे यूपीए के बड़े घटक दलों को मनाने की कवायद शुरू हुई, कांग्रेसी मैनेजरगण ने तो करुणानिधि को आसानी से मना लिया, पर ममता अड़ गई है, उन्हें बमुश्किल इस बात के लिए राजी किया जा रहा है कि अगर एफडीआई के मुद्दे पर सदन में वोट की नौबत आई तो तृणमूल सदन से अनुपस्थित रहेगा, अनुपस्थिति तो डीएमके भी दर्ज कराने वाला है क्योंकि यह फार्मूला भी उन्हीं का सुझाया हुआ है। सदन के बाहर तृणमूल और डीएमके दोनों ही रिटेल में एफडीआई का विरोध जारी रखेंगे और कांग्रेस भी यही चाहती है कि तब तक सदन के काम काज में व्यवधान जारी रहे जब तक वह फिर से 272 के जादुई आंकड़े को छू नहीं लेती है।
Posted on 04 December 2011 by admin
प्रणबदा के प्रति ममता के दुलार की जगह एक अनजाने-अनदेखे आक्रोश ने ले लिया है। दीदी दादा से बहुत नाराज हैं, इतनी नाराज कि वह प्रणब दा को बंगाल से मंत्री मानने को भी तैयार नहीं। दीदी को लगता है कि दादा बतौर वित्त मंत्री बंगाल के साथ दोएमर् बत्ताव कर रहे हैं, बंगाल के हितों की अनदेखी कर रहे हैं। दीदी का वश चले तो वह सोनिया व मनमोहन से कह कैबिनेट से प्रणब की छुट्टी करवा दें, एफडीआई पर इसीलिए दीदी के तेवर इतने कड़े हैं।
Posted on 04 December 2011 by admin
राहुल गांधी अब यूपी के कांग्रेसी सांसदों व मंत्रियों से सख्ती से पेश आ रहे हैं। उन्होंने अपनी नाराजगी से अपने पार्टी नेताओं को वाकिफ करा दिया है। राहुल की चिंता दरअसल इस बात को लेकर है कि जब वे यूपी जाते हैं तब ही यूपी के नेतागण हरकत में आते हैं, उनके पीछे-पीछे मंत्री-सांसदों की पूरी टीम चलती है, पर जैसे ही युवराज दिल्ली वापिस आते हैं सब दिल्ली में ही रम जाते हैं। सो, राहुल ने अपने सांसदों व मंत्रियों की जिलेवार डयूटी लगा दी है। राहुल अपनी रौ में है और यूपी के ये विधानसभा चुनाव उनके लिए एक ‘लिटमस टेस्ट’ के मानिंद है, सो वह अपना हर कुछ दांव पर लगा रहे हैं। राहुल की नाराजगी कहीं न कहीं केंद्र सरकार और उनके मुखिया से भी है, राहुल को लगता है जब यूपी में सिर पर चुनाव हैं तो ऐसे में केंद्र सरकार उन मुद्दों को कैसे हवा दे सकती है जो प्रथम द्रष्टया ही जनविरोधी दिखते हैं। सो राहुल का मनमोहन व केंद्र सरकार के प्रति भी रवैया सख्त हुआ है।
Posted on 04 December 2011 by admin
रानी कनिमोझी को 2जी मामले में भले ही बेल मिल गई हो, पूर्व संचार मंत्री ए. राजा ने बेल पर बाहर आने से मना कर दिया है। सूत्र बताते हैं कि राजा ने अपने वकीलों से कहा है कि वे ‘बेल एप्लिकेशन’ मूव न करे क्योंकि बाहर आने पर उन्हें उनकी जान का खतरा है, उन्हें डर है कि उनका हश्र भी सादिक बच्चा सा हो सकता है, जिनकी आकस्मिक मौत की गुत्थी अब तक सुलझी नहीं है। जबकि कोर्ट और जेल में राजा के आचरण को देखते हुए इस बात की पूरी संभावना व्यक्त की जा रही थी कि उन्हें बेल मिल सकती है। राजा लॉ-ग्रेजुएट हैं, उन्हें कानून की बारीक समझ है और उनकी कानूनी समझ को देखते हुए तो कई बार उसके वकील भी हैरान हो जाते हैं। पर अब जो राजा कह रहे हैं यह उनके सियासी समझ का ही द्योतक है।