वरुण गांधी से क्यों भिड़ गए नीरज शेखर?

May 27 2018


ठहरी हुई खामोशियों को स्वर देने में गांधी परिवार के भगवा चिराग वरुण गांधी का भी कोई सानी नहीं, भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के रवैये ने शायद उन्हें यह ताकत दी है कि वे अब अपनी लेखनी में, उद्बोधनों में राजनैतिक हदों की परवाह नहीं करते, एक नई राजनीति की वकालत करते दिखते हैं, जैसा कि इस शुक्रवार को नई दिल्ली के कांस्टीट्युशन क्लब में उनके साथ एक अजीबो-गरीब वाक्या घटित हो गया। वरुण ’स्वनीति इनिशिएटिव’ के एक कार्यक्रम में मुख्य वक्ता थे, उन्हें ’रोल ऑफ लेजिस्लेचर इन सोशल रिफॉर्म (सामाजिक सुधार में विधायिका की भूमिका) पर बोलना था। दिल्ली के बुद्धिजीवियों का एक बड़ा जमावड़ा भी वहां जुटा था। जब वरुण कार्यक्रम स्थल पर जाने के लिए अपनी गाड़ी से उतरे तो सभागार के ठीक सामने अवस्थित कॉफी काऊंटर के साथ खड़े सपा के राज्यसभा सांसद नीरज शेखर सफेद कुर्त्ते पायजामा में अपने परिवार के साथ वहां आइसक्रीम खा रहे थे। वरुण के आगे-आगे चल रहे आयोजकों में से किसी ने सांसद शेखर से रास्ते से हट जाने को कहा, तब तक वरुण भी आगे निकल कर सभागार में पहुंच गए। सूत्र बताते हैं कि नीरज शेखर को यह बात बेहद नागवार गुजरी। और जैसे ही वरुण ने माइक पर बोलना शुरू किया, नीरज शेखर ने बाहर दरवाजे से जोर-शोर से चीखना शुरू कर दिया कि ’तुम जानते नहीं कि मैं कौन हूं…’ वरुण ने शेखर को अनदेखा कर दिया, वे बोलते रहे और यह सांसद महोदय भी भाषायी गरिमा को बिसरा कर चीखते रहे। तब तक श्रोताओं में से दो हट्टे-कट्टे सरदार नीरज की ओर लपके और उन्हें वहां से जाने के लिए मजबूर कर दिया। सूत्रों की मानें तो नीरज ने इस बात की शिकायत राजीव प्रताप रूढ़ी से कर दी और फिर वरुण को भी उसी रात में एक चुभता हुआ ’व्हाट्सऐप मैसेज’ भेजा। वरुण चुप रहे और अपनी कविता संग्रह ’स्टिलनेस’ की ’कंट्रोल’ कविता की तरह चुप्पी को अपना हथियार बना लिया, जिस कविता में वे कहते हैं-’मैं युद्ध में नहीं हूं, मैंने अपने आप से कहा, क्योंकि मैंने हिरासत में पड़े मौन को जकड़ रखा है, जैसे स्थितप्रज्ञता की लड़ाई में मेरी यह ट्रॉफी है, और इन जंजीरों की जकड़ को चुनौती देने के लिए मेरे हाथ बहुत लंबे हैं, पर तुम्हारी उदासी को ओढ़ने के लिए ये उतने ही उदात्त हैं।’

 
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