Posted on 24 October 2011 by admin
लगता है आज न कल अशोक गहलोत को जाना ही होगा, भंवरी देवी प्रकरण में घिरे मदेरणा को बचाने के आरोप गहलोत पर भले ही उतने गंभीर न हों, राज-काज में उनकी अक्षमता को कांग्रेसी हाईकमान गंभीरता से ले रहा है। प्रदेश में जातीय समीकरणों को मांजने व साधने की बाजीगरी में भी वे पिछड़ गए हैं, आम तौर पर राजस्थान में यह कांग्रेसी फार्मूला चलता था कि चाहे मुख्यमंत्री किसी भी जाति का हो प्रदेश अध्यक्ष हमेशा राज्य की जातीय समीकरणों को मद्देनजर रखकर बनाया जाता था, पर गहलोत ने अपने एक खास चंपू चंद्रभान को प्रदेश अध्यक्ष बनवा कर राज्य के जाट मतदाताओं को बिल्कुल नाराज कर दिया है। गहलोत की जगह लेने के लिए कांग्रेसी हाईकमान दो नामों पर विचार कर रहा है, वह हैं शांति धारीवाल और सी.पी.जोशी। यानी गहलोत को भ्रष्टाचार के आरोपों की कीमत चुकानी पड़ सकती है। वहीं दूसरी ओर पार्टी में इस बात को लेकर भी गहरा असंतोष है कि गहलोत बाहर से आए लोगों को ज्यादा तरजीह देते हैं।
Posted on 24 October 2011 by admin
दिवाली के मौके पर शुक्रवार को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी ने दिल्ली के पत्रकारों के लिए रात्रि भोज का आयोजन किया। गडकरी के उनके 13 तीनमूर्ति लेन आवास पर पत्रकारों का खूब जमावड़ा जुटा, भीड़ नहीं, भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई। पर गडकरी सहज भाव से हर छोटे-बड़े पत्रकार से मिल रहे थे, और गर्व से बता भी रहे थे कि बीते दिनों में उन्होंने अपना 11 किलो वजन कम कर लिया है। खाने के शौकीन गडकरी पूरे समय खाने की टेबल से दूर ही रहे। रूढ़ी ने उनके साथ संगत जमा रखी थी, निर्मला सीतारमण महिला पत्रकारों से घिरी थीं, तरुण विजय जरूर थोड़े अलग-थलग दिख रहे थे। गडकरी के मीडिया सलाहकार अशोक टंडन, व राज कुमार शर्मा मेजबान के अंदाज में पत्रकारों के हाल-चाल ले रहे थे, मनोज गायकवाड सबसे एक्टिव दिख रहे थे, हर टेबल पर जाकर पत्रकारों का खैर मकदम पूछ रहे थे। डिनर में महाराष्ट्रीय व्यंजनों की बहार थी- झुंपा-भाकरी से लेकर मराठी स्टाइल में बैंगन का चोखा तक। गडकरी डायबिटिक होने के नाते भले ही मीठे से परहेज रखते हों पर पत्रकारों के लिए जलेबी, गुलाब जामुन से लेकर आइस्क्रीम तक की व्यवस्था थी, आईस्क्रीम भले ही सख्त जमी थी, पर गडकरी पत्रकारों के समक्ष पिघले-पिघले से नजर आ रहे थे।
Posted on 16 October 2011 by admin
2जी मामले में कोर्ट के समक्ष सीबीआई ने बयान दिया है कि वह कनिमोझी की जमानत अर्जी का विरोध नहीं करेगी। यानी यूपीए सरकार अब सीधे-सीधे डीएमके के दबाव में दिखती है, और अब इस बात के भी संकेत मिलने लगे हैं कि जयललिता के संग कांग्रेस की खिचड़ी पकी नहीं, सो अब उन्हें फिर से करुणानिधि के ही रहमोकरम पर रहना पड़ेगा।
Posted on 16 October 2011 by admin
अडवानी की यात्रा में येदुरप्पा का स्वागत नहीं है, क्योंकि अडवानी के परम सारथी अनंत कुमार घोषित येदुरप्पा विरोधी हैं। अडवानी का रथ 31 अक्तूबर कर्नाटक में प्रवेश करेगा। पर अनंत कुमार व कर्नाटक भाजपा प्रमुख ई.एस.ईश्वरप्पा ने तय किया है कि येदुरप्पा रथ के आसपास भी नहीं फटकेंगे। जबकि पत्रकारों द्वारा पूछे जाने पर अनंत कुमार का जवाब होता है कि यह तो पार्टी कोर कमेटी तय करेगी कि किसको बुलाया जाना है, किसको नहीं।
Posted on 16 October 2011 by admin
अडवानी की रथ यात्रा की शुरूआत में ही यात्रा के संयोजकों ने एक गाइडलाइन तैयार की है जिसके मुताबिक मंचासीन होने की स्थिति में प्रथम पंक्ति में अडवानी के साथ प्रतिभा, अनंत कुमार और दीपक चोपड़ा बैठेंगे, भाजपा के अन्य सीनियर नेता दूसरी पांति में बैठेंगे। साथ ही यह भी ताकीद की गई है कि भीड़ का अभिवादन स्वीकार करने के लिए सिर्फ अडवानी, प्रतिभा व चोपड़ा ही हाथ हिलाएंगे, अन्य कोई नेता नहीं।
Posted on 16 October 2011 by admin
अडवानी की यह रथ यात्रा में भले ही उन्हें भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार तय करवाए या नहीं, पर यह यात्रा उनका उत्तराधिकारी जरूर तय कर देगी। अडवानी की इस यात्रा से पहले उनके घर में कोहराम मचा था, उनकी पत्नी कमला चाहती थीं कि अडवानी के साथ यात्रा में उनके पुत्र जयंत जाएं ताकि जयंत के लिए भगवा राजनीति के द्वार खुल सके। वहीं अडवानी पुत्री प्रतिभा का स्पष्ट तौर पर मानना था कि जयंत राजनीति के लिए ‘फिट’ नहीं है, सो मां के नहीं चाहने के बावजूद प्रतिभा अपने पिता के साथ रथ यात्रा पर हैं, प्रतिभा तो पहले से भी दादा (अडवानी) की दुलारी है।
Posted on 16 October 2011 by admin
अडवानी का यह रथ पुणे में तैयार हुआ है और इसको तैयार करवाने में प्रकाश जावड़ेकर की सबसे महती भूमिका रही है। इस रथ में दो जेनरेटर लगे हैं, एक शानदार साउंड सिस्टम है और एक लिफ्ट लगी है। इसके दरवाजे हाईड्रोलिक हैं जो रथ के चलते ही अपने आप बंद हो जाते हैं। उस दिन जब सारा हंगामा बरपा तो शुरूआत रथ में लगे एक्जॉस्ट फैन टूट जाने की वजह से हुई, जैसे ही फैन टूट कर नीचे गिरे जेनरेटर का धुंआ एयर कंडिशनर के डक्ट में जाने लगा। और यह धुंआ धीरे-धीरे केबिन में भरने लगा। धुंआ इतना ज्यादा होने लगा कि उसमें मौजूद कॉर्बन मोनोक्साइड से केबिन में बैठे लोगों के दम घुटने लगे। उस वक्त जेतली वहां सो रहे थे, वे सोते-सोते बेहोश हो गए। सी.पी.ठाकुर को उल्टियां शुरू हो गई। पर रथ का दरवाजा था कि वह खुल ही नहीं रहा था क्योंकि दरवाजे रथ रूकने के बाद ही खुल सकते थे और अडवानी नहीं चाहते थे कि रथ रूके और उनकी यात्रा बाधित हो। पर जब पानी सिर से गुजरने लगा तो रथ रूकवाया गया। दरवाजे खुले और लोग बाहर आ पाएं। रथ के आगे-आगे रास्ता बनाते रूढ़ी चल रहे थे पर वे भी कहीं आगे निकल गए थे। उन्हें फिर बुलाया गया क्योंकि रथ के साथ कोई और गाड़ी नहीं चल रही थी। फिर डॉक्टरों के दल को बुलाया गया, कार्डियोलोजिस्ट ने जेतली को रात की यात्रा नहीं करने की सलाह दी, सुषमा का बीपी (13580) और ऑक्सीजन लेवल (97) ठीक आया। सी.पी.ठाकुर का प्राथमिक उपचार किया गया। फिर नेताओं को अलग-अलग गाड़ियों से वहां से ले जाया गया। यह रथ जब आगे बढ़ा तो फिर आरा में हिचकोले खा गया, ऊंचाई को लेकर जब फंस गया तो टायरों की हवा निकाली गईं फिर निकालने के बाद पंचर टायरों की मरम्मत हुई और उसमें हवा भरी गई। पर इन बातों से अडवानी की हवा कम नहीं हुई है।
Posted on 16 October 2011 by admin
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक अब अपने लिए केंद्रीय राजनीति में नई भूमिका तलाशने की अभियान में जुटे हैं, निशंक की नजर तरुण विजय की राज्यसभा सीट पर है, उन्हें लगता है कि शाहला हत्याकांड में नाम आने के बाद से तरुण को आज न कल अपनी राज्यसभा सीट छोड़नी ही पड़ेगी, सो उस आसन्न सीट के लिए निशंक अभी से अपनी दावेदारी की धार तेज कर रहे हैं। वहीं भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व निशंक को उत्तराखंड तक ही सीमित रखना चाहता है, वह निशंक को इस झांसे में रख रहा है कि उन्हें जल्द ही स्पीकर बनाया जाएगा और उत्तराखंड विधानसभा के मौजूदा स्पीकर को खंडूरी सरकार में मंत्री बनाया जाएगा। दरअसल, पार्टी जानती है कि अगर निशंक पर ठीक से अंकुश नहीं रखा गया तो वे उत्तराखंड विधानसभा की कम से कम 10 सीटों पर पार्टी की फजीहत करा सकते हैं, इसीलिए पार्टी की योजना उन्हें ‘मुंगेरीलाल के हसीन सपने’ दिखाते रहने की है।
Posted on 16 October 2011 by admin
2जी मामले पर केंद्रीय कानून मंत्री सलमान खुर्शीद का चर्चित बयान जाने-अनजाने उद्योगपतियों के पक्ष में और कोर्ट के खिलाफ चला गया है। स्वयं कांग्रेस पार्टी में खुर्शीद के इस बयान को लेकर हैरानी है, दस जनपथ ने सिर्फ इसीलिए वीरप्पा मोइली की जगह खुर्शीद को बिठाया था कि आम फहम में यह संदेश दिया जा सके कि कांग्रेस एक मजबूत कानून मंत्री के पक्ष में है। अब खुर्शीद का यह बयान 10 जनपथ के निर्देश पर आया है या औद्योगिक घरानों की उनकी निकटता की वजह से, पार्टी में यह धुंध अभी छंटी नहीं है। क्योंकि खुर्शीद जब पूर्व में कॉरपोरेट अफेयर्स मिनिस्टर थे तो कई औद्योगिक घरानों से उनकी काफी घनिष्टता हो गई थी, वैसे भी खुर्शीद के ऐसे संपर्कों की कमान उनकी पत्नी लुईस संभालती हैं।
Posted on 16 October 2011 by admin
2जी के बाद पीएमओ का यह दूसरा सबसे बड़ा टॉप सीक्रेट नोट है जो सत्ता के गलियारों में धमाल मचा रहा है, यह ‘स्टॉक एक्सचेंज रेग्युलेटर’ को लेकर प्रधानमंत्री की सख्त टिप्पणी है, कहा जाता है कि इस रेग्युलेटर की बहाली से लेकर इसको दिशा निर्देशित करने में पूर्व वित्त मंत्री पी.चिदंबरम की एक महती भूमिका रही है।