Archive | October, 2011

बलि वेदी पर त्रिवेदी

Posted on 30 October 2011 by admin

दिनेश त्रिवेदी व ममता बनर्जी के रिश्तों में खटास आ गई लगती है। ममता को लगता है कि त्रिवेदी के तृणमूल सांसदों के साथ अच्छे रिश्ते नहीं है। वहीं त्रिवेदी ने रेल मंत्रालय में पहले से काबिज ममता के मुंहलगे लोगों को किनारे लगाना शुरू कर दिया है, जैसे रतन मुखर्जी, जयंतो साहा, अशोक सुब्रह्मण्यम ये सभी नए रेल मंत्री के काम-काज से नाखुश बताए जाते हैं। दिनेश अपना पीएस भी बंगाल कैडर की एक महिला आइएएस को लेकर आए हैं, जो पंजाबी हैं और जिन्हें दबी जुबान से जूनियर ओमिता पॉल पुकारा जाता है। कहा जाता है कि पिछले दिनों जब त्रिवेदी ममता से कोलकाता में मिले थे तो ममता ने इस बात पर आपत्ति उठाई थी कि त्रिवेदी उद्योगपतियों से रेल मंत्रालय के अपने ऑफिस के बजाए अपने घर पर मिलना क्यों पसंद करते हैं। यानी कि त्रिवेदी की रेल कभी भी पटरी से उतर सकती है।

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टीम राहुल के हाथों में है कमान

Posted on 30 October 2011 by admin

इतना तो तय हो चुका है कि इस दफे उत्तर प्रदेश चुनाव की पूरी कमान राहुल ब्रिगेड के पास रहेगी, पंजाब व उत्तराखंड पर भी टीम राहुल की पैनी निगाहें हैं। दिग्विजय सिंह पहले से ही सूत्रधार की भूमिका में अवतरित हो चुके हैं। पॉलिटिकल मैनेजमेंट व क्राइसिस मैनेजमेंट के लिए इस दफे खास तौर पर टीम राहुल अप्रत्याशित रूप से अहमद पटेल की सेवाएं ले रही है, एक पटेल को छोड़ दें तो सोनिया वफादारों की पूरी टीम नेपथ्य में चली गई है, जो लोग खासे एक्टिव हैं उनमें परवेज हाशमी, जितिन प्रसाद, संजय निरूपम, ज्योतिरादित्य सिंधिया, आर.पी.एन.सिंह, रवनीत सिंह, भंवर जितेंद्र सिंह, मीनाक्षी नटराजन, अशोक तंवर, सचिन पायलट, प्रदीप जैन आदि। प्रियंका गांधी भी खास तौर पर राहुल का साथ देने के लिए एक्टिव हो रही हैं पर उनकी जिम्मेदारियां चुनाव प्रचार तक ही सीमित रह सकती हैं।

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…और अंत में

Posted on 24 October 2011 by admin

Four names are doing the rounds for the next president – Meira Kumar, Manmohan Singh, Pranab Mukherjee and Hamid Ansari.

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निशाने पर टीम अन्ना

Posted on 24 October 2011 by admin

किरण बेदी के मामले का खुलासा उनकी फोन टेपिंग से हुआ। अब सरकार उनके मिजोरम के मामले को खंगाल रही है। यानी आने वाले दिन बेदी के लिए मुश्किल भरे हो सकते हैं। अन्ना टीम के एक अन्य अहम सदस्य कुमार विश्वास जो कि दिल्ली से लगे साहिबाबाद में एक कॉलेज में हिंदी के प्रध्यापक हैं, कॉलेज प्रशासन उनकी लंबी गैरहाजिरी को मुद्दा बनाते हुए उन्हें शीघ्र ही नोटिस थमाने वाला है। अरविंद केजरीवाल को 9 लाख वाले मामले में आयकर विभाग का दुबारा नोटिस आ गया है। यानी टीम अन्ना से गिन-गिन कर बदला साध रही है सरकार।

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टीम अन्ना के डॉसियर के पीछे कौन?

Posted on 24 October 2011 by admin

2जी मामले पर चारो तरफ से घिर आए चिदंबरम के सियासी अज्ञातवास की रजधूलि भी इतनी विस्फोटक होगी, टीम अन्ना को इस बात का जरा भी इल्म न था, चतुर्दिक संकटों में घिरे चतुर वकील चिदंबरम ने टीम अन्ना को घेरने का पक्का बंदोबस्त कर दिया था,और उन्हें इस काम में कपिल सिब्बल का भी बढ़-चढ़कर साथ मिल रहा था, जो टीम अन्ना से पहले से खार खाए बैठे थे। टीम अन्ना के हर अहम सदस्य का तमाम सरकारी एजेंसियां मसलन आईबी, रेवेन्यू इंटेलीजेंस के लोग सम्मिलित रूप से डॉसियर तैयार करने में जुट गए, किरण बेदी से जुड़ा ताजा मामला इसकी परिणति भर है। बेदी के एनजीओ के ऑडिटेड अकाऊंट को सरकारी एजेंसियों ने न जाने कितनी बार खंगाला, उसके बाद अंग्रेजी के एक खास अखबार समूह को (इसके ‘एडिटर इन चीफ’ चिदंबरम के अंतरंग मित्रों में से हैं) इसकी लीड दी गई, सरकार ने भी एक तरह से तय कर लिया है कि अब टीम अन्ना के सदस्यों पर प्रत्यक्ष नहीं परोक्ष हमला बोला जाएगा और सरकारी बंदूक मीडिया के कंधों पर रखकर गोली सही निशाने पर दागी जाएगी। अगला हमला एक कांग्रेस भक्त मीडिया समूह बोलेगा, फिर दो अंग्रेजी न्यूज साप्ताहिक में कई खुलासे होंगे, यानी सरकार का पूरा प्लॉन तैयार है।

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फेरबदल का मौसम

Posted on 24 October 2011 by admin

सियासी हलकों में कयास लगाए जा रहे हैं कि संसद के शीतकालीन सत्र जो कि 21 नवंबर से शुरू हो रहा है उससे ऐन पहले यूपीए-2 का चेहरा-मोहरा बदलने की कवायद हो सकती है, इस कैबिनेट फेरबदल में कई दिग्गज मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है और 5 राज्यों की आसन्न विधानसभा चुनावों के मद्देनजर कई हैवीवेट मंत्रियों को संगठन में लाया जा सकता है। कांग्रेस शासित तीन राज्यों हरियाणा, राजस्थान व आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री के सिर पर पहले से ही हाईकमान की तलवार लटक रही है, पर उनके विकल्प की तलाश अभी पूरी नहीं हुई है दो राज्यों के मुख्यमंत्रियों को महज चेतावनी देकर छोड़ा जा सकता है। पर राजस्थान में सत्ता परिवर्तन के आसार दिखते हैं।

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बेस्ट ऑफ लक पुलक

Posted on 24 October 2011 by admin

पीएमओ व दस जनपथ में जब से पुलक चटर्जी की तूती बोल रही है, खासकर प्रधानमंत्री कार्यालय की कमान जब से उन्होंने अपने हाथों में ली है, टी.के.ए.नायर अब उतने महत्त्वपूर्ण नहीं रह गए हैं और न ही पीएमओ में काबिज मलयाली लॉबी ही अब उतनी असरदार रह गई है। सो नायर अब अपने लिए नई भूमिका तलाशने का उपक्रम साध रहे हैं। सो मुमकिन है कि उन्हें जल्द ही गवर्नर बनाया जा सकता है और राजस्थान का चार्ज दिया जा सकता है पर प्रधानमंत्री नायर को दिल्ली ही रखने के पक्ष में हैं।

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क्यों पुलकित नहीं हैं पुलक

Posted on 24 October 2011 by admin

पुलक चटर्जी का बतौर प्रमुख सचिव प्रधानमंत्री कार्यालय में आना इन कयासों को जन्म देता है कि यह राहुल गांधी की ताजपोशी की तैयारी है, राहुल यूपी चुनावों के नतीजे आने तक रुकना चाहते हैं, पर पार्टी जल्दी में हैं, पार्टी व सोनिया का मानना है कि यूपी चुनाव के नतीजों से कांग्रेस का मनोबल गिरेगा और वह वक्त राहुल बाबा की ताजपोशी के लिए ठीक नहीं रहेगा। रही बात पुलक की तो फिलवक्त वे प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव जरूर हैं पर उन्हें केंद्रीय राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त नहीं है क्योंकि वरिष्ठता की क्रम में मौजूदा कैबिनेट सचिव पुलक से सीनियर हैं, और जब वे अप्रैल 2012 में रिटायर हो जाएंगे तब पुलक सबसे सीनियर हो जाएंगे। यानी वह वक्त पुलक का गोल्डन पीरियड हो सकता है।

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मनमोहन को लेक्चर

Posted on 24 October 2011 by admin

क्या राहुल गांधी मनमोहन सिंह के उदारीकरण के फार्मूले से सहमत नहीं है? नहीं तो ऐसी क्या बात है कि राहुल ने येल विश्वविद्यालय के जिस चर्चित प्रोफेसर थॉमस पोग को नई दिल्ली लेक्चर देने के लिए आमंत्रित किया है, वे उदारीकरण के सख्त आलोचकों में से हैं। जिस राजीव गांधी इंस्टीटयूट ऑफ कंटेंपरेरी स्टटीज ने पोग को अपना व्याख्यान देने के लिए भारत न्यौता है, राहुल उसके ट्रस्टी हैं। यह जर्मन प्रोफेसर बुधवार को दिल्ली में उदारीकरण, न्याय आधिकारिता विषय पर बोलेंगे, क्या राहुल का यह पूरा उपक्रम मनमोहन व प्रणब को सुनाने के लिए है, ये दोनों लोग उदारीकरण के प्रबल पैरोकारों में से हैं।

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वार को तैयार पवार

Posted on 24 October 2011 by admin

शरद पवार को करीब से जानने वाले लोग इसे उनका अब तक का सबसे बड़ा सियासी दांव बता रहे हैं। कोई ऐसा दिन नहीं गुजर रहा कि पवार अन्य राजनैतिक दलों के नेताओं से संपर्क नहीं साध रहे। ममता बनर्जी, नवीन पटनायक, मुलायम सिंह यादव और बाल ठाकरे से उनके घोषित तौर पर अच्छे संबंध हैं, और अपने इन संबंधों को मौके-बे मौके वे खाद-बीज भी डालते रहते हैं। इन दिनों उन्होंने जयललिता से भी अपने तार जोड़ रखे हैं, भाजपा में नितिन गडकरी और अडवानी से वे सतत् संपर्क में रहते हैं। अडवानी की ताजा जन चेतना यात्रा को उनका कई तरह से सहयोग प्राप्त है। सो यह अनायास नहीं है कि यूपीए-2 और प्रधानमंत्री को लेकर उनका इतना तल्ख बयान आया है, उनका यही हमलावर अंदाज 8-9 नवंबर के बीच और कहीं ज्यादा मुखर हो सकता है। पर सरकार ने भी डैमेज कंट्रोल की पूरी तैयारी कर रखी है, पवार के कुछ व्यावसायिक मित्र तिहाड़ में हैं, उनके बारे में कुछ अहम टिप्पणियां सरकारी रिकार्ड में दर्ज है, मौका आने पर सरकार भी पलटवार से नहीं चूकेगी।

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