रंग बदलती टीडीपी

December 14 2019


राजनीति ’ना काहू से दोस्ती ना काहू से बैर’ का ही आधुनिक फलसफा है, अब अपने चंद्रबाबू नायडू को ही ले लीजिए, इस लोकसभा चुनाव में उन्होंने मोदी-शाह और भाजपा को क्या पानी पी-पी कर कोसा था, पर जब उनकी पार्टी को जनता ने नकार दिया तो लौट के नायडू भाजपा के द्वारे आ गए हैं। अब नायडू हर जगह मोदी-शाह की तारीफों के पुल बांधते नज़र आ रहे हैं। सो, पिछले दिनों जब संसद में भाजपा पर विपक्ष का तीखा हमला हो रहा था तो नायडू ने विपक्षियों की पांत से कन्नी काट ली। चाहे प्रज्ञा ठाकुर का गोडसे पर दिया गया बयान हो या फिर महाराष्ट्र का मामला। टीडीपी सांसद संसद में चुपचाप किनारे खड़े रहे। टीडीपी के लिए अमित शाह पहले ही कह चुके थे कि टीडीपी के लिए एनडीए के दरवाजे बंद हो चुके हैं। पर बदली सियासी परिस्थितियों में जबकि शिवसेना जैसे पुराने साथी ने एनडीए का दामन झटक दिया है ऐसे में टीडीपी जैसे दल भाजपा के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल सकते हैं।

 
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