मंत्रालय बांट नहीं पा रहे उद्धव

December 14 2019


उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री पद का शपथ लिए सप्ताह भर से ज्यादा का वक्त गुज़र गया है और वे भले ही मंत्रालय के छठी मंजिल के कमरा नंबर 601 में बैठने भी लगे हों, पर विभागों के बंटवारे का पेंचोखम है जो सुलझने का नाम नहीं ले रहा। मंत्रालयों के बंटवारे को लेकर तीनों सहयोगी दलों में खींचतान मची है। स्वयं उद्धव शिवसेना कोटे के लिए नगर विकास, आवास, सिंचाई, जल आपूर्ति और सैनिटेशन, राजस्व, परिवहन और वित्त जैसे मंत्रालय रखना चाहते हैं। सूत्रों की मानें तो कांग्रेस अपने कोटे के मंत्रियों के लिए उद्योग, स्कूली शिक्षा, राजस्व, बाल व महिला विकास, वेलफेयर जैसे मंत्रालय मांग रही है तो वहीं एनसीपी वित्त, राजस्व, शहरी विकास जैसे भारी भरकम मंत्रालयों की मांग कर रही है। पहले एनसीपी 16-14-12 के फार्मूले पर राजी थी, पर कहते हैं अब पवार ने किंचित अपना मन बदल लिया है। विधानसभा का शीतकालीन सत्र 16 दिसंबर से 23 दिसंबर तक चलेगा, उद्धव अपनी कैबिनेट का विस्तार इसके बाद करना चाहते हैं। शरद पवार संसद सत्र के लिए अब तक दिल्ली में थे, इसी सप्ताहंत वह मुंबई लौटे हैं, तब उद्धव के साथ मंत्रालय के बंटवारे को लेकर उनकी एक अहम बैठक होने वाली है। मोदी-शाह की नज़रें भी महाराष्ट्र पर टिकी है, इन द्धय का मानना है कि वहां गठबंधन की सरकार छह महीने से ज्यादा नहीं चलने वाली। क्योंकि कई मुद्दों पर इन तीनों सहयोगी दलों में तकरार है। जैसे शिवसेना नागरिकता संशोधन बिल के समर्थन में है तो कांग्रेस इसका विरोध कर रही है। भाजपा को लगता है कि यह गठबंधन केवल सरकार बनाने के लिए हुआ है, जो गलती उसने जम्मू-कश्मीर में पीडीपी के साथ सरकार बना कर की थी।

 
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