शाह को घेरने की तैयारी

September 09 2013


भाजपा महासचिव व यूपी के प्रभारी अमित शाह इन दिनों कांग्रेस के दुश्मन नंबर वन बन चुके हैं। दरअसल, कांग्रेस सीधे मोदी पर हमला नहीं साधकर शाह पर निशाना साधना चाहती है ताकि इसकी आंच मोदी तक पहुंचे। फिलहाल शाह सोहराबुद्दीन मामले में जमानत पर हैं। पर सितंबर के आखिर में सीबीआई कोर्ट में उनकी जमानत को खारिज करने की अर्जी लगाने वाली है। दरअसल, शाह अपने ही बुने कानूनी जाल में उलझ गए लगते हैं। उनकी गिरफतारी सोहराबुद्दीन व कौसर बी के मामले में हुई थी, उसके बाद तुलसी प्रजापति का केस सामने आया तब तक शाह को कोर्ट से जमानत मिल चुकी थी। सो, जब उन्हें लगा कि प्रजापति मामले में वे फिर से जेल जा सकते हैं तो उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाई कि सोहराबुद्दीन, कौसर बी और तुलसी प्रजापति यह सब एक-दूसरे से जुड़े केस हैं। इसमें अलग से एफआइआर दर्ज करने की क्या जरूरत है? यानी प्रजापति मामले में शाह दुबारा बेल के लिए एप्लाई नहीं करना चाहते थे। चुनांचे कोर्ट ने उनकी बात मान ली और इन तीनों केस को ‘क्लब’ कर दिया। पर अब उसमें नया पेंच यह आ गया है कि इन तीनों केस के एक होते ही इसमें अधिकतम सजा मृत्युदंड का प्राधान समाहित हो गया और अब सीबीआई कोर्ट में यही बात दुहरा सकती है। सो, ऐन लोकसभा चुनाव की पूर्व बेला में अगर कोर्ट ने शाह की जमानत कैंसिल कर दी तो मोदी को यूपी के लिए एक नया चेहरा ढूंढना पड़ सकता है। जैसे-जैसे देश में लोकसभा चुनाव की बेला करीब आ रही है कांग्रेस मोदी को घेरने की हर मुमकिन कोशिश करने में जुटी है। डीसीपी वंजारा की दस पेजी चि_ïी तो महज़ एक आगाज़ है, आने वाले दिनों में दो और ऐसी ही चि_िïयां लाने की तैयारी है। दूसरी चि_ïी गुजरात के पूर्व एडिशनल डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस पी.पी. पांडे या आईपीएस जी.एल.सिंघल की हो सकती है। और इन तमाम ख़्ातों का मज़मून यही होगा कि मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके तत्कालीन गृहमंत्री अमित शाह को सब पता था। सनद रहे कि मोदी विरोध की अलख जगाने वाले इन तमाम ऑपरेशंस की धुरी दिल्ली में है। और कुछ लोग दिन-रात इस काम को परवान देने में जुटे हैं। चूंकि चुनाव पास हैं तो स्टिंग आपरेशंस के लिए भी यह एक मौजूं वक्त है। दिल्ली के कर्णधारों के इशारे पर अभी मोदी और उनके करीबियों से जुड़े दो और स्टिंग बाहर आने हैं और इसी सितंबर माह में आ सकते हैं। वैसे भी दिल्ली ने भुपिंदर यादव की सीडी के आधार पर सीबीआई डायरेक्टर को साफ-साफ निर्देश भेज दिए हैं कि सीबीआई कोर्ट में अमित शाह की जमानत खारिज करने वाली अर्जी तैयार कर ले। दिल्ली से जुड़े विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि इस बारे में सीबीआई का होमवर्क पूरा हो चुका है और सितंबर माह के आखिर में कभी भी शाह की जमानत को रद्द करने की अर्जी कोर्ट में लगाई जा सकती है। अमित शाह के एक बार फिर से जेल जाने का अर्थ होगा कि मोदी की तमाम उद्दात सियासी महत्वाकांक्षाओं को एक बारगी सींखचों के पीछे खड़ा कर देना।

 
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