Posted on 30 October 2011 by admin
संसद के शीतकालीन सत्र से पूर्व केंद्रीय मंत्रिमंडल का एक और विस्तार हो सकता है, इस विस्तार में यूपी, ओडिशा व आंध्र को जगह मिल सकती है। अजीत सिंह, चिरंजीवी सरीखे नेताओं का भाग्य खुल सकता है। कांग्रेस अब उन्हीं राज्यों पर फोकस करना चाहती है जहां उसे अपने लिए नई संभावनाएं दिख रही हैं।
Posted on 30 October 2011 by admin
आंध्र में कांग्रेस अपनी रणनीति चिरंजीवी के इर्द-गिर्द बुन रही है, क्योंकि यह तेलुगु सुपरस्टार जिस कापू जाति से आते हैं इस जाति का तटीय आंध्र की 12 लोकसभा सीटों पर खासा असर है, और यहां प्रतिवार सीट पर 25 फीसदी तक कापू वोट हैं जो किसी भी उम्मीदवार की हार या जीत को प्रभावित कर सकते हैं। कांग्रेस को उम्मीद है कि तटीय आंध्र में वह ‘स्वीप’ कर सकती है अगर पार्टी ने यहां दलित, मुस्लिम, पिछड़ी जातियां व कापू का जातीय समीकरण ठीक से तैयार कर लिया। रही बात रायलसीमा की तो यह जगन के प्रभाव वाला क्षेत्र है, कांग्रेस चाह कर भी यहां अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाएगी, क्योंकि जगन अपने या अपनी पार्टी की कीमत पर भी कांग्रेस को नुकसान पहुंचाने के लिए आमादा हैं, जाहिर है इसका फायदा चंद्रबाबू नायडू उठा ले जाएंगे।
Posted on 30 October 2011 by admin
डॉलर महंगा हो रहा है और रुपया सस्ता, पिछले एक महीने में रक्षा मंत्रालय ने जिस तेजी से हथियारों की खरीददारी में तेजी दिखाई है उससे कई सवाल निकलते हैं, सवाल अहम है कि आखिरकार मंत्रालय को हर रक्षा सौदा निपटाने की इतनी जल्दी क्यों हैं? इसमें किन लोगों की खास दिलचस्पी है? और कौन से लोग इसके लाभार्थी हैं? देश को इतना जानने का हक तो है ही।
Posted on 30 October 2011 by admin
एक प्रमुख मीडिया समूह ने भूटान नरेश और उनकी नव विवाहिता रानी साहिबा के सम्मान में दिल्ली के एक प्रमुख पंचतारा होटल मौर्या शेरेटन में एक जोरदार रिसेप्शन रखा। यह मीडिया समूह कुछ शिक्षण संस्थाएं भी चलाता है, और अपना एक स्कूल भूटान में भी खोलने को इच्छुक है। इस रिसेप्शन में दिल्ली के लगभग तीन सौ चुनींदा लोगों को आमंत्रित किया गया था। भूटान नरेशर् कुत्ता-पाजामा में थे और रानी साड़ी में जबकि नरेश इसी होटल के कॉफी शॉप में अक्सर जींस में नजर आते थे। रानी साहिबा को टि्वटर पर बने रहने का बहुत शौक है और राजा साहब को रानी के हर शौक का खूब ध्यान है क्योंकि उन्हें इस बात का बखूबी इल्म है कि रानी साहिबा उनसे उम्र में 11 साल छोटी हैं।
Posted on 30 October 2011 by admin
शरद पवार चौथा फ्रंट बनाने की तैयारियों में जुटे हैं, जगन रेड्डी उनके नए साथियों में शुमार हुए हैं, पिछले कुछ दिनों में जगन के साथ पवार की तीन से चार बैठकें हो चुकी है। नवीन पटनायक, नीतीश कुमार, ममता बनर्जी आदि से पवार ने पहले से ही संपर्क बनाया हुआ है। सूत्र बताते हैं कि दरअसल पवार की नजर 2014 के लोकसभा चुनावों पर है जिसमें अगर भाजपा सरकार बनाने में नाकाम रहती है तो पवार अपने चौथे फ्रंट के साथ मैदान में उतर जाएंगे, ऐसे में कांग्रेस को उन्हें समर्थन देने की मजबूरी हो सकती है क्योंकि भाजपा व शिवसेना से पवार के तार पहले से ही गहरे जुड़े हुए हैं।
Posted on 30 October 2011 by admin
अमर सिंह से मिलने जो भी जा रहा है उनसे वे यह कहने में नहीं हिचक रहे कि सोनिया जी की कृपा से ही उन्हें बेल मिली है, वैसे भी अमर ने कांग्रेस को दिवाली की डेडलाइन दे रखी थी कि या तो दिवाली तक बेल करवाओ अन्यथा उनकी चुप्पी कभी भी टूट सकती है।
Posted on 30 October 2011 by admin
सुधींद्र कुलकर्णी ने जेल के जीवन को लगता है पूरी तरह स्वीकार कर लिया है, जो भी जेल से मिलता बस वही खाकर रह जाते हैं कभी कैंटीन की ओर फटकते भी नहीं। उनका परिवार मुंबई रहता है, सो घर से खाना आने का भी सवाल नहीं। कुलकर्णी को सबसे ज्यादा नाराजगी अडवानी से हैं, उन्हें लगता है कि अडवानी अपने एक खास चेले को बचाने के लिए कभी भूले से भी अपनी जनचेतना यात्रा में ‘कैश फोर वोट’ का नाम नहीं ले रहे हैं।
Posted on 30 October 2011 by admin
इस बार दिवाली के मौके पर प्रणब मुखर्जी के घर आगंतुकों की लिस्ट में एक नया नाम जुड़ गया था, जो दिवाली के ऐन पहले प्रणब दा के घर एक बड़ा गिफ्ट लेकर पहुंचा था और इतना ही नहीं उन्होंने दादा के घर में मौजूद छोटे बड़े हर कर्मचारी को उपहारों से लाद दिया। अनिल, मुकेश व विजय माल्या का तो दिवाली के मौके पर दादा के घर पहले से आना- जाना है, पर इस नए आगंतुक की एक बड़ी रीयल एस्टेट प्रोजेक्ट लवासा पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं और इस पर टैक्स की बड़ी देनदारी भी हैं। सो, ऐसे में दादा से अनुकंपा की आशा तो वाजिब ही है।
Posted on 30 October 2011 by admin
मार्क्सवादियों के पार्टी संविधान में साफ-साफ वर्णित है कि पार्टी के नेताओं को विदेश जाने से पूर्व पार्टी से अनुमति लेनी जरूरी है, पर इन दिनों पार्टी ठेंगे पर और नेतागण बड़े आराम से विदेशों में छुट्टियां मनाते दिखे। सीताराम येचुरी की बात जाने भी दें तो वृंदा कारत ने पार्टी नियमों की कब परवाह की है। वृंदा अपनी बहन व बहनोई के साथ दक्षिण अफ्रीका छुट्टियों में चली गईं। प्रकाश कारत विदेश नहीं जाकर उत्तराखंड में अपने साढू भाई प्रणव रॉय के फॉर्म हाउस पर छुट्टियां मना रहे थे। यानी जब से बंगाल से कम्युनिस्टों की छुट्टी हुई है, उनका छुट्टी मनाने पर ज्यादा ध्यान है।
Posted on 30 October 2011 by admin
श्री-श्री रवि शंकर पर दिग्विजय सिंह का हमला एक सोची समझी रणनीति के तहत है, दरअसल दिग्विजय ने वे सारे कागजात जुटा लिए हैं जिससे इस बात का पता चलता है कि रामलीला मैदान पर 13 दिन तक चले अन्ना आंदोलन की श्री-श्री ने किस प्रकार तन मन व धन से मदद की थी। टेंट-पंडाल से लेकर देसी घी की पूरियों का रोजाना का कोई साढे छह लाख रुपयों का खर्च श्री-श्री की संस्था वहन कर रही थी। रविशंकर महेश योगी के चेले रह चुके हैं, उनके भाजपा में खास कर आडवानी से बहुत गहरे संबंध हैं, सो रविशंकर पर अब इसीलिए कांग्रेस की नजरें तिरछी हैं।