भगवा महाभारत और संजय की आंखें

December 27 2015


बदलते सियासी हालात, विपक्ष के सटीक मकड़जाल, साख पर आई आंच और अपनी ही पार्टी के चंद नेताओं की उलट चाल ने प्रधानमंत्री मोदी को अपनी कथित आत्ममुग्धता से बाहर निकलने को मजबूर कर दिया है। क्या यही वजह है कि अब अपने दुश्मनों से भी वे दोस्ती की नई रीत कायम कर रहे हैं? पाकिस्तान से रिश्तों को लेकर उन्हें नया आत्मज्ञान प्राप्त हुआ, रूस-अफगानिस्तान की लौटती यात्रा में नवाज़ की मेहमानवाज़ी मोदी की दूरदर्शिता और उनकी सोची-समझी रणनीति का एक अहम हिस्सा है। इससे कुछ रोज पूर्व अपने धुर राजनैतिक विरोधी संजय जोशी से मिलने में भी उन्होंने किंचित संकोच नहीं किया। सूत्र बताते हैं कि संघ की पहल पर मोदी संजय जोशी से बेहद आत्मीयता और गर्मजोशी से मिले, उनकी भाव-भंगिमाएं भी किंचित यही दर्शा रही थीं कि जैसे वे पुरानी बातों को छोड़कर अब आगे बढ़ना चाहते हैं। पर बावजूद इसके उन्होंने संजय जोशी से कोई वायदा नहीं किया कि वे उनकी पार्टी में पुनर्वापसी के लिए प्रयास करेंगे, संभवतः अपनी पुरानी मित्रता को फिर से खिलने-संवरने के लिए जैसे वे और वक्त देना चाहते हों।

 
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