रण छोड़ तेजस्वी के समक्ष तेजप्रताप का तांडव

July 08 2019


लालू परिवार में सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है। अपनी टूटती पार्टी और बिखरते परिवार को बचाने की बैचेनी रांची जेल में बैठे लालू के चेहरे पर साफ नज़र आ रही है। 23 मई को चुनाव परिणाम आने के बाद से ही लालू के घोषित राजनैतिक उत्तराधिकारी तेजस्वी यादव लगातार अज्ञातवास में थे। पार्टी के कई बड़े नेताओं और गठबंधन साथी जीतन राम मांझी की सार्वजनिक चिंताओं के बावजूद तेजस्वी का कोई अता-पता नहीं था, तो उनके बारे में मशहूर करा दिया गया कि वे ’रण छोड़’ हैं। कि अचानक 4 जुलाई को यकबयक तेजस्वी विधानसभा में अवतरित होते हैं और बताते हैं कि वे दिल्ली में अपने घायल पैर का इलाज करवा रहे थे। पर इसके अगले ही रोज 5 जुलाई को राजद का 22वां स्थापना दिवस था। पर तेजस्वी उसमें भी नहीं आए। लालू इसमें आना चाहते थे पर उन्हें बेल ही नहीं मिली। लालू परिवार की एकमात्र सदस्य राबड़ी देवी ने अपने पार्टी सहयोगियों रघुवंश प्रसाद सिंह, शिवानंद तिवारी, रामचंद्र पूर्वे, आलोक मेहता व अन्य के साथ पार्टी मुख्यालय में दीप प्रज्ज्वलित किया। इसके बाद केक भी काटा गया। केक कटते ही एक बड़ा ड्रामा हुआ, राबड़ी के बड़े पुत्र तेजप्रताप शिव के अवतार में जटाधारी व हाथों में त्रिशूल लिए वहां अचानक अवतरित हो गए, उनके आते ही उनके लिए समर्थकों ने जिंदाबाद के नारे लगाने शुरू कर दिए। इसी धमाचौकड़ी के दरम्यान तेजप्रताप अपनी जटाओं को संभालते सीधे अपने पिता लालू के कमरे में पहुंचे और उनकी कुर्सी पर जम गए। संदेश साफ है, यह एक बड़े घमासान का ऐलान है।

 
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