Archive | June, 2019

शाह ने नड्डा को दिया अपना कमरा

Posted on 25 June 2019 by admin

जेपी नड्डा भाजपा के नए कार्यकारी अध्यक्ष बन गए हैं,पर चूंकि भाजपा संविधान में इसकी कोई समीचीन व्याख्या उपलब्ध नहीं, सो काफी समय तक नड्डा को अपने नए दफ्तर के लिए कमरा ही नहीं आबंटित हो पाया। ऐसे में भाजपा अध्यक्ष व देश के गृह मंत्री अमित शाह को अपनी ओर से विशेष पहल करनी पड़ी, तब कहीं जाकर भाजपा के नव नवेले मुख्यालय में कार्यकारी अध्यक्ष के लिए कोई अदद कमरा उपलब्ध हो सका। दरअसल, भाजपा मुख्यालय में भाजपाध्यक्ष शाह को दो कमरे आबंटित थे, एक कमरा ऊपरी तल पर अवस्थित था, जहां बैठ कर शाह अपनी पार्टी का काम-काज निपटाते थे, उन्हें एक और कमरा ग्राउंड फ्लोर पर भी आबंटित था, जहां वे मुलाकातियों से मिलते थे। अपने कार्यकारी अध्यक्ष के लिए फौरन शाह ने अपना ग्राउंड फ्लोर वाला कमरा छोड़ दिया, जिसे आनन-फानन में नड्डा के लिए तैयार किया गया है। इसके तुरंत बाद भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष देशाटन पर निकलने वाले हैं, ताकि पार्टी कार्यकर्ताओं में फिर से एक नए जोश का संचार हो सके। हाल ही में पार्टी के सभी एक्टिव कार्यकर्ताओं की मियाद खत्म कर दी गई है, उन्हें 100 नए मेंबर पार्टी के साथ जोड़ कर फिर से अपनी एक्टिव मेंबरशिप को जिंदा रखना है। नड्डा के देशाटन में इस पूरी प्रक्रिया को एक नई ऊर्जा मिलेगी।

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क्या पीके को अंगूठा दिखा सकती हैं ममता?

Posted on 25 June 2019 by admin

चुनावी जीत का नया सियासी ताना-बाना बुनने में माहिर पीके यानी प्रशांत किशोर इन दिनों भारी डिमांड में हैं और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी उन्हें हाथों-हाथ उठाया था, और इसके एवज में एक भारी-भरकम फीस अदा करने का भी वादा हुआ था। पर अब पीके को लेकर दीदी के रवैये में किंचित बदलाव दिखने लगा है। दीदी से जुड़े सूत्रों के दावों पर अगर यकीन किया जाए तो पिछले दिनों दीदी और जगन मोहन रेड्डी के दरम्यान एक लंबी बातचीत हुई, कहते हैं इसी बातचीत में दीदी ने जगन से पीके के बारे में उनका फीडबैक मांगा। जगन ने ममता को बताया कि पीके ने उनके लिए 2 साल तक काम किया, हालांकि उनके काम करने का तरीका सूझबूझ भरा है, वैज्ञानिक है, पर वे अपनी कुछ बातें आपके ऊपर लादने लगते हैं। जैसे चुनाव के छह महीने पहले से वे कहने लगे कि ’आपको नरेंद्र मोदी से अपने संबंध अच्छे करने चाहिए, उनका आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए।’ इसके बाद जगन ने अपनी रणनीति बदलते हुए पीके से कहा कि वह और उनकी टीम बस हैदराबाद में बैठ कर चुनाव को ट्रैक करेगी और अपना फीडबैक देगी, जमीनी स्तर पर अपना चुनावी कैंपेन जगन अपनी बहन की मदद से हेंडिल करेंगे। जगन ने दीदी से बताया कि इसके बाद चुनाव के वांछित नतीजे आए। सूत्रों की मानें तो इसके फौरन बाद दीदी ने अपने भतीजे अभिषेक को तलब किया, जो पीके को उनके पास लेकर आए थे। सूत्रों के मुताबिक दीदी ने अभिषेक से कहा कि ’वे टेक्नोलॉजी का पार्ट पीके के जिम्मे भले ही कर दें पर विधानसभा का आने वाला चुनाव वह अपने तरीके से लड़ेंगीं, जमीन पर रह कर लड़ेंगी।’ अब पीके से बात करने की बारी अभिशेक की थी।

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योग दिवस को भेंट

Posted on 25 June 2019 by admin

लगता है केंद्रीय आयुष मंत्रालय ने अपना सारा बजट 21 जून के योग दिवस को समर्पित कर दिया है। विश्वस्त सूत्रों की मानें तो आयुष मंत्रालय के सौजन्य से 20 करोड़ टी-शर्ट और लगभग इतनी ही बड़ी संख्या में यानी 20 करोड़ योगा मैट खरीदे गए। पिछले बार की तुलना में इस दफे योगा मैट रबड़ का न होकर खादी का था। माना जा रहा है कि केंद्रीय खादी बोर्ड से 235 रूपए प्रति मैट की कीमत पर खरीदा गया था, अब आप सहज अनुमान लगा सकते हैं कि केवल टी-शर्ट और योगा मैट पर ही कितने पैसे खर्च हो गए होंगे, आयोजन राशि तो इससे अलग ही होगी।

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जब प्रणबदा से मिले राहुल

Posted on 25 June 2019 by admin

हालिया दिनों में लंदन की फ्लाइट पकड़ने से एक दिन पहले राहुल गांधी यूं अचानक पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मिलने दिल्ली स्थित उनके सरकारी आवास पर जा पहुंचे। कहते हैं राहुल ने प्रणबदा से बीते लोकसभा चुनावों के बारे में विस्तार से बातें की और उनसे यह भी जानना चाहा कि कांग्रेस पार्टी ने उन्हें इतना कुछ दिया है, पर वे मोदी को इतना पसंद क्यों करते हैं? जवाब में मुस्कुराते हुए प्रणबदा ने कहा-’चूंकि पीएम मोदी उन्हें इतना सम्मान देते हैं, बस इसीलिए।’ कहते हैं प्रणब ने राहुल को यह समझाने की भी चेष्टा की और उनसे कहा कि ’यह सोचना भी व्यर्थ है कि ईवीएम के चलते यह अप्रत्याशित नतीजे आए हैं, सो आप कांग्रेस पार्टी को मजबूत करने के लिए दिन-रात एक कर दीजिए, इसके कैडर को मजबूत बनाने में अपना विशेष ध्यान लगाएं।’ सूत्रों का दावा है कि इसके बाद प्रणबदा ने राहुल को एक खास नसीहत दी और कहा कि ’अगर पार्टी लोकसभा में शशि थरूर जैसे किसी को अपना नेता बनाना चाहती है तो इससे सत्तारूढ़ दल को ज्यादा आसानी हो जाएगी। आपको कोई संसद में लड़ने-भिड़ने वाला जुझारू नेता चाहिए और इसके लिए मैं अपनी ओर से अधीर रंजन चौधरी के नाम का सुझाव देता हूं, हालांकि सबको मालूम है कि मैं अधीर को निजी तौर पर पसंद नहीं करता हूं, फिर भी मैं कहूंगा कि मौजूदा दौर के लिए वही सबसे माकूल नाम है, जो तेज-तर्रार है और किसी की भी बोलती बंद करने का हुनर जानता है।’ राहुल ने प्रणबदा को आश्वस्त किया कि वे इस बारे में मां से बात करेंगे। अगले कुछ रोज में अधीर चौधरी के नाम पर सहमति की मुहर लग गई।

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मोदी चल सकते हैं एक बड़ा दांव, 2022 में फिर से लोकसभा चुनाव?

Posted on 25 June 2019 by admin

विपक्षी हौंसलों को चित्त करने की यह सत्ता पक्ष की एक नई कवायद है, ’एक देश, एक चुनाव’ को सिरे चढ़ाते मुमकिन है कि 2022 में एक बार फिर से लोकसभा के चुनाव हो जाए। इतने प्रचंड बहुमत से सत्ता में आने वाले किसी दल के लिए ऐसा फैसला लेना किंचित आसान नहीं होगा। विश्वस्त सूत्रों का दावा है कि 2022 तक 17 राज्यों के चुनाव आने वाले हैं, इस सूची में यूपी जैसे अहम राज्य भी शामिल हैं। मोदी-शाह की रणनीति भाजपा शासित कई राज्यों की सरकारें भंग कर इसके साथ ही चुनाव कराने का इरादा हैं। अगर यह प्रयोग सफल रहा तो 2022 में लोकसभा के साथ-साथ 22-25 राज्यों के चुनाव हो सकते हैं, और ’एक देश, एक चुनाव’ मोदी की यह महत्त्वाकांक्षी योजना भी परवान चढ़ सकती है, स्थितियां नियंत्रण में रहीं तो मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान व कर्नाटक के चुनाव भी इसी के साथ करवाए जा सकते हैं। आगे-आगे देखिए अभी होता है क्या।

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भागवत चले मिडिल-ईस्ट

Posted on 25 June 2019 by admin

संघ प्रमुख मोहन भागवत जल्द ही मध्य-पूर्व देशों की यात्रा पर निकल सकते हैं, विश्वस्त सूत्रों का ऐसा दावा है। कहना न होगा कि हालिया दिनों में देश के मुस्लिमों और इस्लामी देशों के बारे में संघ के रवैये में एक सुविचारित बदलाव देखने को मिला है। पिछले कुछ समय से लगातार संघ इन कोशिशों में जुटा दिखता रहा है कि देश के मुसलमानों की भी उन्हें उतनी ही फिक्र है। सबसे पहले संघ ने अपने एकल विद्यालयों की तर्ज पर मुस्लिम बच्चों की शिक्षा-दीक्षा के लिए आधुनिक मदरसे खोलने की योजना का सूत्रपात किया। कहते हैं इसकी शुरूआत उत्तराखंड से होने वाली है और इसका अगला पड़ाव बिहार हो सकता है। इसके बाद संघ ने अपने एक आनुशांगिक संगठन मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के काम-काज को गति देने का काम किया। इस संगठन के कर्ताधर्ता इंद्रेश कुमार हैं। जिन्होंने हाल में ही अपने संगठन के बैनर तले नई दिल्ली के पार्लियामेंट एनेक्सी में एक ईद मिलन पार्टी रखी थी, जिसमें बड़े पैमाने पर इस्लामी देशों के राजदूतों ने शिरकत की थी। सूत्र बताते हैं कि इसी ईद मिलन पार्टी में भागवत की मिडिल-ईस्ट यात्रा के रोड मैप पर अंतिम मुहर लग गई थी। ईरान-अमेरिका की मौजूदा तनातनी के दौर में संघ प्रमुख की इस मिडिल ईस्ट यात्रा के निहितार्थ कहीं बड़े हो सकते हैं, ऐसे में इसके कूटनीतिक संदर्भों को भी एक व्यापक फलक मिल सकता है।

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भाजपा की रणनीतियों से क्या सीखे विपक्ष

Posted on 04 June 2019 by admin

अगर खामोशियों से भी बतकही जरूरी है तो परास्त विपक्ष के लिए हताशा के सागर में डूबकी लगाने से पहले उन मोतियों को ढूंढ लाना जरूरी है जिसने मोदी-शाह के विजयी साफे की रौनकें बढ़ाई है। इतनी प्रचंड चुनावी विजय के बाद भाजपा अपने उन पृष्ठ प्रमुख और पन्ना प्रमुख को पुरस्कृत करने की योजना बना रही है जिन्होंने अपनी कड़ी मेहनत से ब्रांड मोदी को हिंदुस्तान के घर-घर तक पहुंचा दिया। भाजपा के रणनीतिकारों ने अपने बूथ मैनेजरों को ’24 प्वाइंट एक्शन प्लॉन’ दिया था और उन्हें अपने संबंधित राज्यों में मठों, मंदिरों और आश्रमों के प्रमुखों से मेल-जोल बढ़ाने को कहा गया था। इस काम में पग-पग पर उन्हें संघ कार्यकर्ताओं का भी उतना ही साथ मिला। पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं से ग्राउंड पर काम करने को कहा था और उन्हें यह ताकीद दी गई थी कि जमीनी स्तर पर ब्रांड मोदी के प्रचार के लिए वे सिर्फ पारंपरिक तरीकों का इस्तेमाल करें, मसलन लोगों से मेल-जोल, बातचीत और मोदी सरकार की नीतियों और उपलब्धियों का बखान, साथ ही आम लोगों के दिल में राष्ट्रवाद की जोत भी प्रज्ज्वलित होनी चाहिए। अपने कार्यकर्ताओं की हौंसला अफजाई के लिए स्वयं पीएम अपने नमो ऐप्प का सहारा ले रहे थे, जिससे उनके 1 करोड़ से ज्यादा भाजपा कार्यकर्ता सीधे तौर पर जुड़े थे। सबसे खास बात तो यह कि ये समर्पित कार्यकर्ता अपनी बात सीधे मोदी तक पहुंचा सकते थे। और यह पूरी तैयारी पिछले दो वर्षों से निरंतर चल रही थी। इस पूरी मुहिम में संघ के कार्यकर्तागण भी भाजपा कार्यकर्ताओं के कदम से कदम मिला कर चल रहे थे। सो, मोदी की प्रचंड जीत को अब संघ एक नए भारत के प्रादुर्भाव के तौर पर देख रहा है। संघ विचारक मनमोहन वैद्य ने तो इस बार की मोदी की जीत को हिंदू जीवन षैली और हिंदू विचारों की जीत बता दी और कहा कि यह चुनाव हिंदू आईडोलॉजी और देश को बांटने वाली विचारधाराओं के बीच थी, जिसमें भारत विजयी रहा।

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नई परंपराओं वाला शपथ ग्रहण

Posted on 04 June 2019 by admin

मोदी सरकार के इस शपथ ग्रहण समारोह में पहली बार राजनैतिक परंपराएं तोड़ी गई, नए रस्मों-रिवाज का आगाज़ हुआ। जैसे इस समारोह में शामिल होने के लिए बंगाल के पीड़ित परिवारों को न्यौता भेजा गया। पुलवामा के शहीद जवानों के परिवारों को भी आमंत्रित किया गया। पर राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में आहूत इस विशाल शपथ ग्रहण समारोह में मीडिया बमुश्किल और पुलवामा शहीद के परिवारों तक पहुंच पाया। जिसमें 8 से 10 परिवार बंगाल से थे तो पुलवामा शहीदों का भी एक परिवार बंगाल से ही था। इन परिवारों को दिल्ली के काली बाड़ी मंदिर के गेस्ट हाउस में ठहराया गया था, कुछ सदस्यों को कनॉट प्लेस के पंचतारा पार्क होटल में भी ठहराया गया था। इन परिवारों की देखभाल का पूरा जिम्मा भाजपा के एक ऐसे नेता ने उठा रखा था, जो इस बार अपना चुनाव हार गए थे।

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ममता का मंथन

Posted on 04 June 2019 by admin

ताजा-ताजा भगवा कैजुअल्टी का शिकार हुई ममता बनर्जी अब जमीनी हकीकत के साथ जीना चाहती हैं। पिछले दिनों कोलकाता में उन्होंने अपने पार्टी नेताओं के साथ तृणमूल के गिरते ग्राफ और पश्चिम बंगाल में भाजपा के नए प्रादुर्भाव पर विस्तार से चर्चा की। और इस मंथन बैठक से तीन प्रमुख बिंदु उभर कर सामने आए। जिसमें पहला है, सांप्रदायिक ध्रुवीकरण। इसके काट के तौर पर ममता ने बंगाली प्राइड को आगे रखने की बात कही है और कहा कि जब भी जय श्री राम के नारे लगे तो जवाब में ’जय बांग्ला’ का नारा दो। दूसरे बिंदु के तौर पर शायद पहली बार ममता को तृणमूल कार्यकर्ताओं की गुंडागर्दी का अहसास हुआ। ममता ने माना कि सीपीएम के गुंडा तत्व उनके कैडर में घुस आए हैं, सो दीदी ने कड़े शब्दों में कहा ’ टोला बाजी (अवैध वसूली) बंद होनी चाहिए। इन टोलाबाजों की वजह से हमारी यह दुर्गत हो रही है।’ दीदी ने इसके साथ पुलिस और राज्य प्रशासन से साफ कह दिया है कि वे इन गुंडा तत्वों से अपने हिसाब से निपटे, इस मामले में दीदी कोई दखल नहीं देगी। तीसरा बिंदु कि राज्य सरकार अपने अच्छे कार्यों को जनता तक नहीं पहुंचा पाई है, इस काम में कैडर उनका साथ दे। ये विचार निःसंदेह अच्छे हैं, पर दीदी के जेहन में बड़ी देर से आए हैं, वह भी जब जब उनका आधा कारवां लुट चुका है।

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सौगत कहां खोए हैं

Posted on 04 June 2019 by admin

तृणमूल ने अपने संसदीय दल की बैठक बुलाई जो तकरीबन दो घंटे चली। यह बैठक इस बात को लेकर बुलाई गई थी कि 17वीं लोकसभा में पार्टी का नेता, उप नेता और चीफ व्हीप कौन होगा? सदन में तृणमूल के नेता के तौर पर आम राय से सुदीप बंधोपाध्याय के नाम पर मुहर लग गई। तब डिप्टी लीडर के तौर पर कल्याण बनर्जी के नाम पर विचार होना शुरू हुआ तो कल्याण बैठक में उठ खड़े हुए और उन्होंने ममता बनर्जी से आग्रह किया कि वे पहले भी सदन में चीफ व्हीप रह चुके हैं, सो उन्हें यही जिम्मेदारी दे दी जाए। तब डिप्टी लीडर के लिए डॉ. काकोली घोष दस्तीवार का नाम सामने आया। अभी यह प्रक्रिया चल ही रही थी कि दीदी के जेहन में सहसा कौंधा कि आखिर सौगत राय कहां हैं? आम तौर पर ऐसी बैठकों में वाचाल रहने वाले राय की चुप्पी ने दीदी को यकबयक सकते में डाल दिया। सबका ध्यान तब एकबारगी सौगत की ओर गया जो पहली बार संसद में पहुंची दो बंगाली अभिनेत्रियों नुसरत जहां और मिमि चक्रवर्ती से घिरे उनसे बातचीत में लीन थे। वैसे भी भाजपा के बड़े नेताओं ने अपनी ई-आर्मी से कहा कि वे बिलावजह इन दोनों सुंदरियों को ट्रॉल न करें।

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