मोदी करेंगे बेरोजगारों की चिंता

December 19 2017


गुजरात विधानसभा चुनाव में भगवा सिरमौर मोदी-शाह द्वय को कई नए सबक सीखने को मिले हैं। मोदी ने अपनी चुनावी सभाओं में महसूस किया कि राज्य के युवा किसी न किसी प्रकार भाजपा से नाराज़ हैं, चूंकि राहुल, हार्दिक, अल्पेश व जिग्नेश की चुनावी सभाओं में युवाओं की अभूतपूर्व भागीदारी थी। सो, चुनावी सियासत के माहिर बाजीगर मोदी 2019 के आम चुनावों में ऐसा कोई रिस्क नहीं लेना चाहते। चुनांचे देश के युवाओं खासकर बेरोजगार युवाओं को लुभाने के लिए मोदी सरकार कई नई योजनाओं को परवान चढ़ा सकती है। चुनांचे अगले बजट में नेशनल एम्प्लांयमेंट पॉलिसी (एनईपी) को लेकर बड़ी घोषणाएं मुमकिन हैं। सनद रहे कि राष्ट्रीय रोजगार नीति युवाओं के लिए नौकरियों की चिंता करता है। इसके तहत संगठित व असंगठित क्षेत्रों के श्रमिकों के आर्थिक व सामाजिक बेहतरी के लिए नई लेबर पॉलिसी को भी सामने लाया जा सकता है। नए रोजगार सृजन के लिए लघु व मध्यम उद्योगों को कई प्रकार की रियायतें दी जा सकती हैं, वित्तीय संस्थानों से उनको कर्ज मिलने का मार्ग भी पहले से सुगम किया जा सकता है। जैसा कि नीति आयोग ने अपनी एक हालिया रिपोर्ट में चिंता जताई है कि भारत में 15-30 साल आयु वर्ग के 30 फीसदी से ज्यादा युवाओं को सही व सटीक ट्रेनिंग व शिक्षा का अभाव है। जो उन्हें कम वेतन की नौकरी के लिए बाध्य कर रहा है। इस मामले में चीन जैसे देश भी हमसे कहीं आगे है। सो, अगला बजट न सिर्फ चुनावी होगा, बल्कि युवा हितों की चिंता भी उसमें से झलकने वाली है।

 
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