सीट शेयरिंग को लेकर बिहार में फंसा पेंच

January 29 2019


बिहार में विपक्षी एकता का खटराग अलापने में लालू पुत्र तेजस्वी यादव का कोई सानी नहीं, पर अन्य दलों के साथ सीट शेयर करना राजद के लिए नई मुसीबत बनकर उभरा है। तेजस्वी खुले दिल और खुले मन के साथ कांग्रेस से बात करने के इच्छुक हैं, वे चाहते हैं जिस फार्मूले के तहत यूपी में सपा-बसपा के बीच सीटों का समझौता हुआ है, कुछ इसी तर्ज पर बिहार में भी वे कांग्रेस के साथ 20-20 सीटों का फार्मूला लेकर आए हैं, यानी कि बिहार की कुल 40 सीटों में से 20 पर राजद अपने उम्मीदवार उतारे तो 20 पर कांग्रेस। पर कांग्रेस अपने हिस्से की सीटों में से महागठबंधन के अन्य साथियों मसलन उपेंद्र कुशवाहा की रालोसपा और पप्पू यादव की पार्टी के लिए 8 सीटें छोड़ दें और खुद 12 सीटों पर लड़े। लेकिन इस दफे बिहार में कांग्रेस के हौंसले बम-बम है और प्रियंका गांधी के आने का एक मनोवैज्ञानिक फायदा भी पार्टी को मिल रहा है। वहां की अगड़ी जातियां तेजी से कांग्रेस के पक्ष में लामबंद हुई हैं, सो कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने के इच्छुक फॉरवर्ड नेताओं की एक बाढ़ सी आ गई है। वहीं राजद है जो अपने कोटे की सीट से अगड़ी जातियों के उम्मीदवार नहीं उतारना चाहता है। कीर्ति आजाद, उदय सिंह पप्पू और शत्रुघ्न सिन्हा जैसे लोगों के लिए कांग्रेस को ही आगे आना होगा। मुंगेर के बाहुबली अनंत सिंह को लड़ाने की पैरवी अखिलेश सिंह कर रहे हैं यह जानते हुए कि अनंत और तेजस्वी में छत्तीस का आंकड़ा है। फिर शरद यादव को भी कांग्रेस को अपने कोटे से एडजस्ट करना होगा। जेएनयू फेम के कन्हैया कुमार भी अगड़ी जाति के उम्मीदवार हैं, जो सीपीआई के टिकट पर बेगुसराय से लड़ना चाहते हैं। यह सीट भी कांग्रेस को अपने कोटे से छोड़नी पड़ सकती है। पर यह सब अब 3 फरवरी को पटना में आहूत राहुल गांधी की जनाकांक्षा रैली के बाद तय होगा। पर जो तय है वह यह कि इस दफे बिहार में कांग्रेस के टिकट के लिए खूब मारामारी मचेगी।

 
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