क्या एक और केंद्रीय मंत्री की बलि चढ़ सकती है? एयर इंडिया के खस्तेहाली को लेकर सीएजी ने अपने ताजा रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताओं का जिक्र किया है, यानी जांच की आंच तब के नागरिक उड्डयन मंत्री प्रफुल्ल पटेल तक पहु
Posted on 28 August 2011 by admin
क्या एक और केंद्रीय मंत्री की बलि चढ़ सकती है? एयर इंडिया के खस्तेहाली को लेकर सीएजी ने अपने ताजा रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताओं का जिक्र किया है, यानी जांच की आंच तब के नागरिक उड्डयन मंत्री प्रफुल्ल पटेल तक पहु
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Posted on 28 August 2011 by admin
चुनाव आयोग बिहार-बंगाल के सफल चुनावी मॉडल से बम-बम है और अब यूपी में भी वह अपना यही फार्मूला आजमाना चाहता है। चुनाव आयोग यूपी में सात चरणों में मतदान करवाना चाहता है और इस पूरी प्रक्रिया में डेढ़ से दो महीने का वक्त लग सकता है। चुनाव तो पंजाब व उत्तराखंड में भी होने हैं उम्मीद जताई जा रही है कि इन दोनों राज्यों में मध्य जनवरी तक चुनाव करवा लिए जाएंगे। गोवा व मणिपुर में अप्रैल के दूसरे सप्ताह में चुनाव करवा लिए जाएंगे। चूंकि अगले ही साल राष्ट्रपति व उपराष्ट्रपति के भी चुनाव होने हैं, राष्ट्रपति का चुनाव 2012 के मध्य जून में होना है, सो चुनाव आयोग चाहता है कि राष्ट्रपति चुनाव से पहले इन 5 राज्यों की नई विधानसभा गठित हो जाए जिससे कि ‘इलेक्ट्रॉल रोल’ बनाने में आसानी हो सके।
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Posted on 28 August 2011 by admin
यूपी में बहिनजी के सियासी इरादों को पलीता लग सकता है, बहिनजी चाहती हैं कि वहां मई-जून में विधानसभा चुनाव हों, बहिन जी को लगता है कि उस वक्त की झुलसा देने वाली गर्मी में सवर्ण मतदाताओं का वोट देने के लिए बाहर निकल पाना इतना आसान नहीं होगा। महिला वोटरों के लिए भी लू की लक्ष्मण रेखा पार करनी आसान नहीं होगी, जबकि बसपा के कैडर वोट थोकभाव में डले-डाले जाएंगे। वहीं मुलायम सिंह व भाजपा (अन्ना प्रकरण से पहले कांग्रेस की भी यही राय थी) यहां तक कि चुनाव आयोग की भी यही राय थी कि यूपी में चुनाव का पहला चरण फरवरी से प्रारंभ हो जाए।
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Posted on 28 August 2011 by admin
पार्टी लाइन से दीगर (जब तक भाजपा अन्ना को समर्थन देने के मुद्दे पर असमंजस में थी) वरुण गांधी ने जिस प्रकार अन्ना हजारे आंदोलन को बढ़-चढ़कर समर्थन दिया, इससे उनके युवा समर्थकों की तादाद में खासी वृध्दि हुई है। दरअसल श्री-श्री रविशंकर ने वरुण की बात अन्ना से करवाई थी और अन्ना ने ही इस भगवा गांधी से रामलीला मैदान आने का आग्रह किया था, पर साथ ही यह भी साफ कर दिया था कि वे वरुण को अपने मंच पर नहीं बुला पाएंगे, क्योंकि उनके पूर्व में लिए संकल्प के मुताबिक उनका मंच राजनेताओं के लिए निषिध्द है, पर वक्त की नब्ज भांपने में माहिर युवा गांधी समझ गए थे कि अगर वे अनशन स्थल पर जाकर जनता के बीच भी बैठते हैं तो भी उन्हें वाह-वाही तो उतनी ही मिलेगी। सो अपने चचेरे भाई राहुल से दीगर वरुण का यह स्टैंड उन्हें एक नई सियासी जमीन मुहैया करा गया।
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Posted on 28 August 2011 by admin
जिंदगी की बतकहियों में कई विसंगतियों का दर्द भी छुपा होता है, अब जैसे इस शुक्रवार को संसद में कांग्रेसी युवराज बेहद गंभीर भाव-भंगिमाओं से लैस होकर भ्रष्टाचार जैसे गंभीर मुद्दे पर बोलने के लिए खड़े हुए तो वे किंचित इस तथ्य से अनजान थे कि वक्त के गर्दो-गुबार में क्या छुपा है। 2 बिलियन डॉलर की मिराज डील आने वाले दिनों में कांग्रेस की पेशानियों पर बल ला सकती है। इस बात के कुछ पुख्ता सबूत मिलने लगे हैं कि इस डील में बिचौलियों की एक महती भूमिका थी और कयास लगाए जा रहे हैं कि किक-बैक के तौर पर 400 करोड़ रुपयों की जो कथित रकम सिंगापुर स्थित (यह कंपनी स्विट्जरलैंड में रजिस्टर्ड है और इसका काम-काज सिंगापुर से चलता है) जिस विदेशी कंपनी के खाते में जमा हुई है, दरअसल उसका स्वामी भारत के एक सबसे शक्तिशाली राजनैतिक परिवार से जुड़ा है। उसके घोटालों की अनुगूंज संसद व संसद से बाहर सुनाई दे रही है, शायद इसीलिए यह व्यक्ति भारत की बजाए इन दिनों लंदन में रहना ज्यादा पसंद कर रहा है। एक इजराइली कंपनी का नाइट विजन डिवाइसेस सौदे को सिरे चढ़ाने में भी इसी व्यक्ति की भूमिका बताई जाती है। लिहाजा बात निकलेगी तो दूर तलक जाएगी…!
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Posted on 28 August 2011 by admin
अगली बात यहां से शुरू करे कि क्या कांग्रेसी युवराज सरकार व प्रधानमंत्री के आधिकारिक लाइन में पलीता लगाने आए थे? या राहुल गांधी पार्टी के अंदर के एक नए सियासी खेल को कहीं आगे ले जाना चाहते हैं, वैसे भी राहुल की तमाम तरह के खेलों में पहले से दिलचस्पी रही है, विश्व कप में भारत की जीत के बाद वे मुंबई में सलमान खान के घर गए थे जहां रात भर जश्न हुआ था, पर राहुल को इस बात में ऐसा कुछ नहीं लगा कि एक बार अन्ना से मिलने वे अनशन स्थल तक जा पाते, राहुल अपनी स्पीच में ‘माईंड चेजिंग गेम’ का हवाला दे गए, कांग्रेस के अंदरखाने में भी कुछ ऐसा ही गेम शुरू हो चुका है। पहले के लोग पीछे हो गए हैं और राहुल की पूरी टीम ने एक तरह से अन्ना व लोकपाल के मसले को हाईजैक कर लिया है। यहां तक कि स्वयं प्रधानमंत्री से भी राहुल की इस मसले पर एक या दो बार बात हुई, वरिष्ठ नेताओं में सिर्फ प्रणब मुखर्जी से टीम राहुल निरंतर संपर्क में है, वरना अहमद पटेल सरीखे पार्टी के पुराने संकटमोचकों को भी दरकिनारे कर दिया गया है, इसे पूरे मसले पर अहमद पटेल से टीम राहुल ने उनकी राय लेनी भी जरूरी नहीं समझी। यानी लोकपाल कांग्रेस के नए द्वारपाल के लिए संभावनाओं की आहट खोल रहा है, पूरी टीम राहुल, उनकी बहन प्रियंका का संसद के दर्शक दीर्घा में यूं आना, शायद हौले से इस बात की चुगली कर रहा है-‘क्या तेज जगमगाती थी कातिल के हाथ में अब उसकी आस्तीन में तो खंजर भी न रहा।’
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Posted on 28 August 2011 by admin
‘देश के युवा यहां हैं, राहुल गांधी कहां हैं?’ रामलीला मैदान पर अन्ना के अनशन को समर्थन देने के लिए जुटे युवाओं ने जब यह उद्धोष प्रारंभ किए तो सत्ता के नेपथ्य से संसदीय रंगमंच पर यूं अवतरित हुए कांग्रेसी युवराज जैसे प्रधानमंत्री की लाइन से इतर वे लोकपाल पर एक नया एजेंडा लेकर आए हों। पर शनिवार को अपने उद्बोधन में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज ने इसे राहुल गांधी का राष्ट्र के नाम संदेश करार दिया। सुषमा ने न केवल राहुल की 5 पन्नों की 15 मिनट की ‘स्पीच रीडिंग’ पर सवाल उठाए अपितु संसदीय प्रक्रियाओं को भी कटघरे में खड़ा किया। नेता प्रतिपक्ष का कहना था कि माननीय स्पीकर जीरो ऑवर में अव्वल तो ऐसे इंटरवेंशन की अनुमति नहीं देती और अगर ऐसी अनुमति दी भी जाती है तो महज 3 मिनट के लिए, जिसे वक्ता खींच-खाचकर 5 मिनट तक ले जा सकता है। सो विपक्ष को लग रहा है कि राहुल संसद में कांग्रेस की पार्टी लाइन बताने आए थे। विपक्ष खासकर भाजपा को यह भी लगता है कि राहुल प्रधानमंत्री के ‘स्टेट्समैनशिप’ पर पानी फेर गए। अन्ना का अनशन तुड़वाने में कांग्रेस से कहीं ज्यादा विपक्ष की एक महती भूमिका रही। यही एक बात है जो प्रधानमंत्री खेमे को खाई जा रही है।
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Posted on 21 August 2011 by admin
इन दिनों एक एसएमएस खूब लोकप्रिय हो रहा है, रिटायरमेंट के बाद मनमोहन सिंह जब अपनी बॉयोग्राफी लिखेंगे तो उसमें अपने जीवन की तीन बड़ी भूलों का बेबाकी से जिक्र करेंगे-2जी, 3जी और सोनिया जी। (एनटीआई) gossipguru.in
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Posted on 21 August 2011 by admin
प्रधानमंत्री कार्यालय ने राष्ट्रपति भवन को सूचित कर दिया है कि राज्यपालों की जो कांफ्रेंस अगस्त के तीसरे सप्ताह में दिल्ली में होने वाली थी उसे मानसून सत्र की वजह से स्थगित कर दिया गया है। जबकि सच यह है कि अण्णा के अनशन से सरकार की चूलें हिली हुई हैं, एक हिंदी भाषी राज्य के गवर्नर के खिलाफ ईडी ने काफी प्रतिकूल टिप्पणियां की है, सो मनमोहन उसे राज्यपाल कांफ्रेंस का हिस्सा नहीं बनने देना चाहते थे, अब चूंकि आने वाले दिनों में (संसद का मानूसन सत्र खत्म होने के बाद) नए राज्यपालों की नियुक्ति होनी है सो उस फेरबदल में उस पूर्व कांग्रेसी कुंवर की छुट्टी होनी तय है, इसके बाद नवंबर माह में कभी यह कांफ्रेंस आयोजित होगी।
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Posted on 21 August 2011 by admin
भाजपा भी किसानों के मुद्दे पर गंभीर रुख अख्तियार कर रही है, राजनाथ सिंह इस मुद्दे की अगुवाई कर रहे हैं, राजनाथ जब इस मुद्दे को लेकर विदर्भ पहुंचे तो उनकी एक सभा में राहुल गांधी की चर्चित कलावती भी आ पहुंची, वो सभा के बाद व्यक्तिगत तौर पर राजनाथ सिंह से मिलने आईं और उनसे कहा कि राहुल के आने से उन्हें व्यक्तिगत तौर पर नाम और पैसा दोनों मिल गया, पर इससे विदर्भ में किसानों के हालात बदले नहीं है। उनकी जैसी अभी भी यहां कोई 2 हजार विधवाएं दर-दर की ठोकरें खा रही हैं जिसे कोई राहुल गांधी नहीं मिल पा रहा है।
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