असली चाणक्य कौन?

December 27 2018


जब राजस्थान में भाजपा उम्मीदवारों के चयन को लेकर निर्णायक बैठकों का दौर गर्म था तो ऐसे ही किसी एक बैठक में वसुंधरा की भाजपाध्यक्ष के साथ ठन गई। वसुंधरा का शाह से कहना था कि उन्होंने पूरे राजस्थान का कम से कम चार बार दौरा कर लिया है और यहां की एक-एक सीट की समझ है और अपनी उसी समझ को मुकम्मल रूप देते हुए उन्होंने उम्मीदवारों की यह लिस्ट तैयार की है, और उन्होंने उम्मीदवारों की यह लिस्ट शाह की ओर बढ़ा दी, कहते हैं शाह ने इस लिस्ट को देखे बगैर उसे एक ओर सरका दी। इसके बाद शाह ने अपनी लिस्ट वसुंधरा को यह कहते हुए पकड़ानी चाही कि पिछले तीन महीनों में उन्होंने राज्य में चार सर्वे करवाए हैं, जिसमें प्रत्येक सीट से प्राथमिकता के आधार पर तीन-तीन नाम समाने आए हैं, हम इन तीन नामों पर बैठकर डिस्कस कर लेते हैं और इसमें से एक नाम फाइनल कर देते हैं। सूत्र बताते हैं कि वसुंधरा ने गुस्से में उस लिस्ट के टुकड़े-टुकड़े कर दिए। जब दोनों नेताओं में गर्मा-गर्मी काफी बढ़ गई तो एक सुलह का फार्मूला निकाला गया, जिसके तहत वसुंधरा को 80 सीटें दी गई और शेष 120 सीटों पर उम्मीदवार शाह ने तय किए। सूत्रों की माने तो जब चुनावी नतीजे आए तो वसुंधरा की 80 सीटों में से 62 पर भाजपा उम्मीदवार जीत गए। और शाह के चार सर्वेक्षणों के मंथन से तय हुए 119 उम्मीदवारों में से मात्र 11 ही विजयश्री को गले लगा पाए।

 
Feedback
 
  1. Kamal Garg Says:

    I think that’s the reason, why Amit Shah could not do much in Rajasthan despite an openly defiant Vasundhara Raje. The non-cordial terms between Vasundhara Raje and Narendra Modi/Amit Shah was also evident when Vasundhara Raje did not attend even the swearing-in ceremony of Modi becoming the PM. Raje had/has real control of the ground realities and that’s the reason that BJP got respectable seat in the recent State elections.

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