भाजपा की रणनीतियों से क्या सीखे विपक्ष

June 04 2019


अगर खामोशियों से भी बतकही जरूरी है तो परास्त विपक्ष के लिए हताशा के सागर में डूबकी लगाने से पहले उन मोतियों को ढूंढ लाना जरूरी है जिसने मोदी-शाह के विजयी साफे की रौनकें बढ़ाई है। इतनी प्रचंड चुनावी विजय के बाद भाजपा अपने उन पृष्ठ प्रमुख और पन्ना प्रमुख को पुरस्कृत करने की योजना बना रही है जिन्होंने अपनी कड़ी मेहनत से ब्रांड मोदी को हिंदुस्तान के घर-घर तक पहुंचा दिया। भाजपा के रणनीतिकारों ने अपने बूथ मैनेजरों को ’24 प्वाइंट एक्शन प्लॉन’ दिया था और उन्हें अपने संबंधित राज्यों में मठों, मंदिरों और आश्रमों के प्रमुखों से मेल-जोल बढ़ाने को कहा गया था। इस काम में पग-पग पर उन्हें संघ कार्यकर्ताओं का भी उतना ही साथ मिला। पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं से ग्राउंड पर काम करने को कहा था और उन्हें यह ताकीद दी गई थी कि जमीनी स्तर पर ब्रांड मोदी के प्रचार के लिए वे सिर्फ पारंपरिक तरीकों का इस्तेमाल करें, मसलन लोगों से मेल-जोल, बातचीत और मोदी सरकार की नीतियों और उपलब्धियों का बखान, साथ ही आम लोगों के दिल में राष्ट्रवाद की जोत भी प्रज्ज्वलित होनी चाहिए। अपने कार्यकर्ताओं की हौंसला अफजाई के लिए स्वयं पीएम अपने नमो ऐप्प का सहारा ले रहे थे, जिससे उनके 1 करोड़ से ज्यादा भाजपा कार्यकर्ता सीधे तौर पर जुड़े थे। सबसे खास बात तो यह कि ये समर्पित कार्यकर्ता अपनी बात सीधे मोदी तक पहुंचा सकते थे। और यह पूरी तैयारी पिछले दो वर्षों से निरंतर चल रही थी। इस पूरी मुहिम में संघ के कार्यकर्तागण भी भाजपा कार्यकर्ताओं के कदम से कदम मिला कर चल रहे थे। सो, मोदी की प्रचंड जीत को अब संघ एक नए भारत के प्रादुर्भाव के तौर पर देख रहा है। संघ विचारक मनमोहन वैद्य ने तो इस बार की मोदी की जीत को हिंदू जीवन षैली और हिंदू विचारों की जीत बता दी और कहा कि यह चुनाव हिंदू आईडोलॉजी और देश को बांटने वाली विचारधाराओं के बीच थी, जिसमें भारत विजयी रहा।

 
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