Archive | March, 2019

बेजार हैं शाहनवाज

Posted on 30 March 2019 by admin

भागलपुर सीट जब से गठबंधन धर्म के तहत जदयू के पाले में चली गई है, भाजपा के बड़बोले नेता शाहनवाज हुसैन के बैचेनियां नित्य नए करवटें ले रही है। पूरे 5 साल उन्होंने भागलपुर में काम किया, टिकट मिलने की आस में बैनर, पोस्टर तक लगवा दिए, यहां तक कि बड़ी तादाद में टोपियां भी बनवा ली। टोपी के एक तरफ मोदी तो दूसरी ओर शाहनवाज के चित्र लगे थे। वहीं भाजपा से जुड़े सूत्र खुलासा करते हैं कि भाजपा हाईकमान को ऐसा लगता है कि उन्होंने जिस सीट पर भी मुस्लिम प्रत्याशी उतारे उन्हें हार का ही सामना करना पड़ा। जैसे पिछले चुनाव में भगवा पार्टी ने सात मुस्लिम उम्मीदवार उतारे थे, 3 जम्मू-कश्मीर, 2 पश्चिम बंगाल, 1 लक्षदीव और 1 बिहार (भागलपुर) इन सभी सीटों पर भाजपा को हार का मुंह देखना पड़ा। उप चुनाव में भी सचिन पायलट के खिलाफ यूनूस खान को उतारा गया वहां भी भाजपा को पराजय का घूंट पीना पड़ा।

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शेषन की राह पर अरोड़ा

Posted on 30 March 2019 by admin

क्या चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा अगले टीएन शेषन बनने की राह पर हैं? सूत्र बताते हैं कि किसी बात को लेकर उनकी प्रधानमंत्री कार्यालय के पीके मिश्रा से ठन गई है। सूत्रों की मानें तो मिश्रा की बातों से अरोड़ा को ऐसा लगा जैसे वे उन्हें कोई टर्म डिक्टेट कर रहे हैं। सो, लगता है अब चुनाव आयुक्त ने भी ठान लिया है कि सरकार को इस बात का इल्म करा दें कि चुनाव आयुक्त की क्या ताकत होती है। सो, वे वीवीपैट के इस्तेमाल को लेकर ज्यादा सजग और चैकस हो गए हैं। सूत्रों के दावों पर अगर यकीन किया जाए तो आगामी लोकसभा चुनाव में कम से कम आधी सीटों पर यकीनन वीवीपैट का इस्तेमाल हो सकता है।

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अमेठी की रानी ईरानी

Posted on 30 March 2019 by admin

अमेठी से भाजपा ने अपने तुरूप के इक्के स्मृति ईरानी को मैदान में उतार कर राहुल गांधी को उनके गढ़ में ही घेरने की व्यूह रचना बनाई है। भाजपा की रणनीति है कि स्मृति के मार्फत राहुल को यहां ऐसे घेरा जाए कि वे अमेठी से बाहर निकलने की कम ही सोच सकें। और खास कर ऐसे वक्त में जबकि बसपा ने भी यूपी में महागठबंधन की भावनाओं को धता बताते हुए अमेठी से अपना उम्मीदवार उतारने को ऐलान कर दिया हो। ऐसे में कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं की राय है कि राहुल को कर्नाटक की किसी सीट से चुनाव लड़ना चाहिए, क्योंकि गांधी परिवार के ’कम बैक’ के लिए कर्नाटक का संसदीय इतिहास अब तक सबसे मुफीद रहा है। इंदिरा गांधी की वापसी भी चिकमगलूर से हुई तो सोनिया गांधी जब बेल्लारी जीत कर आई तो कांग्रेस को मजबूती मिली। वहीं राहुल गांधी दो सीटों से चुनाव लड़ने के आइडिया के खिलाफ बताए जाते हैं, उनका मानना है कि दो सीटों से चुनाव लड़ना समय और पैसों की बर्बादी है।

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भगवा साए में माया

Posted on 30 March 2019 by admin

मायावती इन दिनों किंचित हैरान-परेशान हैं, मोदी सरकार की तल्ख नीतियों ने बहिनजी को अपनी रणनीतियां बदलने को मजबूर कर दिया है। उनके निजी सचिव रहे नेतराम पर जांच एजेंसियों की सख्ती बढ़ती जा रही है, सूत्र बताते हैं कि अकेले नेतराम के 200 करोड़ से ज्यादा की संपत्तियां अटैच्च कर ली गई है। माया के भाई आनंद पर भी ईडी का शिकंजा कसता जा रहा है, जिसने माया को घुटनों के बल ला दिया है। शायद इसी दबाव की वजह से बहिनजी ने आनन-फानन में यह ऐलान कर दिया है कि कांग्रेस इस महागठबंधन का हिस्सा नहीं होगी और उसके साथ सीटों के हिसाब से भी कोई गठबंधन नहीं होगा। जब माया ने अखिलेश को अपना फरमान सुनाते हुए कहा कि अब कांग्रेस के साथ कोई समझौता नहीं होगा और हम अमेठी व रायबरेली में भी अपने उम्मीदवार उतारेंगे, तो कहते हैं अखिलेश ने बहिनजी से आग्रह किया कि 15 दिन का वक्त दे दीजिए, समय के साथ चीजें ठीक हो जाएंगी। पर माया नहीं मानीं। माया ने जैसे ही कांग्रेस के साथ नहीं जाने का ऐलान किया तो पार्टी कैडर में एक तरह से अघोषित संदेश चला गया कि चुनावी नतीजों के बाद माया भाजपा का दामन थाम सकती हैं। वैसे भी बसपा कैडर में इन दिनों मोदी की लोकप्रियता में इजाफा हुआ है, बसपा कैडर यह सोच रहा है कि मोदी राज में जो ऊंची जातियों के घरों में है जैसे बिजली और टॉयलेट अब वह हमारे भी पास है। वैसे भी सपा-बसपा गठबंधन में माया ने सियासी चातुर्य दिखाते हुए, शहरी सीटें सपा के मत्थे मढ़ दी हैं, जहां भाजपा का गढ़ है, जहां वह मजबूत है।

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सिंधिया का गुना भाग

Posted on 30 March 2019 by admin

ज्योतिरादित्य सिंधिया भले ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रभारी हों, पर इन दिनों उनका सारा ध्यान मध्य प्रदेश पर केंद्रित है वहीं उत्तर प्रदेश के पहले चरण के मतदान वाले सीटों पर वे ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। ज्योतिरादित्य अब भी एमपी में उलझे हैं, वे चाहते हैं कि ग्वालियर सीट से कांग्रेस उनकी पत्नी प्रियदर्शनी को टिकट दें जिससे कि ग्वालियर और गुना इन दोनों सीटों पर सिंधिया परिवार का कब्जा रहे और उनके कद में भी इजाफा हो। पिछले चुनाव में मोदी लहर के बावजूद नरेंद्र सिंह तोमर यहां से मात्र 29 हजार वोटों से जीते थे। पर इस पूरे उपक्रम में दिक्कत यह है कि प्रियंका गांधी जब भी यूपी के नेताओं के साथ बैठक करती है तो वह पार्टी दफ्तर के बजाए सिंधिया के दिल्ली स्थित निवास पर करती है, तो ऐसे में मजबूरन सिंधिया को उन बैठकों में मौजूद रहना पड़ता है। मध्य प्रदेश में अभी भी सिंधिया और कमलनाथ के बीच तनातनी कम नहीं हुई है, पिछले मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान कमलनाथ ने मात्र 70 रैलियां की थी और सिंधिया ने 132, पर सीएम की कुर्सी कमलनाथ को मिल गई। वहीं अमित शाह ने भी साफ कर दिया है कि इस दफे गुना, छिंदवाड़ा और झाबुआ सीट हर हाल में जीतनी है। योगी सरकार में ऊर्जा व परिवहन मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह को गुना की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

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…और अंत में

Posted on 30 March 2019 by admin

पश्चिमी बंगाल में सात चरणों में मतदान है, तिथियों के ऐलान के साथ ममता ने अपने विरोध के तेवर दिखाए, अब इसका एडवांटेज लेने में जुट गई हैं। दीदी ने 12 संसदीय सीटों को चिन्हित किया है जहां कड़ा मुकाबला हो सकता है, जैसे मालदा, आसनसोल, मुर्शिदाबाद आदि। दीदी अब हर ऐसी सीट पर 3-4 दिल लगा रही हैं ताकि पासा पलटा जा सके।
(एनटीआई-gossipguru.in)

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गांधीनगर में अब होगी शाहगीरी

Posted on 30 March 2019 by admin

बापू की नगरी गांधीनगर को भगवा पार्टी ने तोहफे में एक नया शाह बख्शा है अमित शाह, जिनकी शाहगीरी सियासी हलकों में जानी पहचानी है। गांधीनगर से उनकी उम्मीदवारी पर सस्पेंस अंत समय तक बना रहा, यहां तक कि पहले से तय भाजपा की प्रेस कांफ्रेंस की मियाद भी 15 मिनट आगे खिसकानी पड़ी। भाजपा से जुड़े सूत्रों के दावों पर अगर यकीन किया जाए तो गांधीनगर सीट पर सबसे मजबूत दावा प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल की पुत्री अनार पटेल का था। कहते हैं अनार को एक तरह से पीएम मोदी का ’गो अहेड’ मिला हुआ था। इसीलिए वह पिछले डेढ़-दो सालों से गांधीनगर में अपने एनजीओ के मार्फत सक्रिय थीं। इस दफे भी टिकट की घोशणा होने से पूर्व भाजपा हाईकमान की ओर से तीन ऑब्जर्वर गांधीनगर संसदीय सीट को रवाना किए गए थे और कहते हैं कि इसमें से दो ऑब्जर्वर ने अपनी रिपोर्ट अनार के पक्ष में दी थी जबकि एक ऑब्जर्वर की राय शाह के पक्ष में बताई जा रही थी। यहां तक कि गांधीनगर संसदीय सीट से ज्यादातर भाजपा विधायक भी अनार के पक्ष में कदमताल करते दिखे। आखिरी वक्त पर अध्यक्ष जी की कीर्तनमंडली ने एक तुर्रा उछाला कि चूंकि यह भाजपा के लौहपुरूष अडवानी की सीट रही है सो, यहां से पार्टी के किसी ’राष्ट्रीय छवि’ वाले नेता को चुनाव लड़वाना चाहिए और शाह ने यहां से अपना दावा ठोक दिया। केंद्र में पुनः यदि मोदी सरकार बनती है तो तो राजनाथ सिंह की मुश्किलें बढ़ सकती हैं क्योंकि नंबर दो (गृह मंत्री) का दावा अमित शाह का हो सकता है। वैसे भी राजनाथ सिंह को हटा कर ही अमित शाह अध्यक्ष बने थे।

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शाह की वाह में

Posted on 30 March 2019 by admin

अमित शाह भी अब अपने मेंटर नरेंद्र मोदी के नक्षे कदम पर चल पड़े हैं, मोदी के स्वप्रचार शैली से अभिभूत शाह भी अब अपने लिए भी वैसे ही छद्म रचने लगे हैं। सूत्र बताते हैं कि एक बड़े विदेशी प्रकाशन समूह ने शाह की बॉयोग्राफी छापने का जिम्मा उठाया है, इस समूह का एक दफ्तर दिल्ली में भी है। अभी पिछले दिनों इस प्रकाशन समूह की टीम शाह से मिलने पहुंची थी और इस बॉयोग्राफी का ब्लू प्रिंट उनसे अप्रूव भी करा लिया है। सूत्रों की मानें तो लकदक सज्जा से लबरेज यह बॉयोग्राफी अगले दो-तीन महीनों में बाजार में आ सकती है। सूत्रों का यह भी कहना है कि इस बॉयोग्राफी को आधार बनाकर बॉलीवुड के एक नामचीन डायरेक्टर-प्रोड्यूसर एक बड़ी फिल्म बनाने का भी इरादा रखते हैं। स्टेज सेट है, बस नतीजों से पर्दा उठना बाकी है।

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मंदिर पर मध्यस्थ क्यों नहीं रास आ रहे संघ को?

Posted on 18 March 2019 by admin

अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में गठित 3 सदस्यीय कमेटी के प्रारूप से संघ की भवें तन गई है। सूत्रों की मानें तो संघ को इस कमेटी के गठन का फार्मूला ही रास नहीं आ रहा है, वहीं इस कमेटी में श्री श्री रविशंकर को शामिल किए जाने के फैसले से भी संघ खुश नहीं बताया जाता है। संघ के सूत्रधारों को ऐसा लगता है कि अयोध्या मामले की मध्यस्थता में अपनी भूमिका सुनिश्चित करवाने के लिए श्री श्री के लिए अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाया गया है। और अंतरराष्ट्रीय सर्किट में अपनी ऊंचे रसूख का इस्तेमाल कर श्री श्री ने अपने लिए यह पटकथा लिखवाई है। संघ को कहीं न कहीं यह भी लगता है कि मध्यस्थता के तमाम ऐसे प्रयास केवल मंदिर निर्माण की मियाद को आगे ले जाने की कवायद भर हैं। इससे कुछ हासिल होने वाला नहीं। संघ को इस बात का बखूबी इल्म है कि मोदी चाहते थे कि इस मुद्दे पर पहले सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ जाए। नहीं तो मोदी के लिए भी यह एक आखिरी विकल्प है कि इस मुद्दे पर वे संसद में कानून बनाने की पहल करें। सूत्रों की मानें तो वैसे भी अयोध्या में मंदिर निर्माण का उपक्रम दिन-रात चल रहा है। मंदिर में जो पत्थर लगाए जाने हैं बकायदा उन्हें पेंट द्वारा नंबर डाल कर चिन्हित किया जा रहा है। नक्षा तो पहले से तैयार है, यानी देश का जनमत चाहे जो बोले, संघ और उनके आनुशांगिक संगठन मंदिर वहीं बना कर मानेंगे।

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इस चुनाव में पत्रकारों की चांदी

Posted on 18 March 2019 by admin

तमाम राजनैतिक दलों को जब से ऐसा लगने लगा है कि सोशल मीडिया किसी उम्मीदवार की हार-जीत में एक निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं, तो उनके मैन्यू में सोशल मीडिया की पूछ और बढ़ गई है। चुनावी रणनीतिकारों को यह भी लगता है कि ’फ्लोटिंग वोटरों’ का रूख तय करने में सोशल मीडिया की एक महती भूमिका है तो वे इस मीडिया को प्रभावित करने वाले लोगों की शिनाख्त में जुट गए। ऐसे में कई नामी-गिरामी और नाम धन्य पत्रकारों की चांदी हो गई है। कई अलग-अलग राजनैतिक दल ऐसे पत्रकारों को उनके फेसबुक-इंस्टाग्राम पोस्ट और अपने पक्ष किए गए या कराए गए ट्वीट की एक मोटी रकम अदा कर रहे हैं। भाजपा इस कवायद में सबसे आगे बताई जा रही है। इस बात के भी दाम तय है कि एक ट्वीट के कितने रिट्वीट हो रहे हैं। जिन पत्रकारों के फॉलोअर्स की संख्या लाखों में है, उनके पोस्ट या ट्वीट की कीमत भी उसी अनुपात में तय हैं। पर इस पूरी प्रक्रिया में कैश का लेन-देन सबसे ज्यादा हो रहा है। विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि अकेले भाजपा के सोशल मीडिया सेल से 5 हजार से ज्यादा लोग सीधे तौर पर जुड़े हैं। क्षेत्रीय भाषाओं के पत्रकारों पर भी राजनैतिक दलों की अनुकंपाएं बरस रही है। देश में भले ही कुल मतदाताओं की संख्या 90 करोड़ के आसपास है, पर यह देखते हुए कि इसमें से मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग स्मार्ट फोन से सीधा जुड़ा है, सो सोशल मीडिया की पूछ और बढ़ गई है।

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