सरकार के निशाने पर अब ब्यूरोक्रेसी

December 20 2018


जब नरेंद्र मोदी दिल्ली के निज़ाम पर काबिज हुए तो नौकरशाहों की निकल पड़ी, जनता के चुने हुए जन प्रतिनिधियों के आभामंडल में जबर्दस्त गिरावट दर्ज हुई, यहां तक कि विभिन्न मंत्रालयों में भी विभाग के सचिव मंत्रियों को सुपर सीड कर सीधे पीएमओ को अपनी रिपोर्ट देने लगे। पर अब मुल्क के सर्वेसर्वा को ऐसा लगने लगा है कि उनकी सरकार की अहम जानकारियां नौकरशाहों के माध्यम से पत्रकारों को लीक हो रही हैं। अभी पिछले दिनों एक सचिव महोदय ने एक प्रमुख मंत्रालय का जिम्मा संभाला तो कोई चार पत्रकार उनसे मिलने उनके दफ्तर जा पहुंचे। पत्रकारों को इस सचिव महोदय ने बताया कि देश के किसानों की दशा-दिशा बदलने की कवायद में सरकार क्या नया करने जा रही है, नई कृषक नीति के मसौदे में किन अहम बातों को स्थान दिया जा रहा है, आदि-आदि। अभी पत्रकार गण उठकर सचिव महोदय के चैंबर से बाहर भी नहीं निकले थे कि सचिव महोदय को पीएमओ से नृपेंद्र मिश्र का फोन आ गया। सूत्र बताते हैं कि उन्हें कड़ी फटकार लगाते हुए मिश्र ने कहा कि आप नेता नहीं जो पत्रकारों से बात करें, आप मंत्रालय के काम-काज पर अपना ध्यान लगाएं। इसके अगले कुछ दिनों में एक मंत्रालय के सचिव को एक टीवी चैनल के कॉन्क्लेव में ’जल सुरक्षा नीति’ पर बोलने जाना था, उन्हें भी फोन आ गया और जबर्दस्त तरीके से डपटा गया। तो उस सचिव महोदय ने बेहद मासूमियत से कह दिया कि वे सरकार की उपलब्धियां बताने और गिनाने के लिए कॉन्क्लेव में जा रहे हैं। उनसे कहा गया कि सरकार की उपलब्धियां गिनाने के लिए कई और लोग हैं, आप अपने काम से काम रखें। माना जा रहा है कि अब देश के नौकरशाहों पर सरकार की खुफिया एजेंसियों की पैनी निगाहें हैं।

 
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