Archive | September, 2011

निशंक को कैसे लगा डंक

Posted on 13 September 2011 by admin

आखिर बैठे-बिठाए निशंक के सिर पर यह आसमान क्यों टूट पड़ा? एक अदद मुरली मनोहर जोशी और दूसरे राजनाथ सिंह जाने कब से उनकी मुखालफत कर रहे थे। पर संघ व गडकरी भक्ति से ओत-प्रोत निशंक का बाल बांका नहीं हो पा रहा था। पर बोतल से जिन्न गडकरी-जेतली विश्वासपात्र अरुण नरेंद्रनाथ के एक सर्वे रिपोर्ट की वजह से बाहर आया। नरेंद्र नाथ भाजपा के लिए जनमत सर्वेक्षण के कार्यों को अंजाम देते हैं, अभी उनका उत्तराखंड को लेकर एक ताजा सर्वे प्रकाश में आया है जिसमें वहां भाजपा की लगातार पतली होती हालत का जिक्र है, इस सर्वे में खुलासा हुआ कि भाजपा को वोट देने के इच्छुक मतदाताओं में भी 46 प्रतिशत का समर्थन भुवनचंद्र खंडूरी के साथ था, निशंक सिर्फ 15 फीसदी की पसंद थे, 8 फीसदी कोश्यारी के साथ थे। गडकरी को अब एक बड़ी जीत का इंतजार है, इसीलिए वे कोई राज्य हारना नहीं चाहते। अब चूंकि 12 तारीख से श्राध्द शुरू हो रहा है और हिंदू मान्यताओं के मुताबिक इस अवधि में कोई शुभ कार्य नहीं किया जाता, चुनांचे इसीलिए निशंक के इस्तीफे और खंडूरी की ताजपोशी के लिए इतनी जल्दी मचाई गई।

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आनंद से नहीं हैं आनंद शर्मा

Posted on 13 September 2011 by admin

आनंद शर्मा से विदेश मंत्रालय नाराज है, और नाराज हैं इसके मुखिया एस.एम.कृष्णा। मंत्री व मंत्रालय की शिकायत है कि शर्मा यदा-कदा उनके दायरे में हस्तक्षेप करते हैं। पर यह तो शर्मा की पुरानी आदतों में शुमार है कि वे कई वर्षों से भारत की विदेश नीति, पड़ोसी राष्ट्रों की गतिविधियां व महत्त्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मसलों पर छोटे-छोटे नोट्स बनाकर सोनिया गांधी को भेजा करते हैं, उनका यह उपक्रम तब भी जारी था जब सोनिया अपने इलाज के सिलसिले में अमरीका में थीं। सोनिया भले ही अभी उनके नोट्स नहीं पढ़ पाई हों, कृष्णा ने उनके इरादों को जरूर पढ़ लिया है कि आनंद की नजर विदेश मंत्रालय की कुर्सी हथियाने पर है। शर्मा का ससुराल पक्ष अफ्रीका का एक एनआरआई परिवार है, उनकी पत्नी भी लंदन में रहती हैं, सो शर्मा का भी ज्यादातर वक्त लंदन में गुजरता है, उन्हें जब भी फुर्सत मिलती फुर्र से लंदन उड़ जाते हैं, प्रधानमंत्री उनकी इन आदतों से नाखुश बताए जा रहे हैं, पर शर्मा को दस जनपथ पर पूरा भरोसा है।

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विष पान को तैयार नहीं युवराज

Posted on 13 September 2011 by admin

राहुल गांधी ने अपने पार्टी जनों से स्पष्ट कह दिया है कि मौजूदा वक्त में वे कोई बड़ी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं, न तो वे पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष बनना चाहते हैं और न ही प्रधानमंत्री का पद संभालने के इच्छुक हैं, राहुल अपना रटा-रटाया ब्रह्म वाक्य दुहरा रहे हैं कि वे भारत के हर कोने में घूम-घूम कर कांग्रेस को मजबूत करना चाहते हैं। राहुल ब्रिगेड के एक अहम सदस्य का दावा है कि यह कांग्रेस के लिए उपयुक्त वक्त नहीं है। ऐसे में कांग्रेस की बागडोर संभालना राहुल के लिए विष-पान करना सरीखा हो जाएगा, सो युवराज का सारा ध्यान इन दिनों बस मीडिया-अटेंशन का है, कि वे ऐसा क्या करें जो सुर्खियों बटोर सकें।

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पीएम की ‘हिलिश डिप्लोमेसी’

Posted on 13 September 2011 by admin

प्रधानमंत्री जब ढाका पहुंचे तो उन्होंने बांग्ला देश की सबसे बड़ी समाचार एजेंसी ‘बांग्लादेश संवाद संस्था’ को एक लंबा इंटरव्यू दिया और बातों ही बातों में कह गए कि कालांतर में वे मछलियां खासकर ‘हिलिश माछ’ के कितने बड़े शौकीन रहे हैं, पर अब हेल्थ ग्राउंड पर उन्होंने मांसाहारी भोजन से तौबा कर ली है और शाकाहारी हो गए हैं, पर अगर उनकी होस्ट उन्हें हिल्सा मछली परोेस तो वे एक बार के लिए अपना शाकाहार तोड़ सकते हैं, मेजबान ने आवाज सुन ली, रात को ही शेख हसीना की ओर से डिनर आयोजित था जिसमें किस्म-किस्म की हिल्सा मछलियां परोसी गईं, प्रधानमंत्री ने भी वादा निभाया, ‘हिलिश माछ’ का स्वाद चखा। जब वे वहां से अपने विशेष विमान में दिल्ली के लिए रवाना हुए तो एक बड़े बॉक्स में भरकर उन्हें मेजबान देश ने हिल्सा मछली उपहार के तौर पर दी। प्रधानमंत्री ने ‘हिलिश डिप्लोमेसी’ के तहत यह मछलियां विभिन्न पार्टियों के नेताओं को उपहार के तौर पर भिजवाईं, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के कुछ बंगाली प्रोफेसरों को भी यह सौगात मिली।

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दादा व दीदी में ठनी

Posted on 13 September 2011 by admin

किसको मालूम था कि कांग्रेस-तृणमूल का हनीमून इतनी जल्दी खत्म हो जाएगा, सियासी तेवरों का शृंगार किए पारंगत रणबांकुरे इस कदर शह-मात की बिसात पर आमने-सामने डट जाएंगे। लंबे समय से प्रणब दा के निजी सचिव रहे मनोज पंत संयुक्त सचिव की समकक्षता में आ गए, संयुक्त सचिव स्तर का आईएएस मंत्री का पीएस नहीं हो सकता, चुनांचे इसीलिए दादा ने उन्हें वाशिंगटन में अच्छी पोस्टिंग दिलवा दी, दादा को अपने लिए एक नया पीएस चाहिए था, सो उनकी रुचि बीरभूम (जो उनका गृह क्षेत्र भी है) के जिलाधिकारी में थी, जिन्हें वह अपना निजी सचिव बनाकर दिल्ली लाना चाहते थे, वह बंगाल कैडर का आईएएस है, लिहाजा इसके लिए राज्य सरकार की अनुमति लेनी अपरिहार्य है, पर ममता दीदी अड़ गईं, नहीं भेजेंगी, उन्होंने बकायदा दिल्ली चिट्ठी लिख दी, ‘हमारे यहां ऐसे भी आईएएस अफसरों का अकाल पड़ा है, सो हम अपने अफसर दिल्ली कैसे भेज सकते हैं, भेजना है तो दिल्ली अपनी सरजमीं से कुछ आईएएस वापिस बंगाल भेजे।’ दादा ने दीदी का सियासी संदेश बखूबी पढ़ लिया है, आने वाले दिन दादा के इरादों की चुगली करेंगे।

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…और अंत में

Posted on 04 September 2011 by admin

सीएजी के जिस ताजा रिपोर्ट में एयर इंडिया के 40 हजार करोड़ के घपलों का खुलासा हुआ है उसमें अंगुली ‘ग्रुप ऑफ मिनिस्टर’ पर भी उठाई गई है, इस मामले में गृह मंत्री चिदंबरम की अति सक्रियता भी सवालों के घेरे में है, यह प्रफुल्ल पटेल के लिए राहत की बात हो सकती है कि इस मामले में वे अकेले ही नहीं लपेटे जाएंगे।

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गवर्नर का पत्र

Posted on 04 September 2011 by admin

मेघालय के गवर्नर आर.एस.मुशाहरी ने तमाम सांसदों को एक भावपूर्ण चिट्ठी लिखी है कि ‘…मैं सिविल सोसायटी का सदस्य होने के नाते… आपसे मांग करता हूं…’ अब सांसद एक-दूसरे से पूछ रहे हैं कि मुशाहरी साहब तो जिंदगी भर पुलिस की नौकरी करते रहे एक आईपीएस होने के नाते, नौकरी से रिटायर होते ही गवर्नर लग गए, अब गवर्नर साहब को सिविल सोसायटी की डिग्री कब मिल गई?

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पांडया मर्डर में नया मोड़

Posted on 04 September 2011 by admin

कांग्रेस ने गुजरात के पूर्व गृह मंत्री हरेन पांडया के मर्डर को एक राजनैतिक रंग देने की पूरी तैयारी कर ली है, जस्टिस वाघेला की ताजा जजमेंट में जिस प्रकार चंद मुस्लिम आरोपियों को इस मामले से बरी कर दिया गया है सो अब मामले की सूई घूम-घामकर हरेन के पिता के उस आरोपों की चुगली करती है जिसमें उन्होंने अपने बेटे की हत्या के लिए सीधे नरेंद्र मोदी पर अंगुली उठाई थी। अब दिवंगत पांडया की पत्नी जागृति के ताजा बयान भी इसी बात की तस्दीक करते हैं। सो आने वाले दिनों में पांडया परिवार की ओर से इस मामले में हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल करके इस बात की गुहार लगाई जा सकती है कि इस मामले की नए सिरे से जांच हो यानी नरेंद्र मोदी को इतने सस्ते में नहीं छोड़ने वाली है कांग्रेस।

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बढ़ रही हैं अमर की परेशानियां

Posted on 04 September 2011 by admin

अमर सिंह की परेशानियों का अंत होते नहीं दिखता। एक ओर जहां ‘कैश फॉर वोट’ मामले में चार्जशीट में उनका नाम आ जाने के बाद यह मांग उठने लगी है कि उन्हें संसद की स्थायी समिति से हटाया जाए। वहीं क्लिंटन फाऊंडेशन को कथित तौर पर 26 करोड़ के चंदे के मामले ने एक बार फिर से सिर उठाना शुरू कर कर दिया है। समझा जाता है कि इस मामले की जांच में तेजी आ गई है और क्राईम ब्रांच बहुत जल्दी अपनी रिपोर्ट प्र्रवत्तन निदेशालय को आगे की कार्यवाही के लिए सौंपने वाला है। एक वकील विश्वनाथ चतुर्वेदी (जो कई वरिष्ठ कांग्रेसी मंत्रियों के करीबी माने जाते हैं) ने सबसे पहले यह पूरा मामला उठाया था और उन्होंने बकायदा कोर्ट में हलफनामा दायर कर इस मामले में हवाला मनी के इस्तेमाल का अंदेशा जताया था। तब रिवर्ज बैंक ने भी स्पष्ट किया था कि उससे ऐसी किसी रकम को बाहर भेजने की अनुमति नहीं ली गई है, तब वकील साहब ने बकायदा ईडी से भी शिकायत की थी। अब जबकि अमर से कांग्रेस को अपने कई मंतव्य साधने हैं, सो, वह एक हथियार के मानिंद इस मामले का इस्तेमाल सिध्दहस्ता से करना चाहती है।

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सुषमा का इरादा

Posted on 04 September 2011 by admin

जन लोकपाल पर शनिवार को संसद में बहस के दौरान भाजपा की ओर से हर कोई बोलना चाहता था, यशवंत सिन्हा से लेकर अनंत कुमार तक, पर नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज ने टीआरपी के इस महादिन पार्टी के अपने युवा साथी वरुण गांधी को मौका दिया, दरअसल सुषमा का आइडिया राहुल (वे शुक्रवार को बोले थे) के बैक ड्रॉप पर अपनी पार्टी के गांधी का प्रक्षेपण था ताकी लोग दो भाईयों, दो गांधियों व दो विचारधाराओं का तुलनात्मक विवेचन कर पाएं, जिसमें वे पूरी तरह सफल रहीं। यहां तक कि अडवानी भी इस राय के थे कि रिज्यूलेशन जल्दी से जल्दी पारित हो जाए इसके लिए वे एक बार खड़े भी हो गए थे, पर सुषमा ने अपनी पार्टी के दूसरे स्पीकर की बारी आने का शांतिपूर्वक इंतजार किया, इंतजार में घंटों गुजर गए, सुबह से शाम हो गई पर सुषमा का इरादा नहीं बदला।

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