संवाद की नई बानगी पर कदमताल करता संघ

September 18 2018


’शब्द चबाने के लिए और शब्द खेलने के लिए भी
शब्द ब्रह्म भी है और बारूद भी, यह सच भी है और छद्म भी
यह निर्द्वंद विचरण करता है हमारे मन में
और हमारे मंसूबों को विस्तार भी देता है’
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ पूरे देश को यह विश्वास दिलाने में जुटा है कि उनका संवाद में कितना भरोसा है, इस बात को मद्देनजर रखते हुए, इस सोमवार से संघ एक तीन दिवसीय आयोजन कर रहा है नई दिल्ली के विज्ञान भवन में। विशय है ’भविष्य का भारत: संघ का दृष्टिकोण’ इस श्रृंखला के पहले दो दिन संघ प्रमुख मोहन भागवत संघ की नीतियों और इसके दर्शन पर एक खुला संवाद स्थापित करेंगे। फिर तीसरे दिन सवाल-जवाब के दौर जारी रहेंगे, जहां सवाल पहले लिख कर देने होंगे, फिर इसका जवाब मिलेगा। इस आयोजन में विभिन्न राजनैतिक पार्टियों, देश के कॉरपोरेट व मनोरंजन जगत के धुंरधर, कुछ बड़े समाजसेवी समेत चीन जैसे देशों से भी नुमांइदगी रहेगी। राजनैतिक दलों में तृणमूल कांग्रेस, सपा, डीएमके जैसे क्षेत्रीय दलों को भी न्यौता भेजा गया है। राहुल गांधी को आमंत्रित करने को लेकर संघ कर्णधारों में एक राय नहीं बन पाई। चीन को बुलाया गया है पर पाकिस्तान से परहेज किया गया है, चीन के बारे में संघ की राय है कि चीन और भारत में एक सांस्कृतिक समानता है, जबकि पाकिस्तान से बात बेमानी है, क्योंकि उसने हमारे सैनिकों को मारा है। इस आयोजन में चाय पर चर्चा भी है जिसमें बॉलीवुड के बादशाह शाहरूख खान की भी इसके पहले दिन यानी 17 सितंबर को भाग लेने की चर्चा है। हालिया दिनों में जिस तरह से कांग्रेस के पुरोधा राहुल गांधी ने भाजपा के साथ-साथ संघ पर भी निशाना साधा है, संघ नेतृत्व को कहीं न कहीं ऐसा लगता है कि भाजपा के नेतागण ठीक से उनका बचाव नहीं कर पा रहे, सो संघ ने नेपथ्य से मुख्य मंच पर आने का संकल्प लिया है। संघ के बारे में जाने-अनजाने जो भ्रांतियां बनी है या रची गई है, मोहन भागवत उन बातों का सीधा जवाब देने का इरादा रखते हैं। इस तीन दिवसीय आयोजन के मंथन से निकले शब्द-’अमृत’ को संघ के कार्यकर्ता देशभर में ले जाने का इरादा रखते हैं। संघ की 60 हजार से ज्यादा शाखाएं हैं और इसके तीन दर्जन से ज्यादा आनुशांगिक संगठन हैं, संघ के देशभर में 65 हजार से ज्यादा एकल विद्यालय हैं। यानी इस आयोजन से संघ न सिर्फ अपनी कट्टर हिंदूवादी छवि से बाहर आना चाहता है, बल्कि भाषायी समरसता के भी नए मिथक गढ़ना चाहता है।

 
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