अलग होता अगप

February 02 2011


असम में भाजपा की मुसीबतें बढ़ती जा रही है, लगता है तरुण गोगोई के हाथ वाकई लंबे हैं, उन्होंने असम गण परिषद पर डोरे डाल दिए हैं, लगता नहीं कि आसन्न विधानसभा चुनावों में वहां भाजपा व अगप का चुनावी गठबंधन हो पाएगा। अगप तर्क दे रही है कि अगर वे भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ती है तो कांग्रेस को एकमुश्त मुस्लिम वोट मिल जाएंगे और अगर अगप अकेले चुनाव में जाती है तो मुस्लिम वोटरों का एक अच्छा प्रतिशत उसकी ओर भी मुखातिब हो सकता है…दिल बहलाने को ख्याल अच्छा है।

 
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