भागवत ट्विटर पर आने को क्यों मजबूर हुए

July 08 2019


यूं तो संघ अपने 95वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है, पर उसके चेहरे पर उम्र की कोई शिकन तक नहीं है। बल्कि अपने चेहरे-मोहरे को एक नए रूप में प्रस्तुत करने में जुटा है। सर संघचालक डॉ. मोहन भागवत आने वाले दिनों में संघ को एक प्रगतिशील व युवा चेहरा-मोहरा देने की कवायद में जुटे हैं। संघ से जुड़े विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि अपने लोगों के समक्ष उद्बोधन देते हुए भागवत कई दफे यह चिंता जता चुके हैं कि संघ की शाखाओं से युवाओं का मोहभंग हो रहा है। सो, संघ की सोच कैसे परिमार्जित हो, आधुनिक और विज्ञान सम्मत हो इस बारे में भागवत पहले भी अपने विचार रख चुके हैं। सोशल मीडिया खास कर ट्विटर व फेसबुक को लेकर संघ के मन में शुरू से कुछ भ्रांतियां थीं, पर जब भागवत को ऐसा लगने लगा कि सोशल और डिजिटल मीडिया से जुड़े बगैर युवा दिलों में पैठ नहीं बनाई जा सकती तो एक दिन यूं अचानक अपने छह अन्य सहयोगियों के साथ उन्होंने भी ट्विटर पर आने का फैसला कर लिया। ट्विटर ज्वॉइन करते ही भागवत के 12 हजार से ज्यादा फॉलोअर्स बन गए। भागवत के साथ-साथ भैयाजी जोशी, कृष्ण गोपाल और सुरेश सोनी जैसे संघ विचारकों ने अपना ट्विटर अकाऊंट खोल लिया। हालांकि संघ का आधिकारिक ट्विटर हेंडिल पहले से मौजूद था। पर सोशल मीडिया की उपस्थिति और इसके इस्तेमाल को लेकर भागवत सदा सशंकित रहे हैं। यहां तक कि संघ के मुखपत्र ’पांचजन्य’ और ’ऑर्गनाइजर’ के संपादकों के समक्ष भागवत सोशल मीडिया के बढ़ते चलन को लेकर अपनी असहमति भी जता चुके थे, बकौल भागवत-’सोशल मीडिया लोगों में ’मैं, मेरा और मुझे’ जैसे स्वार्थी सोच को आज बढ़ा रहा है। लोग इस माध्यम से अपने निजी विचार दूसरों पर थोपने की कोशिश कर रहे हैं।’ पर लगता है संघ प्रमुख को इंटरनेट क्रांति की ताकत के आगे झुकना पड़ रहा है। संघ के ट्विटर पर 13 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं, संघ के फेसबुक पेज पर भी 53 लाख से ज्यादा लाईक्स हैं। जहां दुनिया भर में हर महीने 32 करोड़ से ज्यादा लोग ट्विटर के इस्तेमाल से जुड़े हों तो संघ इसकी अनदेखी का जोखिम भला कैसे उठा सकता है।

 
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