Posted on 10 April 2011 by admin
खोदा पहाड़ और निकली चुहिया, लगता है हसन अली को जस्टिस तहिलयानी ने खूब पहचाना है, क्या वे महज नटवरलाल के नए अवतार हैं? जिनका काम फर्जी कागजों, बैंक अकाऊंट्स के जरिए विभिन्न कंपनियों को लोन दिलाने के नाम पर चूना लगाना भर था। हसन अली का बेटा भी हैदराबाद की एक कंपनी में मामूली नौकरी करता है। लगता है हमारी जांच एजिंसियां अली की पड़ताल में चूक गई हैं।
Posted on 10 April 2011 by admin
पीएसी अध्यक्ष होने के नाते मुरली मनोहर जोशी अपने अधिकार क्षेत्र से भली-भांति वाकिफ थे, सो रतन टाटा, अनिल अंबानी, नीरा राडिया सरीखों को पूछताछ के लिए बुलाने का उनका इरादा बिल्कुल नहीं था। पर चोर की दाढ़ी में तिनका, वह तो इन तीनों ने और कई अन्य व्यक्तियों ने स्वयं चिट्ठी लिखकर जोशी से आग्रह किया कि वे अपना पक्ष रखने के लिए पीएसी के समक्ष उपस्थित होना चाहते हैं, ‘अंधा क्या चाहे दो आंखें’ सो जोशी ने फौरन पूछताछ के लिए इन्हें तलब कर लिया यह सत्य जानते हुए कि पीएसी का अधिकार क्षेत्र सिर्फ सीएजी रिपोर्ट में लगाए गए (2जी स्पेक्ट्रम मामले) आरोंपो की जांच भर है।
Posted on 10 April 2011 by admin
संजय जोशी की भाजपा में वापसी एक तरह से पक्की मानी जा रही थी कि यूं अचानक फिर से इस मामले ने यू-टर्न ले लिया है। इस दफे विरोध भाजपा से नहीं (नरेंद्र मोदी बहुत हद तक इस मामले में उदासीन हो गए हैं) अपितु जोशी की वापसी पर संघ ही किंचित दो भागों में बंटा नजर आता है। संघ प्रमुख मोहन भागवत और भैयाजी जोशी सरीखे नेता एक ओर जहां जोशी की भाजपा वापिसी सुनिश्चित कराने के प्रयासों में जुटे हैं, वहीं कहीं मदनदास देवी और सुरेश सोनी जोशी के विरोध में अलख जगा रहे हैं, सो यह पेंच इस कदर फंसा हुआ है।
Posted on 10 April 2011 by admin
प्रफुल्ल पटेल ने जाते-जाते एयर इंडिया का भट्ठा बिठाने का पुख्ता इंतजाम कर दिया है। अब वर्तमान नागरिक उड्डयन मंत्री व्यालार रवि इन तमाम तरह के मामलों को झाड़-पोंछकर बाहर निकाल रहे हैं। यूं भी सवाल अहम है कि एमिरेट्स, एयर एशिया व गल्फ एयर को भारत में इतने महत्त्वपूर्ण गोल्डन रूट्स आखिरकार कैसे मिल गए? सूत्रों के अनुसार पूर्र्ववत्ती मंत्री का एक खास बंदा है जिसने इन सारी डील को अंजाम तक पहुंचाया है, इसी व्यक्ति के दफ्तर में एयर एशिया का ऑफिस चलता है, एमिरेट्स के विपणन अधिकार भी इसी व्यक्ति के पास हैं। एमिरेट्स की लो फेयर ‘फ्लाई दुबई’ की उड़ान चंडीगढ़ से शुरू हो गई है। कई और नए रूट्स दिए जा रहे हैं। कहा जाता है कि यह हजारों करोड़ का खेल है, 20 डॉलर प्रति सीट के हिसाब से भुगतान होने की बात कही जा रही है। इसी व्यक्ति के आईजीआई एयरपोर्ट पर कई डयूटी-फ्री शॉपस भी हैँ। अब नाम में क्या रखा है , इस व्यक्ति का नाम भाजपा के प्रकाश जावड़ेकर पहले ही राज्यसभा में ले चुके हैं।
Posted on 03 April 2011 by admin
फिक्की के महासचिव और ममता को आर्थिक मामलों पर सलाह देने वाले अमित मित्रा को चुनावी सरगर्मियां रास नहीं आ रही, सनद रहे कि वे तृणमूल के टिकट पर वामपंथी वित्त मंत्री असीम दास गुप्ता के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं। चुनाव प्रचार के दौरान गर्मी नहीं झेल पाने की वजह से अचानक से वे बीमार पड़ गए हैं, यह खबर लगते ही मराठी मूल की उनकी पत्नी मीरा ने फौरन दिल्ली से कोलकाता की फ्लाइट पकड़ ली है।
Posted on 03 April 2011 by admin
महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों में कांग्रेस को आंखें तरेरना शब्द पवार को भारी पड़ रहा है। एक के बाद एक पवार से जुड़े मुद्दे प्रकाश में आ रहे हैं और शरद के मन का अंधेरा बढ़ता ही जा रहा है। 2जी का मामला परत दर परत जिस प्रकार खुल रहा है और उसमें पवार कनेक्शन जिस भांति बेपर्दा हो रहा है वह इस मराठा दिग्गज के लिए चिंता की बात है। शाहिद बल्वा, आसिफ बल्वा से होता हुआ 2जी कनेक्शन जिस तरह डी-कंपनी से जुड़ रहा है, यानी सीबीआई की जो चार्जशीट फाइल हो रही है वह हैरान करने वाली है। संजय चंद्रा का भी नाम चार्जशीट में आ रहा है। ऐसा सूत्रों का कहना है। 2जी मामले में 25 अप्रैल तक सीबीआई तमाम चार्जशीट फाइल कर देगी, इसके बाद कुछ बड़े खिलाड़ियों की परेशानी बढ़ सकती है, इन्हें अदालत से जमानत लेनी पड़ सकती है। अनिल अंबानी को भी लगता है कि अमर सिंह के पुराने साथ का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। उनके बचाव में पी.चिदंबरम काफी सक्रिय हैं, पर एक अकेला चना, भाड़ तो नहीं फोड़ता!
Posted on 03 April 2011 by admin
कर्नाटक में दल बदल कानून की परिणति को लेकर सुप्रीम कोर्ट का एक अहम फैसला मंगलवार को आने वाला है। सुगबुगाहट है कि माननीय कोर्ट का यह फैसला येदुरप्पा सरकार की उम्मीदों के खिलाफ जा सकता है। यानी मंगलवार के बाद येदुरप्पा सरकार के अल्पमत में आने की संभावनाएं व्यक्त की जा रही हैं, आखिर बकरे की मां कब तक खैर मनाएगी?
Posted on 03 April 2011 by admin
हिंदू आतंकवाद का नया फलसफा गढ़ने वाली कांग्रेस, भाजपा खासकर संघ नेताओं के प्रति आक्रामक तेवरों से लैस है। आतंकवाद के नाम पर कितने संघ के लोग किस कदर लपेटे जाएंगे इंद्रेश प्रकरण इस बात की गवाही देता है। इंद्रेश को सरकारी तंत्र जितना बदनाम कर सकता है वह कर चुका। अब तो ऐसे तमाम मुकदमे एनआईए के पास ट्रांसफर कर दिए गए हैं, एनआईए जो आतंकवाद से संबंधित केस देखती है। यानी तथाकथित स्वतंत्र एजेंसी सीबीआई से ये मामले सीधे अब केंद्र सरकार के कब्जे में आ गए हैं, सीबीआई तो सीवीसी के प्रति जवाबदेह होती है तो आप उसे कुछ हद तक स्वतंत्र मान भी सकते हैं, पर एनआईए तो घोषित तौर पर केंद्रीय गृह मंत्रालय यानी हिंदू आतंकवाद शब्द को ईजाद करने वाले पी.चिदंबरम के अधीनस्थ है। संघ नेताओं की सबसे बड़ी चिंता इसी बात को लेकर है। सीबीआई द्वारा चलाए जा रहे मुकदमे को सरकार नहीं हटा सकती, पर एनआईए तो खुला ऐलान है, खुली छूट है-चाहे मर्जी जिस पर लगाओ, जिससे हटाओ।
Posted on 03 April 2011 by admin
प्रणब पुत्र अभिजीत सो इस दफे कांग्रेस के टिकट पर नलहटी से चुनाव लड़ रहे हैं, वे पिछले विधानसभा चुनावों के वक्त ही राजनीति में कूदने के इच्छुक थे, पर प्रणब दा तब नहीं माने थे। प्रणब दा तो इस बार भी नहीं मान रहे थे, पिता-पुत्र में जमकर संवाद हुआ। पिता ने पुत्र से कहा-‘तुम एक नवरत्न कंपनी में जनरल मैनेजर हो, तुम्हारा अच्छा भविष्य है, कल को तुम ‘सेल’ (स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया) के चेयरमैन भी बन सकते हो।’ पुत्र ने पिता से कहा-‘जब आप अपनी लेक्चरशिप छोड़ कर राजनीति में आए थे तब आपकी उम्र मात्र 35 वर्ष थी, आप मन लगाकर अध्यापन कार्य करते तो किसी कॉलेज के प्रिंसीपल भी बन सकते थे।’ पुत्र के उलहानों को पिता समझ चुका था, वैसे भी अभिजीत की जीत नलहटी में आसान है क्योंकि ममता ने वहां कैंडीडेट नहीं दिया है, और वह तृणमूल का गढ़ है, वहां के म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन का चेयरमैन भी तृणमूल का है, जिसे ममता ने समझा बुझाकर चुनाव में बिठा दिया। अभिजीत की पत्नी झुम्पा भी उनके साथ चुनाव प्रचार में जुटी हैं। इनके दो बच्चे हैं बड़ी बेटी और बेटा छोटा है, दोनों लंदन में पढ़ते हैं। ममता ने पहले अभिजीत को तृणमूल का टिकट ऑफर किया था पर वे नहीं माने। अब चूंकि प्रणब मान गए हैं सो अपने पुत्र के चुनाव प्रचार को भी राजी हो गए हैं, पिता-पुत्र 7-8 अप्रैल को इस निर्वाचन क्षेत्र में पदयात्रा करने वाले हैं।
Posted on 03 April 2011 by admin
अगर सियासत सीखनी है किसी को तो गांधी परिवार से सीखे, हर कदम कैसे नाप तोल कर रखते हैं मां-बेटे। कांग्रेस यह मैसेज देने में कामयाब रही है कि सोनिया यूपीए के लिए हैं, तो राहुल कांग्रेस के लिए। सोनिया पश्चिम बंगाल जा रही हैं, प्रधानमंत्री भी जा रहे हैं और ये दोनों तृणमूल-कांग्रेस की संयुक्त रैली को संबोधित करेंगे, रैली की शुरुआत नॉर्थ बंगाल से होगी। जा तो राहुल भी रहे हैं पर वे संयुक्त रैली के बजाए सिर्फ कांग्रेसी उम्मीदवारों के पक्ष में प्रचार करेंगे, जाहिर है इससे पश्चिम बंगाल कांग्रेस का वह धड़ा भी खुश हो जाएगा जिन्हें ममता के साथ जाने के बजाए ‘एकला चलो में’ ज्यादा भरोसा था और पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष मानस भुईयां इसी राय के प्र्रवत्तक नेताओं में से हैं, वहीं प्रणब मुखर्जी ममता से दोस्ती की कसीदे पढ़ रहे हैं।