नीतीश क्यों नहीं माने

September 23 2023


पिछले कुछ महीनों में भाजपा अपनी ओर से लगातार यह प्रयास करती रही है कि बिहार में नीतीश व लालू की पार्टी के गठबंधन में कोई दरार आ जाए, शायद इसीलिए अमित शाह ने अपनी 16 सितंबर की रैली में नीतीश पर निशाना साधते हुए कहा भी-’लालू-नीतीश गठबंधन तेल पानी जैसा है।’ इससे पहले भी तीन लोग यानी हरिवंश, संजय झा और रामनाथ कोविंद नीतीश को भाजपा के पाले में लाने के लिए जुटे रहे, पर बात बनी नहीं। संजय झा व हरिवंश इस कार्य में जब फेल हो गए तो भगवा शीर्ष ने यह जिम्मेदारी फिर कोविंद को सौंप दी, कोविंद पटना गए, नीतीश के घर खाना खाया, पर नीतीश को मना नहीं पाए। बिहार में हो रहे तमाम चुनावी सर्वेक्षण इस बात की चुगली खा रहे हैं कि ’अगर लालू-नीतीश मिल कर लड़ते हैं और अगर इस गठबंधन को कांग्रेस जैसे दलों का साथ मिल जाता है तो यह बिहार में कमल के प्रस्फुटन के लिए खतरा हो सकता है।’ सो, अब भाजपा के हमलों पर नीतीश भी सीधी प्रतिक्रिया देने लग गए हैं, जैसे झंझारपुर रैली में अमित शाह की कही बातों पर कटाक्ष करते हुए नीतीश ने कहा-’वे कुछ भी बोलते हैं, मैं उनकी बातों पर ध्यान नहीं देता।’ वहीं शाह पर पलटवार करते राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने कह दिया-’अमित शाह बनिया हैं, तेल पानी वही मिलाते होंगे।’ भाजपा बिहार को कितनी गंभीरता से ले रही है इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले एक साल में अमित शाह कम से कम 6 दफे बिहार का दौरा कर चुके हैं।

 
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