Posted on 27 December 2011 by admin
गृहमंत्री चिदंबरम के ग्रह अच्छे नहीं चल रहे। शुक्रवार को जिस कदर संसद में घमासान मचा और विपक्ष उनके इस्तीफे पर अड़ा रहा, उससे एक बात साफ हो गई है कि अब पीसी कांग्रेस में भी अलग-थलग पड़ गए हैं। दिल्ली के जिस होटल व्यवसायी एस.पी.गुप्ता और उनसे जुड़े धोखाधड़ी मामलो को लेकर बावेला मचा दरअसल वह होटेलियर चिदंबरम के पुराने जानकारों में बताए जाते हैं। जिन्होंने दिवंगत राजीव गांधी के नाम पर मंच बना रखा है, उन पर यह आरोप है कि उन्होंने कई सांसदों के फर्जी लेटरहैड का इस्तेमाल अपने हक में किया है। कहा जाता है इसमें सोनिया गांधी की फर्जी चिट्ठी का मामला भी शामिल है। इसीलिए इस पूरे मामले में दस जनपथ और उसे निष्ठावान सांसद-मंत्री-नेता चिदंबरम के बचाव में सामने नहीं आए। माना जा रहा है कि इन दिनों प्रणब मुखर्जी दस जनपथ की आंखों के तारे बने हुए हैं। प्रणब-चिदंबरम में छतीस का आंकड़ा जगजाहिर है। ऐसे में सोनिया भी एक नए सियासी गणित के आगाज को सिरे चढ़ने देखना चाहती हैं। ऐसे वक्त में जबकि वह जानती हैं कि कथित तौर इस होटल व्यवसायी की 2जी मामलों में संलिप्तता हो सकती है, क्योंकि गुप्ता और राजा में एक वक्त गहरी छनती थी।
Posted on 27 December 2011 by admin
कपिल सिब्बल भी क्या करें, उनके 6 बिल लोकसभा में पेंडिंग पड़े हुए हैं। पिछले सेशन से उनका एक भी बिल पास नहीं हो रहा और ना ही आगे पास होने की उम्मीद दिख रही…।
Posted on 27 December 2011 by admin
लोकपाल बिल के सदन में आने से पहले इसके ड्राफ्ट की चार कापियां वितरित हुई थीं। इसमें से एक कॉपी सदन की नेता प्रतिपक्ष, राज्यसभा के नेता प्रतिपक्ष, एक कॉपी अडवानी के पास भी थी कहते हैं जो पिछले दरवाजे से पहले से ही किरण बेदी के पास पहुंच गई थी। लालू को दोनों ड्राफ्ट की कॉपियां दी गई थीं। एक में मुस्लिम आरक्षण का जिक्र था दूसरे में नहीं। कांग्रेसी मैनेजरों ने इन दोनों बिलों का फर्क लालू को समझाया कि अन्ना का बिल क्या है, भाजपा ने बिल में क्या-क्या तब्दीलियां करवाईं हैं, चुनांचे लालू जोश में आ गए। और जोश ही जोश में उन्होंने जो कुछ सदन में कहा था वह कांग्रेस के फायदे की बात थी। कांग्रेस का मुलायम के बजाए लालू पर इतना भरोसा करना कुछ दूरगामी संकेत देता है। मुलायम को तो बस कांग्रेसी मैनेजरों ने मौखिक रूप से दोनों बिल के प्रारूप के बारे में ब्रीफ कर दिया था, पर लालू को बकायदा इसकी कॉपी पहुंचाई गई थी।
Posted on 27 December 2011 by admin
लोकपाल के मुद्दे पर संसद में बहस के दौरान जिन लोगों ने वहां मौजूद सोनिया गांधी की भाव भंगिमाएं देखी होंगी, उन्हें सहज समझ आ गया होगा कि अन्ना के प्रति कांग्रेस का रुख आज इतना हमलावर और आक्रामक क्यों है? लोकपाल व अन्ना पर चुटकी लेते हुए लालू के भाषण के रसास्वादन के दौरान मुस्कराती-खिलखिलाती सोनिया के इरादे क्या हैं इसे लोग बखूबी समझ चुके हैं। आखिर अन्ना से नाराज क्यों हैं इतनी सोनिया? दरअसल, कांग्रेसी युवराज राहुल गांधी पर सीधा हमला साध कर अन्ना ने सोनिया को बेतरह नाराज कर दिया है। आखिर राहुल ना सिर्फ कांग्रेस के देदीप्यान नक्षत्र हैं अपितु वे ‘पीएम इन मेकिंग’ भी हैं। सो, इस दफे अन्ना से बराबरी का हिसाब चुकता करने की जुगत में है कांग्रेस पार्टी।
Posted on 27 December 2011 by admin
उत्तराखंड चुनाव में इस दफे भले ही कांग्रेस के हौंसले बम-बम हैं, यहां कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष हरक सिंह रावत तनिक हैरान-परेशान हैं कि उन्हें इस दफे चुनाव लड़ने के लिए कोई मन-माफिक सीट नहीं मिल पा रही। रावत लैंसडाउन से वर्तमान विधायक हैं। पर इस बार उत्तराखंड रक्षा मोर्चा के जनक मेजर टीपीएस रावत ने हरक सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। टीपीएस कांग्रेस छोड़ भाजपा में आए थे और भाजपा छोड़ कर उन्होंने रिटायर्ड सैनिकों का यह मोर्चा गठित किया है। मेजर ने खम्म ठोक कर घोषणा कर दी है कि वे हरक सिंह को लैंसडाउन में महती चुनौती पेश करने के लिए वहां से खुद चुनाव लड़ेंगे। तब एक सुरक्षित सीट की तलाश में हरक सिंह ने श्रीनगर का रुख कर लिया, पर इससे पहले कि नेता प्रतिपक्ष श्रीनगर में अपना डेरा-डंडा जमा पाते, सतपाल महाराज ने वहां से अपने खास चेले पूर्व विधायक डोंडियाल को लड़ाने की घोषणा कर दी। मरते क्या नहीं करते हरक सिंह ने अदद सुरक्षित सीट की तलाश में अब अपने कदम डोईवाला में जमा लिए हैं। पहले डोईवाला सीट हरिद्वार संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आती थी पर अब नए परिसीमन में यह देहरादून संसदीय सीट का हिस्सा हो गई है। यहां चौकन्ने हरक सिंह विरोधियों की पदचाप भांपने की कोशिशों में जुट गए हैं।
Posted on 27 December 2011 by admin
ंजरा सोचिए राजनैतिक विचारधारा में नैतिकता व शुचिता की दुहाई देने वाला संघ और उसकी पोषक पार्टी भाजपा की ओर से 27 तारीख को लोकपाल के मुद्दे पर संसद में कौन बोलेगा? माननीय श्री अनंत कुमार जी, जिनकी श्रीकथा अनंता से कौन वाकिफ नहीं है। मामला चाहे हुडको घोटाला का हो या नीरा राडिया प्रकरण का अनंत की पहले ही इन मामलों में किरकिरी हो चुकी है। लगता है इसी मौके के लिए दुष्यंत कुमार ने कहा था-‘इस तरह टूटे हुए चेहरे नहीं हैंजिस तरह टूटे हुए ये आइने हैं जिस तरह चाहो बजा लो इस सभा मेंहम नहीं हैं आदमी, हम झुनझुने हैं।’
Posted on 27 December 2011 by admin
छत्तीसगढ़ के भाजपाई मुख्यमंत्री रमण सिंह पर अब से पहले सिर्फ भाई-भतीजावाद व जातिवाद के आरोप ही लगते रहे थे, भाजपाध्यक्ष नितिन गडकरी ने जो छत्तीसगढ़ में एक ताजा जनमत सर्वेक्षण करवाया है और इस सर्वेक्षण के नतीजों ने पार्टी की रातों की नींद छीन ली है। यह सर्वे कहता है कि अगर मौजूदा समय में छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव हुए तो वहां भाजपा की लुटिया डूब सकती है। सर्वे के मुताबिक अगर अभी चुनाव हुए तो वहां 55 सीटों के साथ कांग्रेस सबसे बड़े दल के रूप में उभर सकती है। रमण सिंह की अगुवाई में भाजपा को महज 26 सीटों से ही संतोष करना पड़ेगा। लोकप्रियता की दौड़ में भी भगवा मुख्यमंत्री रमण सिंह पिछड़कर चौथे नंबर पर आ गए हैं। सबसे पहले चरणदास महंत, फिर विद्याचरण शुक्ल, तीसरे नंबर पर अजीत जोगी और चौथे नंबर पर रमण सिंह। रमण काल के लिए अवसान गीत गाने का समय आ गया है?
Posted on 27 December 2011 by admin
आखिर जनवरी में लोकपाल पर संसद का विशेष सत्र क्यों नहीं बुलाया गया? संवैधानिक आग्रहों व परंपराओं के मुताबिक नए वर्ष का पहला सत्र राष्ट्रपति के अभिभाषण से शुरू होता है। इसके बाद के तीन दिन राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बहस के लिए सुरक्षित रहते हैं। सो, ऐसे में संसद के इस विशेष सत्र में लोकपाल होता तो आखिर माननीय राष्ट्रपति अपने अभिभाषण में क्या कहतीं। और इसमें जाहिरा तौर पर सरकार की नीतियों की झलक दिख जाती। सो, सरकार ने लोकपाल पर विशेष सत्र आहूत करने की बजाए मौजूदा सत्र को ही आगे बढ़ाना श्रेयस्कर समझा।
Posted on 27 December 2011 by admin
5 राज्यों के इस विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के हौंसले बुलंद हैं। कांग्रेस को उम्मीद है कि वह उत्तराखंड व पंजाब में पहले से कहीं बेहतर प्रदर्शन करेगी। यूपी में अजित सिंह से गठबंधन और मुस्लिम आरक्षण के शिगूफे की वजह से वहां कांग्रेस की हवा बनी है। अब कांग्रेस को लगता है कि वह अपने दमखम पर यूपी में 50 से ज्यादा सीटें जीत सकती है। अजित भी 20 के करीब पहुंच सकते हैं और मुलायम सिंह 130 के आसपास। यानी मुलायम, अजित व कांग्रेस मिलकर यूपी में जरूरी बहुमत का जुगाड़ कर सकते हैं इस बार।
Posted on 27 December 2011 by admin
तमाम सियासी झंझावतों से जूझ रही कांग्रेस सरकार की निर्भरता अपने ‘क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप’ पर बढ़ती ही जा रही है। पार्टी और सरकार में दरकिनार कर दिए गए पी. चिदंबरम भी इस ग्रुप के एक अहम सदस्य हैं। इस ग्रुप के अन्य सदस्यों में कपिल सिब्बल, अंबिका सोनी, गुलाम नबी आजाद, सलमान खुर्शीद और पवन बंसल हैं। विपक्ष से जूझने-भिड़ने की रणनीतियों को भी यही मंत्री समूह अंतिम रूप देता है। संसद के 9 नंबर कमरे में दिन के तकरीबन 1 बजे इस गु्रप की अहम बैठक में महत्त्वपूर्ण निर्णय लिए जाते हैं। अगर कभी-कभार यह ग्रुप 9 नंबर कमरे में नहीं जुटता तो फिर अंबिका सोनी के कमरे में यह जमावड़ा जुटता है। शायद यही वजह है कि पीआईबी रूम में अंबिका सोनी व कपिल सिब्बल अक्सर साथ दिख जाते हैं।