गफलत में हैं तमाम दल

April 29 2019


देश में तीन फेज के चुनाव संपन्न हो चुके हैं पर सटीक कयासों की कोई तस्वीर उभर कर सामने नहीं आ पा रही, वोटरों ने भी जैसे अपनी जुबां और भंगिमाओं पर सन्नाटों के गहने पहन रखे हैं। भाजपा और कांग्रेस जैसे बड़े दल तीन फेज संपन्न होने के बाद अपनी पसंदीदा एजेंसियों से एक्जिट पोल करवा रहे हैं। एक नहीं कई-कई एजेंसियों से, पर संशय का आलम बरकरार है, कोई साफ तस्वीर उभर कर सामने नहीं आ रही। आने वाले चरण के चुनाव हिंदी पट्टी के हैं जहां भाजपा को अपना दबदबा बरकरार रखने की लड़ाई लड़नी है, सो, आने वाले चरणों के लिए पार्टी अपना पूरा धन-बल झोंक रही है। संघ भी अपने कार्यकर्ताओं को डोर-टू-डोर कैंपेन के लिए प्रेरित कर रहा है, वाराणसी में नामांकन के वक्त मोदी का इतना बड़ा मेगा शो भी इसी संशय से बाहर निकलने की बेकरारी बताता है। यहां तक कि शेयर मार्केट के ट्रेंड भी उथल-पुथल मचा रहे हैं, कभी बाजार चढ़ता है तो भगवा चेहरों पर आशाएं बिखेर जाती है, फिर झम्म से बाजार गिर जाता है तो विपक्ष को मुस्कुराने की वजह मिल जाती है। अभी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान में चुनाव होने हैं जहां भाजपा का काफी कुछ दांव पर लगा है सो, राकेश झुनझुनवाला जैसे बाजार के पंडितों से आशाभरे बयान दिलवाए जा रहे हैं। और ये मोदी के दुबारा सत्ता में आने की भविष्यवाणियां कर रहे हैं। लेकिन जब चुनावी बाजार में खामोशियां आवाजें देकर बुला रही हों और जब चुप्पियां घर आ जा रही हों तो पक्के तौर पर कुछ कह पाना बड़ा मुश्किल हो जाता है।

 
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