ममता का मंथन

June 04 2019


ताजा-ताजा भगवा कैजुअल्टी का शिकार हुई ममता बनर्जी अब जमीनी हकीकत के साथ जीना चाहती हैं। पिछले दिनों कोलकाता में उन्होंने अपने पार्टी नेताओं के साथ तृणमूल के गिरते ग्राफ और पश्चिम बंगाल में भाजपा के नए प्रादुर्भाव पर विस्तार से चर्चा की। और इस मंथन बैठक से तीन प्रमुख बिंदु उभर कर सामने आए। जिसमें पहला है, सांप्रदायिक ध्रुवीकरण। इसके काट के तौर पर ममता ने बंगाली प्राइड को आगे रखने की बात कही है और कहा कि जब भी जय श्री राम के नारे लगे तो जवाब में ’जय बांग्ला’ का नारा दो। दूसरे बिंदु के तौर पर शायद पहली बार ममता को तृणमूल कार्यकर्ताओं की गुंडागर्दी का अहसास हुआ। ममता ने माना कि सीपीएम के गुंडा तत्व उनके कैडर में घुस आए हैं, सो दीदी ने कड़े शब्दों में कहा ’ टोला बाजी (अवैध वसूली) बंद होनी चाहिए। इन टोलाबाजों की वजह से हमारी यह दुर्गत हो रही है।’ दीदी ने इसके साथ पुलिस और राज्य प्रशासन से साफ कह दिया है कि वे इन गुंडा तत्वों से अपने हिसाब से निपटे, इस मामले में दीदी कोई दखल नहीं देगी। तीसरा बिंदु कि राज्य सरकार अपने अच्छे कार्यों को जनता तक नहीं पहुंचा पाई है, इस काम में कैडर उनका साथ दे। ये विचार निःसंदेह अच्छे हैं, पर दीदी के जेहन में बड़ी देर से आए हैं, वह भी जब जब उनका आधा कारवां लुट चुका है।

 
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