Archive | February, 2019

तमिलनाडु में कास्ट कार्ड

Posted on 25 February 2019 by admin

तमिलनाडु में भले ही भाजपा और अन्नाद्रमुक के बीच गठबंधन ने एक मुकम्मल शक्ल पा ली हो, पर राज्य की राजनीति में संभवतः यह पहला ऐसा चुनाव होगा जो चेहरों पर नहीं लड़ा जा रहा। जयललिता, करूणानिधि जैसे बड़े सूरमाओं के निधन के बाद कोई ऐसा बड़ा चेहरा उभरकर सामने नहीं आ पाया है। करूणानिधि के पुत्र स्टालिन भले ही अपने पार्टी कैडर में लोकप्रिय हों, पर आम जनता में उनकी लोकप्रियता का पैमाना अपने पिता के आसपास भी नहीं है, चुनांचे इस दफे के चुनाव में तमिलनाडु के सभी छोटे-बड़े दल जातीय कार्ड खेलने का इरादा रखते हैं। भाजपा और अन्नाद्रमुक का जो गठबंधन बना है उसमें पीएमके ने अपनी डिमांड बढ़ाते हुए 7 सीटें झटक ली हैं, पहले पीएमके को महज़ 3 सीटें दी जानी थी। सूत्रों की मानें तो तमिलनाडु में भाजपा अपना सारा दांव वहां के ब्राह्मण वोटों पर लगा रही है, हिंदू नाडर जाति के वोटों पर भी उसकी नज़र है। अन्नाद्रमुक को पश्चिम क्षेत्र में थेवर जाति का काफी सपोर्ट मिल रहा है। पीएमके का उत्तरी तमिलनाडु में अच्छा असर है, वन्नियार वोट बैंक में उसकी अच्छी पैठ है। वहीं दिनाकरण का भी थेवर जाति में असर है, मदुरे के क्षेत्र में उनके समर्थकों की खासी तादाद है। पीएमके के पास रामदौस के रूप में एक बड़ा चेहरा है। सो, कहना न होगा कि इस दफे तमिलनाडु की चुनावी लड़ाई एक दिलचस्प मुकाम पर पहुंच गई है।

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राज्यसभा में आ सकते हैं सिंधिया

Posted on 25 February 2019 by admin

चुनाव की इस पूर्व बेला में मध्य प्रदेश से एक बड़ी खबर आ रही है। कांग्रेस से जुड़े उच्च पदस्थ सू़त्रों का दावा है कि इस दफे के चुनाव में मध्य प्रदेश की गुना सीट से ज्योतिरादित्य सिंधिया की पत्नी प्रियदर्शिनी राजे सिंधिया को मैदान में उतारा जा सकता है। राहुल चाहते हैं कि ज्योतिरादित्य ज्यादा से ज्यादा वक्त पार्टी और चुनाव को दें, संभवतः उन्हें मध्य प्रदेश से राज्यसभा में लाया जा सकता है। पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ जब से उन्हें पश्चिमी उत्तर प्रदेश की नई जिम्मेदारी मिली है कांग्रेस में उनका कद अनायास ही काफी बढ़ गया है। कमलनाथ और ज्योतिरादित्य के बीच छिड़े अघोषित जंग से निजात पाने के लिए ही संभवतः राहुल सिंधिया को मध्य प्रदेश से यूपी लेकर आए हैं। सूत्रों की मानें तो सिंधिया आए दिन राहुल के पास अपनी शिकायतों का पिटारा लेकर पहुंचते थे कि कमलनाथ कैसे राज्य में उनके लोगों की अनदेखी कर रहे हैं। राज्य में नई नियुक्तियों को लेकर भी सिंधिया और कमलनाथ के बीच तलवारें तनी थीं। सो, राहुल ने सिंधिया को यूपी लाकर एक बड़ा दांव चला है।

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गहलोत बनाम पायलट

Posted on 25 February 2019 by admin

कांग्रेस शासित एक और प्रदेश राजस्थान में भी वहां के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच सब ठीक-ठाक नहीं चल रहा है। यह तनातनी लोकसभा के लिए टिकटों के वितरण में भी साफ-साफ दिख रही है। पायलट समर्थक लगातार यह आरोप लगा रहे हैं कि राजस्थान में लोकसभा के टिकट वितरण में उनकी अनदेखी हो रही है। सूत्रों की मानें तो पिछले दिनों सचिन पायलट ने अपने कैंप के इन तमाम टिकट के दावेदारों को अपने घर भोजन पर आमंत्रित किया। कहते हैं उसमें यह रणनीति बनी है कि पहले टिकट पर अपना दावा तेज करो, फिर राहुल जी से बात की जाएगी और अगर उससे भी बात नहीं बनी तो फिर तो अपनी ताकत का प्रदर्षन तो करना ही होगा।

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नए सितारों की तलाश में ममता

Posted on 25 February 2019 by admin

टॉलीवुड के स्टार पावर के सियासी मंथन का हुनर कोई ममता बनर्जी से सीखे। पिछले कुछ चुनावों में उन्होंने बंगाला फिल्म इंडस्ट्री ’टॉलीवुड’ के कई चमकते सितारों को अपना मुरीद बना लिया। थोकभाव में उन्हें चुनावी मैदान में उतारा और उसमें से ज्यादातर जीत कर दिल्ली और कोलकाता में अपनी सियासी चमक बिखेरगे लगे। बंगाली फिल्मों के सुपर स्टार देव ने दीदी से मिलकर इस बार चुनाव लड़ने में अपनी अनिच्छा जताई है, लोकसभा का पिछला चुनाव वे बेहद आसानी से जीत गए थे, पर एक सांसद के तौर पर लोगों की अपेक्षाओं पर खरा उतरना उनके लिए किंचित आसान नहीं रहा। सो, ऐसे समय में जबकि भाजपा ’टॉलीवुड’ के कई चमकते-दमकते सितारों के साथ मैदान में उतरने की तैयारी में है। दीदी ने भी एक बदली भाव-भंगिमाओं के साथ कई नए चेहरों पर दांव लगाने की ठानी है। दीदी की लिस्ट में जो नए चेहरे बताए जा रहे हैं उसमें बंगाली सिनेमा की खूबसूरत अभिनेत्री नुसरत जहां का नाम भी शामिल बताया जा रहा है। नुसरत दीदी के सांसद भतीजे अभिषेक बनर्जी की भी करीबी बताई जाती हैं। नुसरत के अलावा दीदी जून मलीहा और सोहम चक्रवर्ती पर भी भरोसा कर सकती हैं। इंद्राणी हलदर का भी नाम चर्चा में है। टीएमसी से जुड़े सूत्र खुलासा करते हैं कि दीदी ने नुसरत और जून को चुनावी मैदान में उतारने का लगभग मन बना लिया है। वहीं जबकि युवा तृणमूल पार्टी के उपाध्यक्ष सोहम चक्रवर्ती 2016 का पिछला विधानसभा चुनाव बांकुरा जिले के बरजोरा से लड़े थे, पर उस चुनाव में उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा था। पर इस दफे सोहम को दीपक अधिकारी उर्फ देव की संसदीय सीट से मैदान में उतारा जा सकता है।

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अजीत का परिवार वाद

Posted on 25 February 2019 by admin

उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा के गठबंधन में अजीत सिंह की एंट्री के बाद इतना तो तय माना जा रहा है कि अजीत को आबंटित की गई तीनों सीटें उनके परिवार में ही रहेंगी। मुजफ्फरनगर से जहां अजीत सिंह स्वयं चुनाव लड़ना चाहते हैं, उनके पुत्र जयंत चौधरी इस दफे मथुरा के बजाए बागपत से चुनाव लड़ना चाहते हैं। मथुरा की सीट से जयंत अपनी पत्नी चारू सिंह चौधरी को मैदान में उतारना चाहते हैं।

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…और अंत में

Posted on 25 February 2019 by admin

भाजपा के भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे मुहिम पर विपक्षी दल अब निशाना साधने लगे हैं। इनका आरोप है कि सिर्फ उन्हीं नेताओं पर सीबीआई, सीवीसी या ईडी की गाज क्यों गिर रही है जो मोदी-शाह के खिलाफ हैं। नहीं तो बेल्लारी बंधु जनार्दन रेड्डी या जगनमोहन रेड्डी जैसे नेताओं पर जांच की रफ्तार इतनी धीमी क्यों है?
(एनटीआई-gossipguru.in)

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विपक्षी एका की धुरी बनते राहुल

Posted on 25 February 2019 by admin

विपक्षी एका के खटराग को परवान चढ़ाने में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू दिन- रात एक कर रहे हैं, 2014 के लोकसभा चुनाव के वक्त उन्होंने नरेंद्र मोदी को महिमा मंडित करने में अपना जितना वक्त लगाया था, 2019 के आम चुनावों में वे वही रीत राहुल गांधी के साथ दुहरा रहे हैं। इस उपक्रम के तहत नायडू ने विपक्षी एका को एक चेहरा-मोहरा देने के लिए ’कॉमन मिनिमम प्रोग्राम’ बनाने का जिम्मा राहुल को सौंपा है, इस नाते कि राहुल सबसे बड़े विपक्षी दल कांग्रेस के अध्यक्ष हैं। सूत्र बताते हैं कि राहुल से मिलकर नायडू ने साफ कर दिया है कि विपक्षी दलों के लिए ’कॉमन मिनिमम प्रोग्राम’ में इन दो मुद्दों को राहुल सबसे ज्यादा प्राथमिकता दें, ये मुद्दे हैं खेती-किसानी और बेरोजगारी। इस बारे में राहुल से निर्णायक बातचीत के लिए इस 26 फरवरी को चंद्रबाबू एकबारगी पुनः दिल्ली आ रहे हैं। इसीलिए कांग्रेस ने अपनी कार्य समिति की बैठक को भी दो दिन आगे बढ़ा दिया है। पहले सीडब्ल्यूसी की यह बैठक 26 फरवरी को गुजरात में आहूत थी, इसके लिए अब 28 फरवरी की नई तिथि मुकर्रर की गई है। सबसे खास बात तो यह कि विपक्षी एका की इस रफ्तार को नई धार देने के लिए ममता बनर्जी भी 26 को दिल्ली पहुंच रही हैं और उनके भी इस बैठक में मौजूद रहने की संभावनाएं बनी हुई है। कांग्रेस की आम परंपराओं में विपक्षी दलों की संयुक्त बैठकों में कांग्रेस की ओर से अक्सर गुलाम नबी आजाद को इसकी नुमांइदगी के लिए भेजा जाता था, पर बदले घटनाक्रमों में अब स्वयं राहुल इसमें बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं। शरद पवार के डिनर में शामिल होने के लिए इसी वजह से राहुल ने हामी भरी थी और विपक्षी एका के सुर सजाने के लिए ही उन्होंने केजरीवाल के साथ मंच शेयर करने से भी संकोच नहीं किया। कहना न होगा कि राहुल एक बदले अवतार में सामने आए हैं और अब सियासत की धार पर चलने में भी माहिर हो रहे हैं।

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दिल्ली में दोस्ती, आंध्र में लड़ाई

Posted on 25 February 2019 by admin

विपक्षी एका का नया खटराग अलापने वाले चंद्रबाबू नायडू को इस बात का भली-भांति इल्म है कि राहुल के संग दिल्ली में उनकी दोस्ती आंध्र में उनके गले पड़ जाएगी। अब यह साफ हो चुका है कि मोदी को हराने की मिलकर सौगंध खाने वाले चंद्रबाबू और राहुल आंध्र में आमने-सामने की लड़ाई लड़ेंगे। पांच राज्यों के हालिया विधानसभा चुनावों के वक्त चंद्रबाबू ने राहुल से वायदा किया था कि आंध्र में तेदेपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन होगा। इसके लिए बकायदा चंद्रबाबू ने राहुल के समक्ष एक प्लॉन भी रखा था कि तेदेपा 19 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए 4 और विधानसभा की 25 सीटें छोड़ेंगी। पर तेलांगना प्रदेश अध्यक्ष उत्तम रेड्डी राहुल से मिले और उन्हें यह समझाने में कामयाब रहे कि तेलांगना विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की बुरी गत तेदेपा के साथ गठबंधन में रहने की वजह से हुई। कहीं यही हाल आंध्र में भी न हो जाए, क्योंकि इस बार चंद्रबाबू के खिलाफ लोगों में किंचित नाराजगी है, और नायडू के व्यवस्था विरोधी वोटों की कीमत कहीं कांग्रेस को भी न चुकानी पड़ जाए। उत्तम रेड्डी के कहने के बाद राहुल ने आंध्र में एक राज्यव्यापी सर्वेक्षण करवाया, सर्वेक्षण के नतीजों ने राहुल को सचेत किया कि सचमुच आंध्र में इस दफे चंद्रबाबू के खिलाफ जबर्दस्त एंटी इंकंबेंसी लहर चल रही है। चुनांचे उन्होंने नायडू से दो टूक बात कर ली कि आंध्र में तेदेपा और कांग्रेस अलग-अलग और अपने दम पर चुनाव लड़ेगी।

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जांच एजेंसियों के निशाने पर तीन

Posted on 18 February 2019 by admin

जांच एजेंसियों के निशाने पर ऐसे तीन हाई प्रोफाइल लोग हैं, जिन्हें मोदी सरकार इस चुनाव से पहले जेल पहुंचाने का इरादा रखती है। इसमें से पहला नाम गांधी परिवार के दामाद राबर्ट वाड्रा का नाम है। सूत्र बताते हैं कि इनसे इतनी बार पूछताछ हो चुकी है और इनकी संपत्तियों के कई दस्तावेजों को खंगाला जा चुका है। पृष्ठभूमि तैयार है बस उस पर अंतिम इबारत लिखी जानी है। दूसरा नाम कोलकाता के पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार का है जो ममता बनर्जी के बेहद भरोसेमंदों में शुमार होते हैं। सूत्रों की मानें तो जांच एजेंसियों को इस बात का पुख्ता एतबार है कि वह लाल डायरी और पेन ड्राईव जिसमें रोज़वैली और सारदा स्कैम की हर एक दास्तां दर्ज है, उसे कुमार ने अब तक नश्ट नहीं किया है, कहीं छुपा कर रखा है। इसकी बरामदगी के बाद इसकी आंच से ममता को भी दो-चार होना पड़ सकता है। तीसरा और सबसे महत्त्वपूर्ण नाम सीबीआई के पूर्व निदेशक आलोक वर्मा का है, जिन्होंने अपने साहस और साफगोई से मोदी सरकार की नाक में दम कर दिया था।

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वेंकैया के विकल्प की तलाश

Posted on 18 February 2019 by admin

दक्षिण भारत के राज्य भाजपा के लिए असली सिर दर्द बन गए हैं। ले-देकर इन दिनों इन राज्यों में भाजपाध्यक्ष अमित शाह एक्टिव हैं, जो अपनी गुजराती मिश्रित हिंदी से इन प्रदेश के लोगों और नेताओं से संवाद साधने का दुस्साहस कर रहे हैं। दरअसल भाजपा को अपने लिए एक ऐसे नेता की तलाश है जो डीएमके, अन्नाद्रमुक, तेदेपा, टीआरएस और जेडीएस जैसे क्षेत्रीय दलों से संवाद सेतु कायम कर सके। पहले पार्टी के पास वेंकैया नायडू हुआ करते थे जो बखूबी इस कार्य को अंजाम दे देते थे, पर जब से वे देश के उप राष्ट्रपति बने हैं वे खुलकर भाजपा के पक्ष में सियासी कवायद नहीं कर सकते हैं। पिछली दफे जब वे द्रमुक प्रमुख स्टालिन से मिलने चैन्नई जा पहुंचे थे तो कई तमिल अखबारों में यह सुर्खियां बन गई थी। जब कि स्वयं स्टालिन वेंकैया से मिलने चैन्नई के एक होटल में पहुंचे थे। सूत्रों की मानें तो ऐसे किसी दक्षिण भारतीय नेता को ढूंढने और उन्हें तैयार करने का जिम्मा भी उन्हें सौंप दिया गया है।

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