राहुल का दो टूक फैसला

June 02 2024


इस बार बदले-बदले सरकार नज़र आते हैं। राहुल गांधी अपने एक नए अवतार में हैं, वे न सिर्फ राजनीतिक रूप से परिपक्व हुए हैं बल्कि त्वरित निर्णय लेने में भी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। राहुल ने अपनी कोर टीम को ऐसे पार्टी नेताओं की शिनाख्त का काम सौंपा था जो नेतागण पार्टी के अंदर रह कर पार्टी के खिलाफ काम कर रहे हैं। राहुल पूरे देश में घूम-घूम कर चुनाव प्रचार करते रहे बावजूद इसके वे जिन क्षेत्रों में चुनाव प्रचार के लिए जा रहे थे वहां के नेताओं की उनके पास एक पूरी लिस्ट होती थी। उन्हें जैसे ही किसी नेता के बारे में पता चलता कि टिकट न मिलने की वजह से वे नाराज़ होकर अपने घर में बैठे हैं तो राहुल फौरन यह कहते नज़र आते थे कि ’क्या यह घर में बैठने का समय है।’ वे किंचित आवेश में आकर यह कहने से भी नहीं चूकते कि ’अगर ये चुनाव प्रचार में नहीं निकल रहे तो इन्हें बाहर का रास्ता दिखाओ।’ दिल्ली कांग्रेस के मामले में भी ऐसा ही हुआ था, जब राहुल को खबर मिली कि अरविंदर सिंह लवली की अगुवाई में शीला दीक्षित गुट पार्टी के खिलाफ काम कर रहा है तो उन्होंने अपने बड़े नेताओं से कहा कि ’फौरन प्रेस कांफ्रेंस कर इन्हें बाहर का दरवाजा दिखाएं।’ लवली तो भाजपा में रम गए? पर कन्हैया कुमार को टिकट मिलने से नाराज़ संदीप दीक्षित ने भंगिमाएं बदल लीं और वे फौरन बेमन से ही सही पार्टी के काम में जुट गए।

 
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