अडवानी पर लिब्रहान का ग्रहण

September 18 2009


संसद के आने वाले सत्र में लिब्रहान आयोग का मुद्दा छाया रह सकता है। एटीआर (एक्शन टेकन रिपोर्ट) तैयार है और वह भी आशा के विपरीत, पहले यह कयास लगाया जा रहा था कि एटीआर अडवानी के प्रति लचीला और नरम रहेगी, पर बदले सियासी हालात में रिपोर्ट की मंशा व धार दोनों ही बदल गई हैं, अडवानी के बजाए अब जोशी के प्रति एटीआर का रुख नरम रह सकता है, अडवानी के प्रति रिपोर्ट के तेवर सख्त रहने के आसार हैं। सूत्र बताते हैं कि विहिप और बजरंग दल जैसे उग्र हिंदूवादी संगठनों को घेरने के लिए पर्याप्त सबूत जुटा लिए गए हैं, कांग्रेस की मंशा इन दोनों संगठनों को प्रतिबंधित करने की है, जिससे कि देश के अल्पसंख्यकों को खुश किया जा सके। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रति भी कांग्रेसी रूख में किंचित बदलाव आया है, केंद्रनीत सरकार का इरादा संघ पर नजर रखने का है और यकीनन इन बातों की झलक एटीआर में मिल सकती है। अडवानी, विनय कटियार, उमा भारती, कल्याण सिंह सरीखे नेताओं को विवादित ढांचे के विध्वंस का दोषी ठहराया जा सकता है, उन्हें षडयंत्र रचने का दोषी भी करार दिया जा सकता है। यानी एटीआर में आर-पार का ढेरो मसाला है।

 
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