नीतीश कुमार को हल्के में न ले भाजपा

June 09 2024


जदयू सुप्रीमो नीतीश कुमार बकायदा इन कयासों से बाखबर हैं कि उनके तीर को अपने तरकश में करने के लिए भगवा पार्टी कभी भी ’ऑपरेशन लोट्स’ चला सकती है सो इस दफे वे अपना हर कदम बहुत फूंक-फूंक कर रख रहे हैं। भले ही वे जाहिरा तौर पर मोदी व भाजपा के समक्ष नतमस्तक दिखे, पर अपने सांसदों को एकजुट रखने की इस बार उनकी चाक-चौबंद तैयारी है। सूत्रों की मानें तो नीतीश ने अपने दो अत्यंत विश्वासपात्र लोगों को अपने सांसदों की निगरानी व उनका ट्रैक रखने का जिम्मा सौंपा है। विश्वस्त सूत्रों के दावों पर यदि यकीन किया जाए तो 1 जून को जब सातवें और आखिरी दौर का मतदान संपन्न हुआ तो भाजपा शीर्ष की ओर से नीतीश को दिल्ली तलब किया गया था और तब दिल्ली ने उनसे कहा था कि ’उन्हें जो बिहार से खुफिया रिपोर्ट प्राप्त हुई है उसमें कहा जा रहा है कि इस दफे राज्य में जदयू का प्रदर्शन आशा के अनुरूप नहीं रहेगा, सो बेहतर है कि आप केंद्र में मंत्री बन जाएं और बिहार में सीएम पद भाजपा के लिए खाली कर दें।’ नीतीश इस पर बिना कुछ बोले पटना वापिस लौट आए पर 4 जून के बाद नीतीश ने भाजपा की बदली हुई भाव भंगिमाओं के दीदार किए। उन्हें रेल के साथ ग्रामीण विकास मंत्रालय का भी ऑफर आ गया, नीतीश ने भी एक कुशल कलंदर के मानिंद रिंग में अपनी टोपी उछालते हुए कहा कि ’क्या इस बार उनकी पार्टी के लिए लोकसभा में स्पीकर का पद मिल सकता है?’ फिर भौंचक भाजपा को नीतीश ने नायडू के सुर में सुर मिलाते हुए कह कर चौंका दिया कि ’ये दोनों ही नेता चाहते हैं कि एनडीए 3.0 की सरकार भी वैसे ही चले जैसे वाजपेयी जी के जमाने में चला करती थी। हमारे मंत्रियों पर सचिव पीएमओ अपनी मर्जी से नहीं थोपेगा और न ही उनके संबंधित मंत्रालय की हर फाइल अनुमोदन के लिए पीएमओ जाया करेगी, मंत्रियों को निष्पक्ष व स्वतंत्र तरीके से अपने मंत्रालयों को चलाने दिया जाएगा।’ सूत्र यह भी बताते हैं कि नायडू व नीतीश ने आपस में बातचीत कर पहले से यह तय कर लिया है कि अगर वाकई इन दोनों नेताओं को अपने दलों को टूटने-बिखरने से बचाना है, व ’ऑपरेशन लोट्स’ के झंझटों से पार पाना है तो उन्हें भाजपा से स्पीकर पद तो मांगना ही होगा।

 
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