Archive | July, 2019

शाह के चक्कर में योगी की छूट गई फ्लाईट

Posted on 29 July 2019 by admin

पिछले सप्ताह योगी आदित्यनाथ अपने आधिकारिक दौरे पर दिल्ली पधारे थे, सब काम-धाम संपन्न हो जाने के बाद उन्हें रात्रि 8 बजे की लखनऊ की वापसी की फ्लाईट पकड़नी थी, एयरपोर्ट जाने के क्रम में उन्होंने अमित शाह को फोन लगा दिया और कहा-’दिल्ली आया था, सोचा नमस्कार कर लूं।’ सूत्र बताते हैं कि शाह ने योगी से पूछा-’अभी आप कहां हैं?’ योगी ने बताया कि ’वह 8 बजे की फ्लाईट पकड़ने जा रहे हैं’, तो शाह की ओर से निर्देश आया-’मिलने आ जाइए, फिर अगली फ्लाईट पकड़ लेना।’ जब योगी अपनी एयरपोर्ट यात्रा बीच में छोड़ कर शाह के घर पहुंचे तो देखा कि वहां पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा और नए नवेले भाजपा के महासचिव (संगठन) बीएल संतोष पहले से बैठे हुए हैं। पर मीटिंग शुरू होते-होते रात्रि के 9 बज गए और यह मीटिंग रात 11.30 बजे तक चली। इसी बैठक में यूपी के अगले प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर स्वतंत्र देव सिंह के नाम पर मुहर लगी। साथ ही आने वाले यूपी उप चुनाव में संभावित भाजपा उम्मीदवारों को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई। इस बारे में भी बात हुई कि योगी कैबिनेट के अगले फेरबदल में किन नए मंत्रियों को जगह मिलेगी। यूपी सरकार के तीन मंत्री 2019 के लोकसभा चुनाव में सांसद बन कर दिल्ली आ गए हैं। सो, उनकी कुर्सियों पर भी नए चेहरों को विराजमान होना है, यह भी तय हुआ है कि यूपी विधानसभा सत्र के फौरन बाद योगी मंत्रिमंडल में फेरबदल होगा।

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योगी का दांव चल निकला

Posted on 29 July 2019 by admin

यूपी के नए नवेले प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के ’ब्लूआईड ब्यॉय’ में शुमार होते हैं, स्वतंत्र देव को यूपी में कहीं पहले से शाह का आंख, नाक, कान माना जाता रहा है। योगी को इस बात का बखूबी इल्म था, सो उन्होंने प्रदेश के नए भगवा मुखिया के तौर पर किसी अगड़े की जगह एक पिछड़ी जाति के नेता के नाम को आगे किया जिससे कि प्रदेश में तेजी से आगे बढ़ रहे पिछड़ों के एक नेता केशव प्रसाद मौर्य की रफ्तार को थामा जा सके। मौर्य भी शाह के बेहद भरोसेमदों में शुमार होते हैं। पर योगी भी भगवा सियासत की नब्ज पर हाथ रखते हैं, चुनांचे उनका कोई भी भाषण इस तकियाकलाम के बगैर पूरा नहीं होता कि अमित शाह जी के निर्देशानुसार यह अहम निर्णय लिया गया है। राम नाम लीजिए तो भवसागर पार हो ही जाता है।

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पीएम से मिले तो तृणमूल सांसदों के बदल गए तेवर

Posted on 29 July 2019 by admin

कोई चार रोज पूर्व तृणमूल सांसदों की एक अहम बैठक पीएम मोदी के संग संपन्न हुई। दोनों सदनों के कोई 12 तृणमूल सांसद प्रधानमंत्री से संसद भवन स्थित उनके कक्ष में मिले, विश्वस्त सूत्रों का दावा है कि पीएम के साथ तृणमूल सांसदों की बैठक दोपहर 12.05 बजे शुरू हुई और यह बैठक कोई 12.35 बजे तक चली। पीएम के कक्ष में प्रवेश करने से पहले दीदी के इन बांकुरों के तेवर व स्वर दोनों उग्र थे, पर जब एक बार पीएम से मिल कर ये बाहर निकल रहे थे तो इनके तेवर, नज़र और नज़रिया तीनों बदले हुए थे। जब पत्रकारों ने इनसे जानना चाहा कि आखिर पीएम के साथ उनकी क्या बातें हुई तो इन्होंने समवेत स्वरों में कहा कि ’पश्चिम बंगाल का नाम बदल कर बांग्ला करने का उन्होंने पीएम से अनुरोध किया है।’ पर जानने वाले बताते हैं कि पीएम से मिल कर तृणमूल सांसदों के तेवर किंचित ढीले पड़ गए हैं, नहीं तो अब तक 19 विधेयकों को लेकर तृणमूल का विरोध था, जिसे वह सेलेक्ट कमिटी में भेजना चाहते थे, ऐसा न करने की सूरत में तृणमूल सांसद सदन के बॉयकाट की धमकी भी दे रहे थे, पर मोदी ने क्या मंतर फेरा कि इनके विरोध की गिनती 19 से घट कर अब मात्र 7 रह गई थी।

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यह उन्नीस क्या है?

Posted on 29 July 2019 by admin

तृणमूल के ही एक सांसद अपना नाम न छापने की शर्त पर खुलासा करते हैं कि भले ही 2019 का चुनाव गुजर गया हो पर अब भी ’सारदा चिटफंड’ घोटाले का भूत जिंदा है। सो, तृणमूल सांसदों को भी फूंक-फूंक कर कदम रखने होते हैं और बहुत जरूरी होने पर ही वे सदन का बहिष्कार कर सकते हैं। सिर्फ तृणमूल ही क्यों जगन की वाईएसआर कांग्रेस का भी यही हाल है। जब भी तृणमूल वाले जगन के सांसदों को विरोध के स्वर तेज करने के लिए खड़े होने को कहते हैं, उनकी बेंच से तपाक से जवाब आता है-’नाइनटीन’ यानी (19), और वे शांत होकर बैठ जाते हैं, सनद रहे कि जगन के खिलाफ अभी 19 मामले चल रहे हैं।

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राम-राम करते आखिर क्यों रामलाल को जाना पड़ा

Posted on 29 July 2019 by admin

2016 से ही रामलाल को वापिस संघ में भेजे जाने की चर्चा थी, 2017 में बकायदा रामलाल ने मोदी और शाह को पत्र लिख कर अपनी उम्र का हवाला देकर पद मुक्त करने का अनुरोध किया था, इसके बावजूद तब उन्हें उनके पद से नहीं हटाया गया। 2006 से लगातार वे भाजपा के संगठन महासचिव बने रहे। पर अब अचानक ऐसी क्या बात हो गई जो उनकी रूखसती पर मुहर लग गई। संघ से जुड़े विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि पिछले दिनों रामलाल की भतीजी ने एक मुस्लिम युवक से प्रेम विवाह रचा लिया, कहते हैं इसकी खुशी में स्वयं रामलाल ने दो जगह रिसेप्शन पार्टी दी। यह बात भाजपा व संघ को बेहद नागवार गुजरी। उन पर यह भी आरोप लगते रहे कि भाजपा में रहते हुए उन्होंने काफी धन-संपत्तियां भी अर्जित की। मेरठ के एक छोटे से घर से अपनी यात्रा शुरू करने वाले रामलाल को पूरी उम्मीद थी कि जब उनकी संघ में पुनर्वापसी होगी तो उन्हें किसी महत्वपूर्ण पद से नवाजा जाएगा। पर उन्हें इस बार अखिल भारतीय सह संपर्क प्रमुख बनाया गया, उनकी तमाम उत्कंठाएं ’पुनः मूषक भवः’ होने को बाध्य हो गई।

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सांसदों की पसंद प्राइवेट एयरलाइंस

Posted on 29 July 2019 by admin

लोकसभा बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की अहम बैठक आहूत थी, स्वयं लोकसभा स्पीकर ओम बिरला इस बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। इस बैठक में उपस्थित कुछ सांसदों ने स्पीकर महोदय से अर्ज किया कि संसद परिसर में केवल और केवल एयर इंडिया का काऊंटर है और कई सांसद ऐसे भी हैं जिनके गृह क्षेत्र तक एयर इंडिया की कोई फ्लाईट नहीं जाती, ऐसे में अन्य प्राइवेट एयरलाइंस के काऊंटर भी संसद परिसर में खुलने चाहिए। स्पीकर महोदय को यह आइडिया मुफीद लगा और उन्होंने उस बैठक में मौजूद राजीव प्रताप रूढ़ी से कहा कि वे इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने की पहल करें। सूत्रों की मानें तो इस पर रूढ़ी ने स्पीकर को बताया कि संसद परिसर में काम करने की इजाजत सिर्फ सरकारी एजेंसियों या उनकी स्वायत्त संस्थाओं को भी है, प्राइवेट कंपनियां यहां से ऑपरेट नहीं कर सकती। स्पीकर को यह जानकारी नागवार गुजरी है, वे इस मसले को आगे बढ़ाने का इरादा रखते हैं।

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शाह खुश हुए

Posted on 23 July 2019 by admin

गृह मंत्रालय कवर कर रहे पत्रकारों के आनंद का इन दिनों कोई ठिकाना नहीं है, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह गृह मंत्रालय का बीट कवर कर रहे पत्रकारों से सप्ताह में दो बार नियम से मिल रहे हैं और उनसे काम की बातें शेयर करने से कोताही नहीं कर रहे हैं। सो, इन पत्रकारों को शाह से मिल कर महत्त्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त हो जाती है, वे अपनी कई खबरों को मोदी सरकार के इस नंबर दो से क्रॉस चेक भी कर लिया करते हैं, पत्रकारों के साथ शाह के व्यवहार में भी एक यथोचित बदलाव देखा जा सकता है, कहते हैं पत्रकारों के प्रति उनका रुख अब खासा दोस्ताना हो गया है। वहीं शाह के पूर्ववर्त्ती मंत्री राजनाथ सिंह अपना मंत्रालय कवर कर रहे पत्रकारों से शायद ही कभी मिलते थे, लिहाजा कई बार मंत्रालय की खबरों को लेकर अखबारनवीसों को अंधेरे में तीर चलाने पड़ते थे।

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क्या प्रिंयका को मिल सकती है कमान?

Posted on 23 July 2019 by admin

कांग्रेसी नेत्री प्रियंका गांधी की हालिया सियासी सक्रियता जैसे कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। सूत्रों की मानें तो भाई राहुल के सियासी अनमनेपन से उपजे शून्य को भरने के लिए वह तैयार बताई जा रही हैं। कांग्रेसी नेताओं का एक बड़ा वर्ग भी प्रियंका को आगे करने का पक्षधर बताया जा रहा है, इन नेताओं का मानना है कि प्रियंका में वह काबिलियत है जो राहुल की गलतियों को ढंक लेगी। नहीं तो इस वक्त पुराने कांग्रेसी मुकुल वासनिक को अंतरिम अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चा है। प्रियंका समर्थकों को ऐसा लगता है कि वासनिक को आगे लाने से बात बनने वाली नहीं है, क्योंकि आने वाले कुछ महीनों में महराष्ट्र, झारखंड व हरियाणा में विधानसभा चुनाव होने हैं, जिसमें कांग्रेस को अपना अस्तित्व बचाने की लड़ाई लड़नी ही होगी। कयासों के बाजार को गर्म रखती प्रियंका ने इन दिनों ट्विटर पर अपनी सक्रियता काफी बढ़ा ली है। बीते दिनों प्रियंका ने साऊथ अफ्रीका के लोकप्रिय जननेता नेल्सन मंडेला को याद करते हुए एक ट्वीट किया जिसमें प्रियंका की मंडेला के साथ तस्वीर थी, प्रियंका ने इस बात का भी जिक्र किया कि मंडेला ने ही उन्हें बहुत पहले राजनीति में आने के लिए प्रेरित किया था। प्रियंका की राजनीति राहुल से किंचित अलहदा है, उनकी कार्यशैली भी अलग है। जैसे हिंदी और अंग्रेजी में वह अपने ट्वीट खुद करती हैं। राहुल ने इसके लिए बकायदा एक टीम रखी हुई है। इस एक्सपर्ट टीम के ट्वीट को राहुल मंजूरी देते हैं तब यह पोस्ट होता है। कांग्रेस का नेतृत्व बदलेगा तो इसके चेहरे-मोहरे को बदलने की कवायद भी शुरू होगी।

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बदले-बदले से सरकार नज़र आते हैं

Posted on 23 July 2019 by admin

वे भगवा नेतागण जो मोदी सरकार-1 में तो मंत्री थे, पर इसके अगले संस्करण 2.0 में मंत्री पद पाने से चूक गए अब भी वे इसके कारणों की पड़ताल में जुटे हैं। ऐसे नेतागण अब संसद में भी पहले से कहीं ज्यादा सक्रिय दिख रहे हैं जिससे किसी भी भांति वे प्रधानमंत्री की नज़रों में आ सकें। ताजा मामला पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय गोयल का है जो इन दिनों हर छोटे-बड़े मुद्दे पर काफी सक्रियता दिखा रहे हैं, पिछले कुछ दिनों से गोयल दिल्ली के लोगों की दुख तकलीफों को स्वर देते आए हैं। सूत्रों की मानें तो विजय गोयल की योजना पूर्व प्रधानमंत्री और भाजपा के शिल्पी अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन कर्म पर एक फोटो प्रदर्शनी लगाने की है, इसके लिए संसद के पिछले सत्र में वे खासा एक्टिव भी दिखे। भाजपा और संसद कवर कर रहे छायाकारों से गोयल नियमित तौर पर मिल रहे हैं और उनसे अटल जी की दुर्लभ तस्वीरें शेयर करने का अनुरोध भी कर रहे हैं और इस हेतु उन्हें अच्छा-खासा पारिश्रमिक देने का भी वादा कर रहे हैं। गोयल की मीडिया वालों से पहले से ही काफी बनती है, सो, फोटोग्राफर भी उनकी इस भगीरथ योजना में बढ़-चढ़ कर मदद कर रहे हैं। पूर्व संस्कृति मंत्री महेश शर्मा भी इशारों-इशारों में अपने चंद मुंहलगे पत्रकारों से कह रहे हैं कि उन्हें जल्द ही कोई महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने जा रही है। चौधरी बीरेंद्र सिंह पीएमओ कवर करने वाले पत्रकारों से अपना हालेदिल शेयर कर रहे हैं और उनसे यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिरकार इस बार उनका पत्ता क्यों कट गया। राज्यवर्धन सिंह राठौर को संसद भवन के ’स्वच्छता अभियान’ के दौरान माननीय स्पीकर के आगे-पीछे कदमताल करते देखा जा सकता था। दरअसल, राठौर को सूत्रों के हवाले से यह जानकारी प्राप्त हुई है कि उनके पिछले मंत्रित्वकाल में पीएमओ के निर्देशों की अनदेखी की ही उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ी है और कुछ मामला उनकी इमेज से भी जुड़ा है। राजीव प्रताप रूढ़ी और अनुप्रिया पटेल जैसे पूर्व मंत्रियों की बैचेनी और उनकी अति सक्रियता भी कुछ ऐसी ही कहानियां बयां कर रहे हैं।

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मुलायमवादी अमरप्रेम पर चढ़ा भगवा मुलम्मा

Posted on 23 July 2019 by admin

अपनी सियासी उड़ान को नया आसमां मुयस्सर कराने में सिद्दहस्त अमर सिंह की भाजपा से नजदीकियां कोई छुपी बात नहीं है। विश्वस्त सूत्रों के दावों पर अगर यकीन किया जाए तो नीरज शेखर के पद्चिन्हों पर चलते यह ठाकुर नेता भी सपा को एक जोर का झटका धीरे से दे सकते हैं। सुना जा रहा है कि इसकी पटकथा पहले ही लिखी जा चुकी है बस मंच से पर्दा उठना बाकी है। अमर सिंह की राज्यसभा की सदस्यता की मियाद 2022 तक है, सूत्रों की मानें तो वे अपने सांसद पद से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक भगवा रणनीतिकार सपा के दो अन्य राज्यसभा सांसद सुरेन्द्र नागर और चंद्रपाल सिंह यादव पर भी डोरे डाल रहे हैं। कयास लग रहे हैं कि बसपा के भी कम से कम तीन राज्यसभा सांसद भाजपा के संपर्क में हैं। भाजपा की रणनीति न सिर्फ यूपी में सपा और बसपा को कमजोर करने की है, बल्कि इस रणनीति को अंजाम तक पहुंचा भगवा पार्टी राज्यसभा में बहुमत के पेंच से भी पार पाना चाहती है, इस रणनीति में यह शुमार है कि विपक्षी दलों के राज्यसभा सांसद एक-एक कर राज्यसभा से इस्तीफा दें ताकि इसके चुनाव एक साथ न हो पाएं और ऊपरी सदन में भाजपा विपक्षियों को गिनती के खेल में उलझा सके।

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