आर्थिक बदहाली में सीपीआई

November 12 2018


कांग्रेस के बाद अगर देश की कोई सबसे पुरानी राजनैतिक पार्टी है तो वह है सीपीआई यानी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी। यूपीए काल तक बम-बम रहने वाली सीपीआई की आर्थिक हालात इन दिनों काफी खस्ता है, पार्टी को पैसों की इतनी तंगी आन पड़ी है कि वह अपने नेशनल हेडर्क्वाटर के महीने का खर्च भी नहीं उठा पा रही है। नहीं तो अब तक सीपीआई में यह परंपरा रही थी कि इस पार्टी से जब भी कोई सांसद या विधायक चुना जाता है तो वह अपना पूरा वेतन पार्टी के खाते में जमा करा देता है। और इसी परंपरा के तहत चाहे कोई पार्टी का सांसद हो या विधायक या फिर पार्टी का पूर्णकालिक कार्यकर्त्ता, उसे पार्टी फंड से महीने के 13 हजार रुपए मिल जाया करते थे जो उनके निजी खर्चों के लिए होता था। पर पिछले काफी समय से सीपीआई से चुनकर आने वाले सांसदों और विधायकों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज हुई है। तो पैसा आए कहां से? केरल जैसे राज्य पर ही पूरी निर्भरता बन आई है, पर पूरे पैसे वहां से भी नहीं आ पा रहे। सो, डी राजा जैसे सीनियर नेताओं ने अब पार्टी ऑफिस जाने के बजाए अपने घर से ही काम-काज करना शुरू कर दिया है।

 
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