राहुल ड्रीम्स

November 01 2009


तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजों से कांग्रेस बम-बम है, और अब पार्टी अपने लाडले युवराज की हर इच्छा को शिरोधार्य करने को तैयार है, जिसमें सबसे अहम है कि कांग्रेस को अपनी राह खुद चुननी है और अपने गठबंधन साथियों पर से स्वयं की निर्भरता कम से कम करनी है। जैसा कि कोई एक दशक पूर्व 1998 में कांग्रेस की पंचमढ़ी बैठक में यह तय हुआ था कि कांग्रेस को गठबंधन की राजनीति से खुद को अलग करना चाहिए, पर बदले राजनैतिक परिदृश्य में कांग्रेस के लिए प्रकारांतर में गठबंधन की राजनीति को अस्वीकार कर पाना एक टेढ़ी खीर साबित हुआ। पर पंचमढ़ी अधिवेशन के कोई ग्यारह साल बाद आज राहुल गांधी चाहते हैं कि जो छोटी-बड़ी पार्टियां कांग्रेस से टूटकर बनी हैं अब उसका फिर से कांग्रेस में विलय हो जाए। और इसके लिए कांग्रेसी रणनीतिकार राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और हरियाणा जनहित कांग्रेस सरीखे दलों से संवाद स्थापित कर रहे हैं। कांग्रेस यूपीए सरकार में अपने गठबंधन साथियों को भी अब एक नए चश्मे से देखने का यत्न कर रही है, सो दूरसंचार के 3 जी स्पेक्ट्रम घोटाले में डीएमके और उसके मंत्री डी.राजा का घिरना महज एक इत्तफाक नहीं, अपितु कांग्रेस की एक सुविचारित नीति है।

 
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