केजरीवाल की राहुल आशा

March 13 2019


दिल्ली में आम आदमी पार्टी से कुट्टी का ऐलान शीला दीक्षित ने किया है, राहुल गांधी ने नहीं। चुनांचे अरविंद केजरीवाल के मन में अब भी यह आशा जग रही है कि हो सकता है राहुल ऐन वक्त शीला का फैसला पलट दें। ’आप’ से खटपट की शुरूआत अजय माकन के जमाने से शुरू हो गई थी जब उनके पास दिल्ली कांग्रेस की बागडोर थी, जब शीला दीक्षित को माकन की जगह दिल्ली की कमान सौंपी गई तो ठीक उससे पहले माकन ने दिल्ली की सातों लोकसभा सीटों का एक जनमत सर्वेक्षण करवाया था कि अगर कांग्रेस दिल्ली में अकेले लड़ती है तो उसके नतीजे क्या होंगे? इस सर्वेक्षण के नतीजों ने एकबारगी माकन को भी झकझोर दिया, सर्वेक्षण बता रहे थे कि अगर आप और कांग्रेस मिल कर चुनाव लड़ते हैं तो गठबंधन की सौ फीसदी सफलता की गारंटी है, वरना दोनों ही पार्टियों की आसन्न चुनाव में बुरी गत है। कमोबेश आप का सर्वे भी यही दास्तां बयान कर रहा था। सूत्रों की मानें तो इस सर्वे रिपोर्ट को लेकर माकन राहुल के पास पहुंचे, वहां शीला भी मौजूद थीं, तब शीला ने आप के साथ किसी भी प्रकार के गठबंधन की खुल कर मुखालफत की। कहते हैं इस बात पर माकन और शीला के बीच कुछ इस तरह से तलवारें तन गई कि राहुल को बीच-बचाव करना पड़ा। कहते हैं माकन ने तैश में आकर शीला से यह भी पूछ लिया कि अगर वाकई दिल्ली में कांग्रेस की संभावनाएं इतनी बेहतर हैं तो वह अपने पुत्र संदीप दीक्षित को यहां से चुनाव क्यों नहीं लड़वातीं? वे क्यों चुनाव लड़ने भोपाल जा रहे हैं? इन यक्ष प्रश्नों ने फिलहाल दोनों ही पार्टियों के शीर्ष को घेर रखा है, मुमकिन है इन प्रश्नों के आलोक में राहुल कोई बड़ा फैसला ले लें।

 
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