आंध्र में खिलेगा कमल

July 01 2019


आंध्र प्रदेश में भले ही भाजपा इन चुनावों में एक भी सीट नहीं जीत पाई हो, पर आंध्र में वापसी की भगवा पटकथा लिखी जा चुकी है। जल्द ही भाजपा यहां प्रमुख विपक्षी दल की भूमिका में नज़र आ सकती है। भाजपा और जगन दोनों ही इस बात पर एक राय हैं कि आंध्र से चंद्रबाबू व तेदेपा का सूपड़ा साफ होना चाहिए। इस सोच में जगन ने भी भाजपा का साथ देने का मन बनाया हुआ है। राज्यसभा में जहां तेलगुदेशम पार्टी के 6 में से 4 सांसदों ने पहले ही भाजपा का दामन थाम लिया है, इससे उत्साहित होकर भाजपा ने तेदेपा विधायकों पर डोले डालने शुरू कर दिए हैं। इस वक्त आंध्र विधानसभा में तेदेपा के 23 विधायक निर्वाचित होकर पहुंचे हैं, सूत्रों की मानें तो इसमें से 16 विधायक भाजपा के संपर्क में हैं और कहते हैं इनमें से 13 ने भाजपा में आने की सहमति जता दी है। अगर ऐसा होता है तो भाजपा आंध्र में प्रमुख विपक्षी दल के तौर पर अवतरित हो सकती है। आंध्र में भाजपा की जमीन तैयार करने की पूरी जिम्मेदारी संघ विचारक सुनील देवधर ने उठा रखी है जो पहले ही वर्षों से त्रिपुरा में सरकार में कुंडली जमाए माणिक सरकार को वहां से चलता कर चुके हैं। वैसे भी देवधर के लिए आंध्र में उनका काम इस दफे इसीलिए भी आसान हो गया है क्योंकि इन चुनावों में वहां कांग्रेस अपना खाता भी नहीं खोल पाई है। भाजपा जगन पर लगातार यह दबाव बना रही है कि वह जल्दी से जल्दी चंद्रबाबू के कथित घोटालों की फाइलें खोले। यह आइडिया जगन को भी मुफीद लगता है क्योंकि जगन का चंद्रबाबू से छत्तीस का आंकड़ा जगजाहिर है, एक बार जो नायडू निपट गए, आगे के दिनों में भाजपा के लिए जगन से भिड़ना किंचित आसान होगा।

 
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