दीदी बनाम त्रिवेदी |
March 18 2012 |
रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी के प्रकरण में कुछ भी नया नहीं है। यह तो त्रिवेदी और दीदी दोनों ने पहले से तय कर रखा था कि रेल बजट के बाद वे एक-दूसरे को अलविदा कह देंगे, क्योंकि दोनों के बीच तनातनी इस कदर बढ़ चुकी थी कि संबंधों को टूटने से बचाया नहीं जा सकता था। वैसे भी विगत दिनों में त्रिवेदी अपनी पुरानी पार्टी कांग्रेस के ज्यादा करीब आ गए हैं और कांग्रेस की ओर से उन्हें राज्यसभा का आश्वासन पहले ही मिल चुका था। त्रिवेदी ने साफ कह दिया था कि वे रेल बजट पेश करने के बाद ही इस्तीफा देंगे, सो इस कड़ी में त्रिवेदी ने कई चर्चित जुमले उछाले, मसलन ‘रेल मंत्रालय रायटर्स बिल्डिंग से नहीं चलता’, वे सिर्फ अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनते हैं…आदि-आदि। वैसे भी कांग्रेस ने त्रिवेदी को एक महत्वपूर्ण जिम्मा सौंपा हुआ है कि वे तृणमूल में दो फाड़ करवा दे, इसके लिए त्रिवेदी को कम से कम 7 तृणमूल सांसद जुटाने होंगे। वैसे भी त्रिवेदी नाराज सांसदों जैसे कबीर सुमन, सुब्रतो मुखर्जी के लगातार संपर्क में है। कांग्रेस ने तो अपना विभीषण चुन लिया है, बस दीदी को अपने लिए एक राम की तलाश है। |
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