किसानों को अंग्रेजी

January 29 2019


वायब्रेंट गुजरात के तीसरे यानी आखिरी दिन मोदी सरकार ने बिचारे किसानों की भी सुध लेनी चाही। किसानों व खेती की चिंता करने के लिए बकायदा एक सेशन रखा गया, जिसका शीर्षक था- ’सस्टेनेबल टेक्नोलॉजी ड्रिवन एग्रीकल्चर फॉर न्यू इंडिया’। इस सेमिनार में भाग लेने के लिए दूरदराज के किसानों को आमंत्रित किया गया था। पर विडंबना देखिए कि जो भी एक्सपर्ट और मंत्री बोलने को आए उन्होंने अंग्रेजी में बोलना शुरू कर दिया। 10 मिनट के अंदर ही किसान ऊंघने लगे, वह तो भला हो पुरूशोत्तम रूपाला का वे आते ही गुजराती में शुरू हुए तक जाकर किसानों की तंद्रा टूटी। जब ये किसान खाने के स्टॉल पर पहुंच तो वहां सचमुच व्यंजनों की बहार थी, जिसका इन्होंने जमकर लुत्फ उठाया।

 
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