Archive | April, 2011

…और अंत में

Posted on 17 April 2011 by admin

मुरली मनोहर जोशी की अगुवाई वाली पीएसी का टर्म 30 अप्रैल को समाप्त हो रहा है यानी की 28-29 अप्रैल तक 2जी मामले में पीएसी की रिपोर्ट प्रकाश में आ जाएगी। वैसे भी 1 मई को नई पीएसी गठित होनी है, उसे लेकर जोड़-तोड़ अभी से शुरू हो गई है।

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अडवानी के घर पार्टी

Posted on 17 April 2011 by admin

संघ यह तो काफी समय से चाहता आया है कि अडवानी अब पूरी तरह एक मेंटर की भूमिका में अवतरित हो जाएं और खुद को सक्रिय राजनीति में झोंकने की बजाए बैक सीट से भाजपा को देश की मुख्यधारा में लाने का प्रयास करें। पर इस बार अष्टमी के मौके पर अडवानी के घर हाई-टी पर क्या नेताओं व पत्रकारों का जमावड़ा जुटा कि बहुत से लोगों की शिकायत रह गई कि उन्हें तो बुलाया ही नहीं गया। सो, अगले दिन रामनवमी के मौके पर अडवानी के घर फिर से पार्टी आयोजित हुई और उसमें बचे-खुचे लोगों को भी बुला लिया गया। पहले दिन की पार्टी में अडवानी की प्रतिभा संपन्न पुत्री प्रतिभा अडवानी की एक आधे घंटे की फिल्म भी दिखायी गई जिसमें भगवान राम से संबंधित फिल्मी गीतों व भजनों को एक सूत्र में पिरोया गया था और उसमें स्वयं प्रतिभा सूत्रधार की भूमिका में थीं। प्रतिभा ने ऐसी ही एक फिल्म अडवानी के जन्मदिन के मौके पर भी दिखायी थी जिसमें पिता व पुत्री के संबंधों का मार्मिक खुलासा था।

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बलवा का जलवा कैसे

Posted on 17 April 2011 by admin

शाहिद बलवा के पवार कनेक्शन पर क्या खूब हंगामा बरपा है, पर बलवा का पहला जुड़ाव करूणानिधि परिवार से रहा है। यूपीए-एक कार्यकाल में वे टीआर बालू के फ्रंटमैन हुआ करते थे। द्रमुक के लिए वे एक प्रमुख थैलीशाह बनकर उभरे, नहीं तो इससे पहले उनके मुंबई में महज दो मामूली रेस्तरां थे, पर करूणानिधि परिवार से जुड़ने के बाद बलवा के घर धन-ऐश्वर्य छप्पर फाड़ कर बरसा। बलवा सबसे पहले विनोद गोयनका के संपर्क में आए और गोयनका ने उन्हें पहली बार शरद पवार से मिलवाया।

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केतन कादम

Posted on 17 April 2011 by admin

इसी मई में एमसीआई यानी मेडिकल काऊंसिल ऑफ इंडिया के मुखिया डा. शिव कुमार सरीन रिटायर होने वाले हैं, आजाद व उनके करीबी अफसर इस ताक में हैं कि कब सरीन रिटायर हों और एमसीआई की वर्तमान कमेटी भंग कर दी जाए, यानी एक बार फिर से एमसीआई पर केतन देसाई एंड कंपनी का कब्जा हो सकता है, क्या अन्ना हजारे सुन रहे हैं?

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गुलाम के दो आजाद अफसर

Posted on 17 April 2011 by admin

गुलाम नबी ने जब हेल्थ का महकमा संभाला तो वी.एस.रामाचंद्रन व राव यहां भी विराजमान हैं। कहते हैं राव की मर्जी के बगैर क्या मजाल जो स्वास्थ्य मंत्रालय में कोई फाइल सरक जाए। जब से एस.के.राव की ख्याति पीएमओ में पहुंची है, पीएमओ के सर्वशक्तिमान कुट्टीनायर ने गुलाम नबी से राव की छुट्टी करने को कहा है। अब राव की जगह यूटी कैडर का नया अफसर आजाद को बतौर पीएस मिल रहा है। सनद रहे कि यह राव वहीं हैं जिनका मेडिकल काऊंसिल के चर्चित-कुचर्चित केतन देसाई के साथ नाम जुड़ा था।

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नीरा आई कहां से

Posted on 17 April 2011 by admin

भारत के सियासी व कारोबारी क्षितिज में अपना परचम बुलंद करनेवाली नीरा राडिया के प्रादुर्भाव की भी एक अनोखी दास्तां हैं, इस तंत्र में नीरा का आना हुआ कैसे? जब गुलाम नबी आजाद नागरिक उड्डययन मंत्री हुआ करते थे, तो तब के उनके ओएसडी रामाचंद्रन ने नीरा को पहले पहल आजाद से मिलवाया था। नीरा के आजाद ख्याल तब गुलाम नबी को भा गए थे। नीरा अपने क्राऊन एयर का प्रपोजल लेकर आजाद से मिलने आई थीं। उस वक्त आजाद की मंडली में एस.के.राव भी शामिल थे। इसके बाद जब एनडीए का शासनकाल आया तो नागरिक उड्डययन की बागडोर अनंत कुमार के पास आ गई, तब तक रामाचंद्रन अनंत के अतिरिक्त पीएस हो गए। फिर नीरा-अनंत हरिकथा अनंता वहीं परवान चढ़ी।

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महामहिम कुंवर की जय

Posted on 17 April 2011 by admin

सियासत के कुशल खिलाड़ी नीतीश कुमार ने बिहार के गवर्नर देवानंद कुवर की ख्याति और उनकी भावनाओं को लगता है बखूबी भांप लिया है, तभी वे विधानसभा में एक नया विधेयक लेकर आए हैं। जिसके मुताबिक अब वाइस चांसलर की नियुक्तियों में गवर्नर राज्य सरकार की संस्तुति को मानने को बाध्य होगा। गवर्नर पर वहां के एक नामी विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर को संरक्षण देने का आरोप है। इसी वाइस चांसलर दिनेश प्रसाद सिन्हा ने राज्य की एक नामचीन लोक गायिका देवी को बोधगया के संबोधि रिसॉर्ट में एक प्रोग्राम के दौरान शराब के नशे में धुत होकर छेड़ दिया था। गवर्नर पर नई दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित बिहार भवन के एक कर्मचारी को पीटने का भी आरोप है। जाहिर है बात निकलेगी तो दूर तलक जाएगी।

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स्वराज का दक्षिण में आगाज

Posted on 17 April 2011 by admin

भाजपा के लिए एक अच्छी खबर हो सकती है कि इस दफे केरल व तमिलनाडु में भी उनका खाता खुल जाए। भाजपा के चंद शीर्ष रणनीतिकारों ने अपनी एक सोची-समझी रणनीति के तहत ही सुषमा स्वराज को दक्षिण भेजने का फैसला किया था, पर सुषमा ने दक्षिण में प्रचार की कमान संभालते ही अपनी खास आक्रामक शैली में सुदूर केरल व तमिलनाडु में भी कमल के प्रस्फुटन के आगाज की जमीन तैयार कर दी है। आज हालत यह है कि कभी कन्नड़ की माहिर वक्ता माने जाने वाली सुषमा 12 मिनट तमिल में और 18 मिनट मलयालम में धाराप्रवाह भाषण दे सकती हैं। मलयालम सुषमा को ज्यादा सहज लगती है चूंकि उनका मानना है कि यह भाषा अपने मूल रूप में संस्कृत की ज्यादा सहोदरी है। चुनांचे दक्षिण के चुनाव प्रचार में सुषमा का एक दिन तमिल को तो एक दिन मलयालम को समर्पित रहता था। फिलवक्त तो वह दिल्ली लौट आई हैं जहां हिंदी बोलने का फिर से अभ्यास कर रही हैं।

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प्रो-एक्टिव गडकरी

Posted on 17 April 2011 by admin

कतिपय एक अनजाने व उत्तर भारतीय राज्यों में अनचीन्हे नितीन गडकरी ने जब भाजपा की बागडोर संभाली तो उनके नेतृत्व को लेकर उम्मीद कम शंकाएं ज्यादा थीं, पर गडकरी ने अपने प्रो-एक्टिव कार्य शैली से लगता है अपने आलोचकों का मुंह बंद करने का काम किया है। अपने पूर्र्ववत्ती राजनाथ सिंह की निर्णय न ले सकने की इमेज के विपरीत गडकरी को आनन-फानन में निर्णय लेने की आदत है। पार्टी के पूर्र्ववत्ती अध्यक्षों की तुलना में वे एक घुमक्क्ड़ अध्यक्ष हैं। उन्हें सफर में रहना पसंद है, उनकी यही बात संघ को भा रही है। पर पार्टी को लेकर उनकी योजनाएं और उनकी जुबान दोनों लंबी है, पर वे अपनी इमेज रिजल्ट देने वाले अध्यक्ष की बनाने में जुटे हैं। गडकरी अपने वजन को लेकर भी इन दिनों ज्यादा फिक्रमंद हैं, चुनांचे वे अन्न की बजाए दाल व सब्जियां ज्यादा खा रहे हैं, उनका लक्ष्य है तीन महीने में अपना 15 किलो वजन कम करने का। साथ ही अपने सियासी वजन को लगातार बढ़ाते रहने का मूलमंत्र तो उन्होंने पकड़ा हुआ ही है।

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शांति भूषण को शांति कहां

Posted on 17 April 2011 by admin

शांतिभूषण को कांग्रेस हलके में नहीं छोड़ने वाली है, अमर सिंह से उनकी बातचीत का टेप तो इसका आगाज मात्र है, असली खेल तो अभी बाकी है। उनसे जुड़े कई और मसले भी प्रकाश में आने वाले हैं। वैसे भी कांग्रेस उन्हें गैर राजनीतिक व्यक्ति नहीं मानती, क्योंकि सन् 1980 में भाजपा के स्थापना वर्ष में वे भगवा पार्टी के उपाध्यक्ष थे, फिर वे जनता सरकार में कानून मंत्री भी बने। इसके अलावा इनके पुत्र प्रशांत भूषण का हिमाचल प्रदेश के पालनपुर में अपना एक मकान है। अब इस मामले की जांच चल रही है कि कैसे एक गैर हिमाचली व्यक्ति ने हिमाचल में संपत्ति खरीद ली। वैसे तो जो टेप लीक हुई है उसमें महज 1 मिनट 55 सेकंड की बातचीत दर्ज है। पर कहते हैं कि सरकार के पास बातचीत के कुछ और भी टेप्स हैं जिन्हें समय-काल के साथ रिलीज किया जा सकता है। सूत्रों की माने तो सरकार ने बकायदा शांतिभूषण का पूरा डासियर तैयार कर रखा है।

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