असम के सितम से भाजपा बेदम

May 15 2011


पाकिस्तान के पंजाबी कवि उस्ताद दामन की अर्जे बयानी देखिए- ‘लाली अख्खां दी एहो पई दस्स दी ए रोए तुसीं वी हो, रोए असी वी हां’ यानी आंखों की लालिमा बताती है कि रोए तुम भी हो और रोए हम भी हैं, असम के चुनाव परिणाम सामने आते ही भाजपा व अगप की कहानी भी बस यही थी, अगप को 10 सीटें, भाजपा की 5। कहां भाजपा अध्यक्ष बढ़-चढ़ कर दावे कर रहे थे कि इस दफे असम में तो अगप-भाजपा की ही सरकार बनेगी। प्रफुल्ल महंत व पटवारी की आपस में गुत्थम-गुत्था किस कदर थी कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा, दोनों ही नेता मतदाताओं में जाने की बजाए भाजपा के केंद्रीय नेताओं को पटाने में ज्यादा वक्त जाया कर रहे थे कि भाजपा सीएम के लिए ‘इनका’ नाम ले, भाजपा के एक केंद्रीय नेता ने भी अगप के साथ एक अजीब सा अंदरूनी समझौता किया हुआ था, ‘फ्रेंडली फाइट’ के तुर्रे ने तो रही-सही कसर भी पूरी कर दी। जहां कथित तौर पर भाजपा का दावा मजबूत था, वहां अगप ने कमजोर उम्मीदवार उतारे, भाजपा ने भी अगप के साथ ऐसा ही किया, इसका फायदा कांग्रेस उठा ले गई।

 
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