गडकरी उवाच

September 19 2010


भाजपा का चाल, चरित्र, चेहरा बदलने की आपाधापी में नितिन गडकरी कई दफे मान्य बोली-ठोली का भी उल्लंघन कर देते हैं, अभी हाल में ही संपन्न हुए भाजपा की मीडिया वर्कशॉप की मिसाल लीजिए, यह पूरी वर्कशॉप महज इसीलिए आहूत थी ताकि पार्टी प्रवक्ताओं व पदाधिकारियों को यह बतलाया जा सके कि मीडिया के समक्ष उन्हें अपनी भाषा-शैली पर कैसे नियंत्रण रखना है। जब भाजपा अध्यक्ष स्वयं बोलने को खड़े हुए तो उन्होंने अपनी ही पार्टी के चंद सीनियर नेताओं को इंगित करते हुए कहा-’मैं किसी की परवाह नहीं करता, जो मेरी बात नहीं मानेगा, उसे ठोक दूंगा’ अध्यक्ष जी कबीर दास जी को याद करिए, उनकी बातें-उनकी सधोकरी आज भी उतनी ही मौजूं है-’मेरी बोली पूरबी, मोको लखै न कोय। मोको तो वाहि लखे, जो धुर पूरब का होय॥’

 
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