चिंता के सिवा क्या हासिल है चिंतन बैठकों से

May 17 2022


कांग्रेस के अंदर नए बदलाव की कश्मकश जारी है, सोनिया की ज़िद भी अपनी जगह कदमताल कर रही है कि राहुल का इकबाल पार्टी जनों को स्वीकार करना ही होगा, और संगठनात्मक मजबूती की मिसाल बन चुकी भाजपा से दो-दो हाथ करने के लिए कांग्रेस को अपने चेहरे-मोहरे को बदलना ही होगा। पर उदयपुर में आहूत इस चिंतन बैठक के एजेंडे में नया क्या है? क्या यह कि परिवार के दो व्यक्तियों को पार्टी टिकट से नवाजा नहीं जाएगा, इसमें नया क्या है भगवा पार्टी ने यूपी चुनाव में हर संभव इस मंत्र को साध कर दिखाया है, मोदी ने सार्वजनिक मंचों से इस बात को दुहराया है। कांग्रेस में इस बात पर भी मंथन चल रहा है कि राजनीति में उम्र की सीमा तय हो, भाजपा यह पहले ही कर चुकी है, 75 साल से ऊपर के नेताओं को पहले ही मार्गदर्शक मंडल की राह दिखाई जा चुकी है। कांग्रेस में अब इस बात पर भी मंथन चल रहा है कि किसी भी नेता को दो टर्म से ज्यादा राज्यसभा नहीं दी जाएगी, इसमें नया क्या है सीपीएम जैसे दलों में यह परिपाटी वर्षों से चली आ रही है। सीताराम येचुरी भले ही तीसरी दफे पार्टी महासचिव बना दिए गए हों पर उन्हें राज्यसभा से वंचित रहना पड़ा है। पंचमढ़ी से लेकर शिमला तक कांग्रेस के हर चिंतन बैठक का अंजाम एक सा रहा है। आज कांग्रेस के लिए सबसे जरूरी है कि वह कुछ नया सोचे, अगर इनके नेता कुछ नया नहीं सोच सकते, तो पीके की वैचारिक जुगाली से ही कुछ मोती इकट्ठे किए जाएं।

 
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