Posted on 23 April 2011 by admin
88 बरिस के हो गए बलराम जाखड़ पर उनके और उनकी महत्वाकांक्षाओं के बीच उनकी उम्र कहीं आड़े नहीं आ रही है, टनाटन, झकाझक बंद गले के सूट में शुक्रवार की सुबह सवा दस बजे वह कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी से मिले और अपने राजनैतिक पुनरूत्थान के लिए उनसे आग्रह किया…भौंचक सोनिया बस उन्हें देखती ही रह गईं।
Posted on 23 April 2011 by admin
भाजपा की दूसरी पीढ़ी के प्रमुख नेतागणों की यही राय है…बहुत हुआ अब अडवानी जी राजनीति से संन्यास लें, पर अडवानी ने कोई कच्ची गोलियां नहीं खेल रखी है उन्होंने विवेकानंद फाऊंडेशन की मदद से दबाव की राजनीति शुरू कर दी है। इस फाऊंडेशन का नेतृत्व पूर्व आईबी प्रमुख अजीत डोवल के हाथों में है, और इससे भाजपा के पूर्व थिंक टैंक गोविंदाचार्य, संघ करीबी एस.गुरुमूर्ति, सुब्रह्मण्यम स्वामी, आदि मुखर लोग जुड़े हुए हैं। जैसे ही हिंदुत्व अवसरवाद के मुद्दे पर जेतली केबल लीक हुई, विकीलिक्स के इसी खुलासे को आधार बनाकर एस.गुरुमूर्ति ने फौरन संघ प्रमुख मोहन भागवत को एक चिट्ठी लिख दी। अडवानी न केवल सियासी बाजीगरी दिखाने में जुटे हैं अपितु इन दिनों अपने स्वास्थ्य का भी खास तौर पर ध्यान रख रहे हैं, उन्हें अभी एक और लंबी सियासी पारी जो खेलनी है…।
Posted on 23 April 2011 by admin
25 अप्रैल को 2जी मामले में जो नई चार्जशीट फाइल होने जा रही है उसमें कई बड़े खिलाड़ियों का नंबर लग सकता है। लूप टेलिकॉम जो एस्सार वालों का है, वीडियोकॉन तथा कानीमोझी भी इस नए चार्जशीट में निशाने पर हो सकते हैं। कईयों को जेल हो सकती है, तो जेल की चक्की पीस रहे कुछ बड़े खिलाड़ियों को बेल भी हो सकती है।
Posted on 23 April 2011 by admin
दिल्ली भाजपा अपने बड़बोले अध्यक्ष के बोलने से परेशान है… नासमझ भगवा पार्टी इतना भी नहीं समझ पाई है कि बोलते-बोलते ही तो बिजेंद्र गुप्ता गली-मुहल्ले की राजनीति से दिल्ली की राजनीति तक पहुंच पाए हैं। जबसे बिचारे मजनूं का टीला हार गए हैं, कोई सियासी लैला उन्हें घास नहीं डाल रही। दिल्ली भाजपा में उनका और उनकी पत्नी शोभा विजेंद्र का जलवा तो बस देखते ही बनता है। पार्टी में इनके विरोधी कहते हैं पार्टी चलाने से ज्यादा ध्यान इन दिनों वे अपनी पत्नी के एनजीओ ‘संपूर्णा’ पर दे रहे हैं। अभी पिछले दिनों राष्ट्रीय महिला मोर्चा अध्यक्ष स्मृति ईरानी ने नितीन गडकरी से मिलकर जी-भर के गुप्ता की शिकायत लगाई कि दिल्ली में व्यक्ति ही पार्टी का पर्याय बन गया है और यहां की राजनीति में निरंतर उनकी (स्मृति की) उपेक्षा हो रही है, स्मृति इसे अपना अपमान समझ रही हैं, उनका खुले तौर पर मानना है कि दिल्ली भाजपा तो शोभा विजेंद्र के इशारों पर चल रही है।…जाने अध्यक्ष जी ने क्या दिलासा दी होगी…।
Posted on 23 April 2011 by admin
राज्यसभा में नेता विपक्ष अरुण जेतली की पार्टी की लोकप्रियता का चाहे जो भी आलम हो, उनकी शोहरत सात समंदर लांघ कर अमरीका जा पहुंची है, यूएस स्टेट डिपार्टमेंट से उन्हें अमरीका आने का बुलावा आया है। जेतली 21 जून से 27 जून तक अमरीका में रहेंगे, उनकी यह यात्रा नेता विपक्ष की हैसियत से नहीं अपितु पर्सनल कैपिसिटी में होगी। यूं भी जेतली के अमरीका में खूब नाते-रिश्तेदार हैं, वहां ईस्टकोट से लेकर वेस्टकोट तक में उनके आधा दर्जन से ज्यादा नजदीकी रिश्तेदार रहते हैं।
Posted on 23 April 2011 by admin
पृथ्वीराज चव्हाण ने जब से महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाली है वह विपक्षी पार्टियों के बजाए आरटीआई यानी सूचना के अधिकार से कहीं ज्यादा डरे हुए हैं। और इतनी फूंक-फूंक कर फाइलों पर साइन कर रहे हैं कि प्रदेश में विकास की रफ्तार लगभग थम सी गई है। दरअसल भाजपा के किरीट सोमैया मुख्यमंत्री के पास एक ऐसी फाइल लेकर पहुंच गए जो स्पेस (अंतरिक्ष)डील से संबंधित एक गोपनीय फाइल थी, हैरान चव्हाण ने किरीट से पूछा कि ‘यह फाइल आपको कहां से मिल गई, मैंने तो पीएमओ में राज्य मंत्री रहते इसे नजर भर ही देखा था?’ ‘पर साइन तो आपके हैं…’ किरीट ने कहा…परेशान मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि हां इस सौदे पर तो उन्होंने ही हस्ताक्षर किए थे पर पीएमओ के अधिकारियों के कहने पर, तब सोमैया ने उन्हें बताया कि ये सारे कागजात उन्हें आरटीआई के माध्यम से मिले हैं। तब से ही महाराष्ट्र में सूचना का अधिकार काम के अधिकार पर भारी पड़ रहा है।
Posted on 23 April 2011 by admin
‘क्या तेज जगमगाती थी कातिल के हाथ में अब उसकी आस्तीन में तो खंजर भी न रहा…’ औरतों के रुखसार के पाउडर व लबों की लिपस्टिक उन्हें जम्मू-कश्मीर के आतंकी का भान कराते हैं,जब ये जनाब वर्ष 1998 के एनडीए शासनकाल में सूचना व प्रसारण राज्य मंत्री थे तो इन्होंने अपने इलाहाबाद का मकान अपने ही मंत्रालय के अधीनस्थ ‘सांग एंड ड्रामा डिविजन’ को मुंहमांगी कीमत पर किराए पर दे दिया था, बाद में जब ये पार्टी प्रवक्ता बने तो इन्हें पार्टी के नई दिल्ली के 11 अशोक रोड स्थित केंद्रीय कार्यालय में कथित तौर पर मदिरा पान करते हुए पाया गया, तब अडवानी के निर्देश पर इन्हें पार्टी प्रवक्ता पद से हटा दिया गया, इस दफे के लोकसभा चुनाव में रामपुर से उनकी जमानत जब्त हो गई, मौजूदा वक्त में वे खुद को पार्टी का प्रवक्ता प्रोजेक्ट करते हैं, पर आधिकारिक तौर पर हैं नहीं, पर भाजपा बीट कवर कर रहे पत्रकारों की माने तो ‘ऑफ द् रिकार्ड’ ब्रीफ करने में उनका कोई सानी नहीं, उन्हें पार्टी का ‘ऑफ द् रिकार्ड टि्वटर’ भी कहा जाता है, इस शुक्रवार को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितीन गडकरी ने उन्हें क्या खूब लानतें भेजी, पर लगता नहीं कि मुख्तार अब्बास नकवी बस इतनी डपट भर से सुधरने वाले। क्या करें, …’वो भी मंजिल की बात करते हैं, जिनको अपना पता नहीं होता।’
Posted on 23 April 2011 by admin
दिल्ली के सियासी गलियारों में अन्ना मंडली के खिलाफ कितना कुछ चक्कर लगा रहा है, जहां जस्टिस सावंत रिपोर्ट अन्ना हजारे के गले की हड्डी बनी हुई है (जिसमें मान हानि के मुकदमे में अन्ना को जेल हो गई थी बाद में राज्य सरकार ने उनकी सजा माफ कर दी थी), शांतिभूषण के खिलाफ आनंद विहार डकैती कांड के कागजात, इलाहाबाद के जमीन का मामला, तो प्रशांत भूषण के खिलाफ उनके पालनपुर के बंगले का मामला, किरण बेदी के खिलाफ मिजोरम से आईबी की वह रिपोर्ट जिसकी वजह से वह दिल्ली पुलिस आयुक्त नहीं बन पाईं तथा उनकी बेटी का मेडिकल कॉलेज में एडमिशन का मामला, स्वामी अग्निवेश के खिलाफ डोनर एजेंसियों की वो चिट्ठियां जो कैलाश सत्यार्थी ने बांटी हैं, अरविंद केजरीवाल जब रेवेन्यू सर्विस में थे तो उनकी डिपार्टमेंट प्रोसिडिंग्स की फाइल के कागजात, संतोष हेगड़े के पिता के ट्रस्ट से जुड़े कागजात जो ट्रस्ट मेडिकल कॉलेज भी चलाता है…यानी दिल्ली की आबोहवा में बहुत कुछ फैला है, खबरनवीसों को बस सूंघने भर की जरूरत है।
Posted on 23 April 2011 by admin
कांग्रेस मंडली को यह भी लगता है कि अन्ना एंड कंपनी के सिपहसालारों की निजी महत्वाकांक्षाएं भी हिलौरे मार रही हैं, मसलन दिल्ली की पुलिस कमिश्नर बन पाने में नाकाम रहने वाली किरण बेदी की नजर सीवीसी पद पर टिकी है, प्रारंभिक दौर में राष्ट्रीय सलाहकार परिषद में जगह बना पाने में नाकाम अरविंद केजरीवाल यूपीए शासनकाल में उपकृत होना चाहते हैं, संतोष हेगड़े लोकपाल बनना चाहते हैं और सबसे दीगर अन्ना अपने इन चेलों को कुछ न कुछ बनते हुए देखना चाहते हैं।
Posted on 23 April 2011 by admin
अन्ना हजारे एंड पार्टी पर कांग्रेस का हमला इतना तीखा क्यों है? यह अन्ना हजारे को लिखे सोनिया के 19 अप्रैल वाले पत्र से स्पष्ट हो जाता है, इस पत्र के पैरा (दो) में सोनिया बड़ी स्पष्टता से कहती हैं कि अरुणा राय को संयोजक बना राष्ट्रीय सलाहकार परिषद लोकपाल बिल की पारदर्शिता, जवाबदेही और गवर्नेस को लेकर पहले से कार्यरत था। और अरुणा राय व हर्ष मंदर की टीम इस बिल पर राय लेने के लिए भूषण बाप-बेटे, अरविंद केजरीवाल, संतोष हेगड़े आदि से मिली थी। कांग्रेस को लगता है कि अन्ना और उनके लोगों ने एनएसी के इसी मौलिक आइडिया को उड़ा लिया और सीधे जंतर मंतर पर जाकर धरने पर बैठ गए।