| दादा व दीदी में ठनी |
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September 13 2011 |
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किसको मालूम था कि कांग्रेस-तृणमूल का हनीमून इतनी जल्दी खत्म हो जाएगा, सियासी तेवरों का शृंगार किए पारंगत रणबांकुरे इस कदर शह-मात की बिसात पर आमने-सामने डट जाएंगे। लंबे समय से प्रणब दा के निजी सचिव रहे मनोज पंत संयुक्त सचिव की समकक्षता में आ गए, संयुक्त सचिव स्तर का आईएएस मंत्री का पीएस नहीं हो सकता, चुनांचे इसीलिए दादा ने उन्हें वाशिंगटन में अच्छी पोस्टिंग दिलवा दी, दादा को अपने लिए एक नया पीएस चाहिए था, सो उनकी रुचि बीरभूम (जो उनका गृह क्षेत्र भी है) के जिलाधिकारी में थी, जिन्हें वह अपना निजी सचिव बनाकर दिल्ली लाना चाहते थे, वह बंगाल कैडर का आईएएस है, लिहाजा इसके लिए राज्य सरकार की अनुमति लेनी अपरिहार्य है, पर ममता दीदी अड़ गईं, नहीं भेजेंगी, उन्होंने बकायदा दिल्ली चिट्ठी लिख दी, ‘हमारे यहां ऐसे भी आईएएस अफसरों का अकाल पड़ा है, सो हम अपने अफसर दिल्ली कैसे भेज सकते हैं, भेजना है तो दिल्ली अपनी सरजमीं से कुछ आईएएस वापिस बंगाल भेजे।’ दादा ने दीदी का सियासी संदेश बखूबी पढ़ लिया है, आने वाले दिन दादा के इरादों की चुगली करेंगे। |
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