Archive | July, 2011

जयराम का जय घोष

Posted on 18 July 2011 by admin

जयराम रमेश सोनिया व राहुल की अनुकंपा के आधार पर ग्रामीण विकास मंत्रालय में भेजे गए हैं, सही मायनों में यह उनका प्रमोशन ही है, वे राहुल को प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचाने में एक अहम जिम्मेदारी निभाने वाले हैं। कांग्रेस जल्द ही संसद में ‘फूड सिक्युरिटी बिल’ लाने जा रही है, जयराम इस बिल का ताना-बाना बुन रहे हैं। सलमान खुर्शीद के कंधों पर भी राहुल ने एक खास जिम्मेदारी सौंपी है, वे अभी से ‘कम्यूनल वॉयलेंस बिल’ लाने में जुट गए हैं, इसीलिए उन्हें अपेक्षाकृत ईमानदार माने जाने वाले मोइली के स्थानांपन्न के तौर पर ढूंढा गया है और उन्हें अल्पसंख्यक मंत्रालय के अतिरिक्त प्रभार से नवाजा गया है।

Comments Off on जयराम का जय घोष

संचार तंत्र की नाकामी

Posted on 18 July 2011 by admin

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण की यह शिकायत वाजिब भी लगती है कि उन्हें भी मुंबई सीरियल बम धमाकों की खबर देर से मिली, क्योंकि धमाके होते ही प्रभावित इलाकों के मोबाइल टावर्स से आ रहे सिग्नल को तत्काल प्रभाव से जैम कर दिया गया। सनद रहे कि मोबाइल क्रांति से पहले तक पुलिस वालों को ज्यादातर सूचनाएं व कमांड आईएसपीडब्ल्यू यानी इंटरस्टेट पुलिस वॉयरलेस के मार्फत मिलती थी, पुलिस व खुफिया तंत्र के बड़े आला अधिकारी व राज्य के मुख्यमंत्री भी इसके वीआइपी नेटवर्क से जुड़े रहते थे, पर संचार क्रांति आने के बाद जब से मोबाइल फोन का चलन व इसका बोलबाला बढ़ा है पुलिस व खुफिया तंत्र की निर्भरता भी इस पर काफी हद तक बढ़ गई है, इस खतरे को जानते-बूझते बगैर कि कई आतंकी संगठनों को मोबाइल सिग्नल हैक करने में, बातचीत टैप करने में महारथ हासिल है, वक्त आ गया है कि सूचना के आदान-प्रदान के लिए हमारी पुलिस व खुफिया एजेंसियां अपने संचार जाल पर ज्यादा भरोसा करे।

Comments Off on संचार तंत्र की नाकामी

बस करो दिग्विजय

Posted on 18 July 2011 by admin

मुंबई की हवाओं में हर तरफ अभी भी शेष है जले बारूद की गंध, अमोनियम नाइट्रेट जैसे शहर की सांसों में घुल गया हो, हर आती-जाती धड़कनें अभी भी जैसे आईईडी से कनेक्टहो, हर-सहमी इन्हीं आहटों के बीच दिग्विजय सिंह जैसा वोटों का कोई सौदागर अभी भी दहशतगर्दी फैलाने में जुटा है… ‘हिंदू आतंकवाद’ का नाम देकर, ये वही लोग हैं जो सिमी को बैन किए जाने के सबसे ज्यादा विरोध में थे, 2001 के 911 के बाद जब सिमी पर प्रतिबंध लगाया गया, तो धीरे-धीरे इंडियन मुजाहिद्दीन (आइएम) के तौर पर इसका एक नया आउटफिट विकसित हुआ, जिसके तार वाराणसी, बेंगलुरु, अहमदाबाद, दिल्ली, मुंबई लोकल बम धमाकों से जुड़े। इस मुंबई धमाकों में भी इसी आतंकी संगठन का हाथ बताया जाता है, सो तौकीर हो, सफदर नागोरी, अबू बशीर या कयामुद्दीन कपाड़िया इस ग्रुप से ज्यादातर पढ़े-लिखे यंग प्रोफेशनल्स जुड़े, इसके 60 आतंकी अभी भी गुजरात की साबरमती जेल में कैद हैं, बावजूद इसके हमारी खुफिया एजेंसियाें के पास आज भी आईएम का कोई मुकम्मल डॉसियर उपलब्ध नहीं, है न यह बड़े हैरत की बात?

Comments Off on बस करो दिग्विजय

…और अंत में

Posted on 03 July 2011 by admin

खाना बदोशों की तरह भटकते ये लफ्ज, भट्ठी में धधकते ये विचार, जो पिछले 11 वर्षों से पाठकों को हर हफ्ते कुछ नया सोचने को मजबूर करते हैं, आपका चहेता ‘मिर्च मसाला’ कॉलम आने वाले दो-तीन हफ्तों की छुट्टी चाहेगा, इतने वक्त देश से बाहर रह कर भी हर पल आपके ख्यालों में शरीक रहूंगा। जुलाई में फिर होगी मुलाकात! तब तक के लिए विदा!

Comments Off on …और अंत में

किस तोते में बाबा की जान

Posted on 03 July 2011 by admin

कांग्रेस का एक खेमा बाबा रामदेव के उन तोतों की पड़ताल की वकालत कर रहा था जिसमें बाबा की जान बसती है। जैसे बाबा को सहारा श्री सुब्रत राय से बहुत लगाव है, बाबा अक्सर सहारा का चार्टर्ड विमान इस्तेमाल करते देखे जा सकते हैं और अब तो बाबा घोषित तौर पर अरबपति हो गए हैं सो चार्टर्ड से क्या गुरेज। वैसे ही मुंबई के एक बड़े बिल्डर माफिया सुधाकर शेट्टी बाबा के अनन्य भक्तों में शामिल हैं। कहते हैं बाबा के अनशन में कोई 20 हजार लोग शेट्टी के खर्चे पर मुंबई से आए थे। सहारा ने हाल के दिनों में कोई 2 हजार करोड़ की कथित रकम अदा कर सेंट्रल लंदन के सबसे सभ्रांत हाईड पार्क इलाके में एक शानदार पंचतारा होटल ग्रोवनर हाउस खरीदा है, कांग्रेसी इस डील को बेपर्दा करवाना चाहते हैं।

Comments Off on किस तोते में बाबा की जान

क्या होगा टाटा का

Posted on 03 July 2011 by admin

टाटा को बेशक सीबीआई ने अपनी ओर से क्लीनचिट दे दी है, पर कोर्ट का रुख अभी देखना बाकी है, यूं भी अनिल अंबानी पर अब भी खतरे की तलवार लटक रही है। ज्ञात हो कि अनिल की कंपनी पर कथित तौर पर एक प्रमुख भारतीय बैंक का 65 हजार करोड़ रुपयों का कर्ज है।

Comments Off on क्या होगा टाटा का

फल की चिंता में उमा

Posted on 03 July 2011 by admin

उमा भारती इस दफे तनिक बदले अवतार में अपने घर भाजपा में वापिस आई हैं, अब न तो उनके तेवर पहले से उग्र हैं, और न ही वाणी असंयमित, वह फूंक-फूंक कर चल रही हैं। पार्टी में अपने चिरंतन विरोधियों से समय मांग कर उनसे उनके घर मिलने भी जा रही हैं। भाजपा की एक प्रमुख नेत्री के घर वह लंच पर पहुंची तो उन्होंने खुलासा किया कि इन दिनों जबसे वह गंगा मैया की सेवा में है अन्न का त्याग कर रखा है, सो वह सिर्फ फलाहार करेंगी। उमा को फल की चिंता करते देख भाजपा की इस शीर्ष नेत्री को अच्छा लगा।

Comments Off on फल की चिंता में उमा

तैयारी में थे बाबा

Posted on 03 July 2011 by admin

बाबा अपनी पूरी सियासी तैयारी के साथ अनशन पर बैठने आए थे, बाबा की पूरी योजना थी कि जब रामलीला ग्राउंड पर उनका अनशन टूटेगा तो उसी वक्त एक राजनैतिक पार्टी के गठन की घोषणा कर दी जाएगी। बाबा ने बकायदा अपनी नई पार्टी को चुनाव चिन्ह आबंटित करवाने के वास्ते चुनाव आयोग में अर्जी भी दाखिल कर रखी थी। भाजपा का इरादा 2014 के लोकसभा चुनाव में सभी 543 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने का था। वह तो भला हो यूपीए सरकार के कनफुसिए सलाहकार सिब्बल व चिदंबरम का जो उन्होंने भाजपा को संजीवनी दिलवा दी, नहीं तो रामदेव के उम्मीदवार वोट किसका काटते?

Comments Off on तैयारी में थे बाबा

जागते रहे गडकरी

Posted on 03 July 2011 by admin

अनशनकारियों पर इतनी बर्बरतापूर्ण अंदाज में पुलिसिया कार्यवाही हुई है इसका पता सोनिया को सुबह आठ बजे चला, भाजपा के दो बड़े नेताओं को सुबह सात बजे के आस-पास यह ज्ञात हो सका। बड़े नेताओं में भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ही एकमात्र थे जिन्होंने इस पूरी पुलिसिया कार्यवाही का न्यूज चैनलों पर लाइव देखा।

Comments Off on जागते रहे गडकरी

रेसकोर्स की दौड़ से नाराज जनपथ

Posted on 03 July 2011 by admin

बाबा रामदेव प्रकरण पर सोनिया व मनमोहन की नीतियों में एक साफ विभाजक रेखा दिखी, अव्वल तो सोनिया मंत्रियों को बाबा की अगवानी में एयरपोर्ट भेजने की पक्षधर नहीं थी, अलबत्ता केंद्रीय मंत्रियों को एयरपोर्ट भेजने से पहले पीएमओ ने सोनिया से जरूरी राय लेना भी मुनासिब नहीं समझा। सोनिया बाबा समर्थकों पर किसी कठोर कार्यवाही के पक्ष में नहीं थीं, जबकि चिदंबरम, कपिल सिब्बल व प्रणब पीएम को समझाने में कामयाब रहे कि पुलिसिया कार्यवाही किए बगैर बाबा का अनशन तुड़वाना आसान नहीं, सिब्बल व चिदंबरम ने सच्चे वकील के मानिंद जिरह की, वैसे भी वकीलों का सुलह में कितना विश्वास होता है?

Comments Off on रेसकोर्स की दौड़ से नाराज जनपथ

Download
GossipGuru App
Now!!