Archive | January, 2019

जल्दबाजी में क्यों आईं प्रियंका ?

Posted on 29 January 2019 by admin

यूं तो यह तय था कि 19 के आम चुनावों से पहले प्रियंका गांधी पार्टी की सक्रिय राजनीति में उतरेंगी और उन्हें पार्टी महासचिव बनाकर यूपी का प्रभार सौंपा जाएगा। कांग्रेस से जुड़े सूत्रों के दावों पर अगर यकीन किया जाए तो प्रियंका के लिए 1 फरवरी की तारीख मुकर्रर की गई थी। जब राहुल ने प्रियंका को पार्टी महासचिव बनाने की घोषणा की तब वह अपनी बेटी का इलाज करवाने अमेरिका गई हुई थीं। यूपी के प्रभारी गुलाब नबी आजाद ने उस रोज सुबह 4 बजे की फ्लाईट लखनऊ के लिए पकड़ी थी, जहां उनकी आधा दर्जन से ज्यादा मीटिंग पहले से तय थी। गुलाम नबी को इस बात का जरा भी इल्म नहीं था कि आज क्या होने वाला है। उसी रोज राहुल का अमेठी का हाईप्रोफाइल दौरा भी पहले से तय था। उसी शाम राजा भैया और शिवपाल यादव की एक अहम मुलाकात होने वाली थी कि वे कांग्रेस के साथ अपने गठबंधन की पींगों को कैसे आगे बढ़ाएं। प्रतापगढ़, सुल्तानपुर और अमेठी में राजा भैया का अच्छा असर है, इस एवज में वे कांग्रेस से 4 सीटों की मांग करने वाले थे और उन्हें उम्मीद थी कि वे कांग्रेस से दो सीटें झटकने में अवश्य कामयाब हो जाएंगे। ऐसे में प्रियंका गांधी की राजनीति में आने की या उन्हें राजनीति में लाने की घोषणा बेहद चौंकाने वाली है, बेहद भरोसेमंद सूत्र बताते हैं कि गांधी परिवार को इस बात की पुख्ता जानकारी मिली थी कि अगले रोज प्रियंका के पति रॉबर्ट वाड्रा को गिरफ्तार करने की केंद्र सरकार ने पूरी तैयारी कर ली है। कहते हैं बस इसी को चेक-बैलेंस करने के लिए आनन-फानन में प्रियंका को सक्रिय सियासत के अखाड़े में उतारा गया।

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चमकते सितारों पर भगवा भरोसा का नया फलसफ़ा

Posted on 29 January 2019 by admin

जनता के बदलते मिजाज को परखने और उसे वोट की कसौटी पर कसने के लिए न्यूज चैनलों पर ओपिनियन पोल की बाढ़ आ गई है। सियासी गहराईयों को नापने वाले ये हरकारे चीख-चीख कर जो कह रहे हैं वह सत्ताधारी दल को विचलित करने के लिए काफी है। भाजपा के लिए 70-80 सीटों के नुकसान की बात कही जा रही है। सो भाजपा शीर्ष ने अब तय कर लिया है कि 2019 की रेस में सिर्फ जिताऊ चेहरों पर ही दांव लगाया जाएगा। अब भगवा खेमे ऐसे सितारों की तलाश में जुट गया है जो 19 के चुनाव में अपनी चमक बरकरार रख सके। नई दिल्ली से अगर यशवंत सिन्हा आप या कांग्रेस के टिकट पर मैदान में उतरते हैं तो भाजपा के घोषित चाणक्य अमित शाह ने उन्हें हराने का पुख्ता इंतजाम कर रखा है, शाह सिन्हा के खिलाफ बॉलीवुड सितारे अक्षय कुमार को मैदान में उतार सकते हैं। सन्नी देयोल को पंजाब के गुरदासपुर से तो माधुरी दीक्षित को पुणे संसदीय सीट से मैदान में उतारा जा सकता है। मोदी को प्रधानमंत्री पद की लोकप्रियता में चुनौती देने में राहुल के बाद अगर किसी का नंबर लगा है तो वह तृणमूल नेत्री ममता बनर्जी हैं। ममता ने अगर इस दफे लोकसभा चुनाव लड़ने का मन बनाया तो उन्हें चुनौती देने के लिए बंगाली अभिनेत्रियों की त्रिमूर्ति यानी रूपा गांगुली, लॉकेट चटर्जी या मौसमी चटर्जी में से किसी एक को मैदान में उतारा जा सकता है। केरल से राज्यसभा सांसद सुरेश गोपी और मोहनलाल भगवा पिच पर बैटिंग कर सकते हैं। पूर्व क्रिकेटर कपिल देव से चंडीगढ़ में कमल खिलाने को कहा जा सकता है। आंध्र में भगवा पार्टी पवन कल्याण को साधने का पुरजोर यतन कर रही है। यानी भाजपा की असली भरोसा नेताओं से दीगर अभिनेत्रियों और अभिनेताओं पर बन रहा है। अमित शाह ने अपनी कुछ पसंदीदा एजेंसियों से हर भाजपा सांसद की रिपोर्ट कार्ड बनवाई है, जो पास मार्क नहीं ला पाए हैं, उनका पत्ता कटना तो लाजिमी ही है।

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सीट शेयरिंग को लेकर बिहार में फंसा पेंच

Posted on 29 January 2019 by admin

बिहार में विपक्षी एकता का खटराग अलापने में लालू पुत्र तेजस्वी यादव का कोई सानी नहीं, पर अन्य दलों के साथ सीट शेयर करना राजद के लिए नई मुसीबत बनकर उभरा है। तेजस्वी खुले दिल और खुले मन के साथ कांग्रेस से बात करने के इच्छुक हैं, वे चाहते हैं जिस फार्मूले के तहत यूपी में सपा-बसपा के बीच सीटों का समझौता हुआ है, कुछ इसी तर्ज पर बिहार में भी वे कांग्रेस के साथ 20-20 सीटों का फार्मूला लेकर आए हैं, यानी कि बिहार की कुल 40 सीटों में से 20 पर राजद अपने उम्मीदवार उतारे तो 20 पर कांग्रेस। पर कांग्रेस अपने हिस्से की सीटों में से महागठबंधन के अन्य साथियों मसलन उपेंद्र कुशवाहा की रालोसपा और पप्पू यादव की पार्टी के लिए 8 सीटें छोड़ दें और खुद 12 सीटों पर लड़े। लेकिन इस दफे बिहार में कांग्रेस के हौंसले बम-बम है और प्रियंका गांधी के आने का एक मनोवैज्ञानिक फायदा भी पार्टी को मिल रहा है। वहां की अगड़ी जातियां तेजी से कांग्रेस के पक्ष में लामबंद हुई हैं, सो कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने के इच्छुक फॉरवर्ड नेताओं की एक बाढ़ सी आ गई है। वहीं राजद है जो अपने कोटे की सीट से अगड़ी जातियों के उम्मीदवार नहीं उतारना चाहता है। कीर्ति आजाद, उदय सिंह पप्पू और शत्रुघ्न सिन्हा जैसे लोगों के लिए कांग्रेस को ही आगे आना होगा। मुंगेर के बाहुबली अनंत सिंह को लड़ाने की पैरवी अखिलेश सिंह कर रहे हैं यह जानते हुए कि अनंत और तेजस्वी में छत्तीस का आंकड़ा है। फिर शरद यादव को भी कांग्रेस को अपने कोटे से एडजस्ट करना होगा। जेएनयू फेम के कन्हैया कुमार भी अगड़ी जाति के उम्मीदवार हैं, जो सीपीआई के टिकट पर बेगुसराय से लड़ना चाहते हैं। यह सीट भी कांग्रेस को अपने कोटे से छोड़नी पड़ सकती है। पर यह सब अब 3 फरवरी को पटना में आहूत राहुल गांधी की जनाकांक्षा रैली के बाद तय होगा। पर जो तय है वह यह कि इस दफे बिहार में कांग्रेस के टिकट के लिए खूब मारामारी मचेगी।

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रूढ़ी का क्या होगा ?

Posted on 29 January 2019 by admin

राजीव प्रताप रूढ़ी को इस दफे लोकसभा का टिकट मिलेगा या नहीं यह यक्ष प्रश्न लगातार बना हुआ है। कारण भाजपा-जदयू गठबंधन के नए दौर में रूढ़ी की महाराजगंज सीट जदयू के खाते में जा रही है। जदयू यहां से जेल में बंद प्रभुनाथ सिंह के बेटे को मैदान में उतारने की जुगत में है। फिलहाल जनार्दन सिंह सिगरीवाल महाराजगंज के सांसद हैं जिन्हें सारण भेजे जाने की चर्चा है। भाजपा में एक बात और चल रही है कि केंद्रीय मंत्री आर के सिंह का आरा से टिकट काट कर उनकी जगह वहां से रूढ़ी को उतार दिया जाए। और बदले में आर के सिंह को या तो राज्यसभा में भेज दिया जाए या फिर उन्हें किसी राज्य का गवर्नर बना दिया जाए। या एक फार्मूला यह भी हो सकता है कि रूढ़ी को पार्टी प्रवक्ता बना दिया जाए और उन्हें राज्यसभा भी दे दी जाए। रविशंकर प्रसाद को भी पटना से चुनाव लड़ाने की चर्चा है पर वे लड़ने को इतने उत्सुक नहीं जान पड़ते।

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संघ के सेफ्टीवाल्व गडकरी

Posted on 29 January 2019 by admin

नितिन गडकरी संभवतः एकमात्र ऐसे भाजपा नेता हैं जिनकी विपक्षी दलों में भी काफी स्वीकार्यता है, विपक्षी दलों में उनके मित्रों की भी एक लंबी फेहरिस्त है। लिहाजा मोदी सरकार जब-जब विपक्षी दलों के निशाने पर आती है, गडकरी उसके तारणहार बन कर अवतरित होते हैं। संघ को भी मोदी सरकार से जो कहना होता है या कोई सिग्नल भेजना होता है तो यहां भी गडकरी की ही सेवाएं ली जाती है। इस बात के कयास अपनी उफान पर है कि इस दफे अगर भाजपा अपनी सीटें गंवाती है और बहुमत के जादुई आंकड़े से कहीं दूर रह जाती है तो ऐसे में नितिन गडकरी एनडीए की ओर से एक सर्वमान्य चेहरा बनकर उभर सकते हैं। इस लीग में एक और नाम राजनाथ सिंह का भी सामने आ रहा है। पर गडकरी और उनके शुभचिंतकों को इस बात का कहीं न कहीं बखूबी इल्म है कि गडकरी का नाम सामने आते ही मोदी व शाह की जोड़ी राजनाथ के नाम को आगे कर सकती है। सो, सूत्र बताते हैं कि ऐसे में गडकरी ने संघ को यह संकेत दिए हैं कि वे पीएम के बजाए भाजपा की कमान संभालने के ज्यादा इच्छुक हैं। पर मोदी व शाह की पहली पसंद अध्यक्ष के तौर पर जेपी नड्डा हैं, संघ नड्डा के नाम पर नहीं माना तो यह जोड़ी सुमित्रा महाजन का नाम आगे कर सकती है, वैसे भी इस दफे सुमित्रा ताई की इंदौर सीट से कैलाश विजयवर्गीय चुनाव लड़ने के लिए हाथ पैर मार रहे हैं।

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मोदी बिन सब सून

Posted on 29 January 2019 by admin

पिछले सप्ताह दाभोस में संपन्न हुए वर्ल्ड इकॉनामिक फोरम की सलाना बैठक देश में चर्चा नहीं बटोर पाया, सिर्फ इस वजह से कि सिर पर आम चुनाव होने की वजह से पीएम मोदी इसमें शामिल नहीं हुए। मोदी की अनुपस्थिति में इसकी नुमाइंदगी अरूण जेटली को करनी थी, पर वे भी अपनी बीमारी का इलाज कराने अमेरिका चले गए। जो गए वे चर्चा नहीं बटोर पाए। केंद्रीय मंत्री सुरेश प्रभु, नीति आयोग के अमिताभ कांत और रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन इसमें शामिल हुए। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी इसमें हिस्सा लिया तो चंद्रबाबू नायडू ने अपनी जगह लोकेश नारा को भेजा। पंजाब से कैप्टन अमरिंदर को जाना था पर ऐनवक्त उन्होंने अपनी जगह मनप्रीत बादल को भेज दिया। हां, टाटा टी वालों के स्टॉल ’चाय पर चर्चा’ ने जरूर चर्चा बटोरी।

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रूपाणी के खेल में उलझे पटेल

Posted on 29 January 2019 by admin

इस बार के वायब्रेंट गुजरात में एक बात यकीनन चौंकाने वाली थी कि तमाम पोस्टर, बैनर, परचम व होर्डिंग्स से गुजरात के उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल नदारद थे। जबकि मोदी और रूपानी के साथ पोस्टर-बैनर में अदना से मंत्री, प्रदेश अध्यक्ष से लेकर मेयर तक की तस्वीरें विराजमान थीं पर नितिन पटेल को वहां जगह नहीं मिली। सूत्रों की मानें तो रूपानी और पटेल का झगड़ा अब खुलकर सामने आ गया है। दरअसल, पटेल अपने लिए फाइनेंस मंत्रालय चाहते थे और इसके लिए लगातार यह दबाव बना रहे थे कि उन्हें जनवरी के अंत तक वित्त मंत्रालय मिल जाना चाहिए। पर जब इस बात का पता अमित शाह को हुआ तो कहते हैं उन्होंने तमाम पोस्टरों से पटेल की फोटो हटवा दी। पटेल इस बात से इतने आहत हुए कि जब मोदी गुजरात पहुंचे तो उनकी अगवानी के लिए भी पटेल नहीं गए। वायब्रेंट गुजरात के मेगा ट्रेड शो में जब पटेल अपनी उपस्थिति दर्ज कराने पहुंचे तो मोदी ने भी उन्हें पूरी तरह से इग्नोर किया। और जब गोल्फ कार्ट आई तो मोदी ने पटेल की उपस्थिति को नज़रअंदाज करते हुए अपने साथ रूपानी को बिठा लिया और पटेल से कहा कि वे दूसरी कार्ट में आए। इस बात का पटेल ने बुरा माना और वे सीधे आयोजन स्थल से बाहर चले गए।

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सेल्फी विद पीएम

Posted on 29 January 2019 by admin

वाराणसी में आयोजित प्रवासी भारतीय सम्मेलन के पहले दिन जब सारे डेलीगेट्स पहुंच गए और प्रधानमंत्री के आने का इंतजार होने लगा तो मंच को संचालित कर रही उद्घोषिका ने समय का सदुपयोग करने के लिए वहां मौजूद प्रतिनिधियों को ’नमो ऐप्प’ की विषेशताओं के बारे में बताने लगी। उद्घोषिका ने वहां मौजूद प्रतिनिधियों से ’नमो ऐप्प’ को डाउनलोड करने की अपील भी कर डाली, साथ ही यह भी बताया कि अगर किसी को यह ऐप्प डाउन लोड करने में दिक्कत आ रही है तो वे बाहर लगे डिजिटल बूथ पर जाकर इसे डाउनलोड करा सकते हैं। जब अप्रवासी भारतीय उस बूथ पर पहुंचे तो देखा वहां मोदी जी का एक बड़ा वर्चुअल कटआउट लगा है जिसके साथ सेल्फी लेने का प्रावधान था। फिर तो मोदी जी के साथ सेल्फी लेने की जैसे होड़ मच गई।

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गाय हमारी माता हैं

Posted on 29 January 2019 by admin

वाराणसी में इन दिनों सड़कों पर लावारिस भटकती बूढ़ी बीमार गायों और चोटिल सांड़ों का एक बड़ा जमावड़ा देखा जा सकता है। सो, योगी प्रशासन ने इस बात के पुख्ता इंतजाम कर रखे थे कि ऐसी लावारिस गौ माताएं और सांड़ गण किसी भी मानिंद प्रवासी भारत आयोजन स्थल के आसपास न दिखें। पर विडंबना देखिए कि तमाम चाक-चौबंद प्रबंधों के बावजूद जब मोदी जी का वहां आगमन हुआ तो कुछ गाएं वहां भटकती हुई पहुंच गई, फिर तो पुलिस प्रशासन में जैसे हड़कंप मच गया। पुलिस वाले निरीह गायों को आयोजन स्थल से खदेड़ने में डंडा चला नहीं सकते थे, क्योंकि वहां मीडिया व कैमरे भरे पड़े थे। बड़ी मुश्किल से दुलार-पुचकार कर गायों को आयोजन स्थल से बाहर किया जा सका, तब कहीं जाकर प्रशासन की जान में जान आई।

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किसानों को अंग्रेजी

Posted on 29 January 2019 by admin

वायब्रेंट गुजरात के तीसरे यानी आखिरी दिन मोदी सरकार ने बिचारे किसानों की भी सुध लेनी चाही। किसानों व खेती की चिंता करने के लिए बकायदा एक सेशन रखा गया, जिसका शीर्षक था- ’सस्टेनेबल टेक्नोलॉजी ड्रिवन एग्रीकल्चर फॉर न्यू इंडिया’। इस सेमिनार में भाग लेने के लिए दूरदराज के किसानों को आमंत्रित किया गया था। पर विडंबना देखिए कि जो भी एक्सपर्ट और मंत्री बोलने को आए उन्होंने अंग्रेजी में बोलना शुरू कर दिया। 10 मिनट के अंदर ही किसान ऊंघने लगे, वह तो भला हो पुरूशोत्तम रूपाला का वे आते ही गुजराती में शुरू हुए तक जाकर किसानों की तंद्रा टूटी। जब ये किसान खाने के स्टॉल पर पहुंच तो वहां सचमुच व्यंजनों की बहार थी, जिसका इन्होंने जमकर लुत्फ उठाया।

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