Archive | December, 2018

राम का नाम बदनाम न करो

Posted on 27 December 2018 by admin

उच्च पदस्थ सूत्रों के दावों पर अगर यकीन किया जाए तो इस दफे के 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजे आने से दो दिन पहले दिल्ली के संघ मुख्यालय में अमित शाह, विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष जस्टिस सदाशिव कोकजे और संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों की एक अहम बैठक हुई। जिसमें विहिप की ओर से भाजपाध्यक्ष को कहा गया कि ’विहिप चाहती थी कि राम मंदिर के मुद्दे को इन चुनावों में सांकेतिक तौर पर उठाया जाए पर आपने तो राम मंदिर को ही इन चुनावों का सबसे प्रमुख मुद्दा बना दिया। शायद यही कारण है कि हम तीनों हिंदी भाषी राज्यों में हार रहे हैं।’सूत्र बताते हैं कि हालिया विधानसभा चुनावों के नतीजे सामने आने पर संघ ने भाजपा हाईकमान से कहा है कि राम मंदिर के मुद्दे पर जनता हमें रिजेक्ट कर रही है, अब इस पर अध्यादेश की बात भी बेमानी है। सो, अब बात हो सिर्फ कानून की इसमें न्यायिक प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए और हमें सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करना चाहिए।

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बदले से सरकार नज़र आते हैं

Posted on 27 December 2018 by admin

रफाल सौदे पर जब देश की शीर्ष अदालत से मोदी सरकार को क्लीनचिट मिल गई तो पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने अपने पार्टी मुख्यालय में इस बाबत एक प्रेस-कांफ्रेंस की। इस बार बदले-बदले से सरकार नज़र आए। पहले पत्रकारों के सवालों को इग्नोर करने वाले और उन्हें दो टूक जवाब देने में सिद्दहस्त शाह एक बदली भाव-भंगिमाओं के साथ पत्रकारों के सामने थे, वे विनम्रता की प्रतिमूर्त्ति बने पत्रकारों से पूछ रहे थे-’भैया कैसे हो? कुछ खाया कि नहीं? चाय ली?’ जो शाह पहले राहुल गांधी से जुड़े सवालों को साफ तौर पर खारिज कर देते थे यह कहते हुए कि ’आप भी किसके बारे में सवाल पूछ रहे हो, इनके सवालों के जवाब मैं नहीं देता।’पर इस बार शाह राहुल से जुड़े सवालों को ’इग्नोर’नहीं कर पाए। हां, पांच राज्यों में कमल के लुढ़कने से जुड़े सवालों को वे जरूर टाल गए, यह कहते हुए- ’वह बीत चुका है, आज रफाल की बात करो।’ समय से बड़ा कोई डॉक्टर नहीं होता, अच्छे-अच्छों का इलाज कर देता है।

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सोनिया अब भी प्रासंगिक

Posted on 27 December 2018 by admin

इस दफे अगर सिर्फ और सिर्फ राहुल गांधी की चलती तो ज्योतिरादित्य सिंधिया मध्य प्रदेश के सीएम होते और सचिन पायलट राजस्थान के। कमोबेश प्रियंका भी अपने भाई की सोच से इत्तफाक रखती थी कि अगर कांग्रेस में नया जोश भरना है तो नए खून को ज्यादा से ज्यादा मौके देने होंगे। पर सोनिया गांधी और उनसे जुड़े लोगों की राय इससे दीगर थी, इनका मानना था कि इस वक्त राज्य चलाने के लिए किंचित अनुभवी व्यक्ति की ज्यादा जरूरत है, जो 2019 के आम चुनावों में भी इन राज्यों में कांग्रेस की संभावनाओं को बेहतर आयाम दे सके। कहना न होगा बच्चों ने अपनी मां की सलाहों को तरजीह दी।

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शाह के विकल्प की तलाश

Posted on 27 December 2018 by admin

इन दिनों संघ और इसके आनुशांगिक संगठनों में लगातार विचार-मंथन के दौर गर्म है कि भाजपा की हिंदी पट्टी में इतनी बुरी गत क्यों हुई। तो इस मंथन से कुछ विश और कुछ अमृत निकल कर सामने आए हैं। एक विचार यह भी उभर कर सामने आया है कि चूंकि भाजपा के अध्यक्ष और प्रधानमंत्री दोनों ही गुजराती हैं, यह बात हिंदी पट्टी को ठीक से हजम नहीं हो रही। वैसे भी अमित शाह की कार्यशैली को लेकर पार्टी कार्यकर्त्ता कभी भी इतना खुश नहीं रहा है। सो, फिलवक्त पार्टी को एक ऐसे अध्यक्ष की दरकार है जो सभी के लिए उपलब्ध हो और हर किसी की बात सुन सके। इसके बाद संघ के ही एक पदाधिकारी की ओर से शिवराज सिंह चौहान का नाम सुझाया गया, इनकी राय में शिवराज लोकप्रिय भी हैं और सहज भी। शिवराज को संघ की ओर से ’फिलर’भी भेजा गया है, पर वे मध्य प्रदेश छोड़कर आने को तैयार नहीं हो रहे। इसके बाद नितिन गडकरी का नाम सामने आया, पार्टी कैडर में भी इनके नाम पर व्यापक स्वीकार्यता है, पर संघ को लगता है कि गडकरी के नाम पर मोदी नहीं मानेंगे। अब ले-देकर निगाहें राजनाथ सिंह की ओर पलटी है जिनसे न तो मोदी को कोई खतरा है और न ही संघ को कोई दिक्कत। क्या यही वजह है कि पार्टी के अंदर से शाह के खिलाफ आवाजें उभरने लगी है, क्या यह बिना संघ के आशीर्वाद के संभव है?

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किस्मत के सलमान

Posted on 27 December 2018 by admin

हर नए साल पर क्रिसमस के मौके पर सलमान खुर्शीद अपनी क्रिसमस की पार्टी जरूर देते हैं, इन पार्टी में सलमान के पत्रकार मित्र, उनके साथी राजनेता, निकटस्थ मित्र, विदेशी राजनयिक और चंद नौकरशाह शामिल होते हैं। इस बार उन्होंने अपनी पार्टी कुमारी सैलजा के घर पर रखी थी। उनकी इस पार्टी में अहमद पटेल, अंबिका सोनी, राजीव शुक्ला, सैलजा, शीला दीक्षित, प्रमोद तिवारी जैसे चिरपरिचित चेहरों की मौजूदगी थी तो वहीं भाजपा से नलिन कोहली की उपस्थिति देखी जा सकती थी। पर जिन दो चेहरों ने पहली बार इनकी पार्टी में शामिल होकर सबको चौंकाया वे थे नेशनल कांफ्रेंस के फारूख अब्दुल्लाह और दूसरे थे महात्मा गांधी के प्रपौत्र राममोहन गांधी। फारूख अब्दुल्लाह तो लाल कपड़ों में पूरे ’सैंटा’बनकर आए थे। हालिया विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की जीत पर सभी सलमान को बधाई दे रहे थे, तो सलमान यह कहते हुए विनम्रता से सबका धन्यवाद स्वीकार कर रहे थे कि मुझे नहीं, मेरी पार्टी को बधाई दीजिए। वैसे भी इन हालिया विधानसभा चुनावों में खुर्शीद को किसी भी राज्य में चुनाव प्रचार करते नहीं देखा गया था।

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यूपी में क्या होगा कांग्रेस का

Posted on 27 December 2018 by admin

सलमान की इस पार्टी में मौजूद कांग्रेसी नेताओं की बातचीत का यह एक सामूहिक मुद्दा था कि क्या कांग्रेस को यूपी में सपा-बसपा गठबंधन का हिस्सा बनना चाहिए। इस पर यूपी के एक नेता ने कहा कि अखिलेश व माया 2019 में हमारे लिए सिर्फ 5 सीट छोड़ने का इरादा रखते हैं, इससे तो पार्टी का बचा-खुचा जनाधार भी राज्य में खत्म हो जाएगा। इससे अच्छा तो यह है कि हम अकेले लड़े कम से कम हमारे कार्यकर्त्ताओं में तो एक नया विश्वास जगेगा। ऐसे में किसी ने वहां मौजूद सलमान खुर्शीद से पूछ लिया कि इस दफे आप लोकसभा का चुनाव लड़ेंगे या राज्यसभा के लिए प्रयास करेंगे? इस पर खुर्शीद का विनम्र जवाब सामने आया-’पहले भी राज्यसभा नहीं दिए जाने से मैं निराश नहीं हूं, दूसरों को मिल गई, मुझे कोई ऐतराज भी नहीं, मैं अपने काम में लगा हूं।’

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…और अंत में

Posted on 27 December 2018 by admin

उपेंद्र कुशवाहा ने भाजपा को बाय-बाय करते हुए दो टूक कहा-’यहां मोदी सरकार में मंत्री तो केवल डमी है, सारे फैसले एक ही जगह से लिए जाते हैं (इनका इशारा पीएमओ की ओर था)। मोदी सरकार के वन-पर्यावरण और विज्ञान मंत्री हर्षवर्द्धन ने इन बातों को धत्ता बताते हुए एक बड़ा फैसला ले लिया और अपने सचिव को तबादला ऑर्डर थमा दिया। अभी इस ऑर्डर पर आगे कोई और कार्यवाई हो, कहते हैं पीएमओ ने उन्हें फौरन तलब कर लिया, उनकी जमकर क्लास ली गई और मंत्री महोदय को न सिर्फ यह ऑर्डर कैंसिल करना पड़ा, बल्कि आगे के अपने इरादे भी बदलने पड़े। (एनटीआई-gossipguru.in)

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बघेल के खेल में फंस गए सिंहदेव

Posted on 27 December 2018 by admin

छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री पद की रेस में भूपेश बघेल ने ऐन वक्त बाजी मार ली, जबकि उनके प्रतिद्वंदी टीएस सिंहदेव का ग्राफ उनसे कहीं ऊपर चल रहा था। ऐसे में कुछ पत्रकार बघेल के तारणहार बनकर अवतरित हुए। वैसे भी बघेल से पत्रकारों के निजी रिश्ते उनके प्रतिद्वंदियों के मुकाबले कहीं बेहतर थे। राज्य के एक खोजी पत्रकार ने टीएस सिंहदेव और गौतम अदानी के कनेक्शन से पर्दा उठाते हुए इसके सारे कागजात सीधे राहुल गांधी को भेज दिए। बघेल का यह दांव तुरूप का इक्का साबित हुआ और आखिरी वक्त पर सिंहदेव का पत्ता कट गया। भूपेश बघेल ने राज्य में कुर्मी वोटरों की तादाद को लेकर भले ही राहुल को गुमराह किया हो, कहते हैं उन्होंने प्रदेश की 12 फीसदी कुर्मी आबादी को बढ़ा कर राहुल से 22 फीसदी बोल दिया था। खैर मामला आया गया हो गया क्योंकि बघेल की अपेक्षाकृत ईमानदार छवि ने गांधी परिवार में उनकी पूछ बढ़ा रखी थी। क्योंकि मुख्यमंत्री पद के एक और दावेदार तमरध्वज साहू का संगठन में ही भयंकर विरोध था, क्योंकि पोस्ट के बदले पैसे के आरोप उन पर लगते रहे हैं। ऐसे में बघेल की लॉटरी निकल आना चंद पत्रकारों की मेहनत का नतीजा था, शायद यही वजह है कि मुख्यमंत्री बनते ही बघेल ने कम से कम अपने मुंहलगे चार पत्रकारों को आनन-फानन में उपकृत कर दिया।

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असली चाणक्य कौन?

Posted on 27 December 2018 by admin

जब राजस्थान में भाजपा उम्मीदवारों के चयन को लेकर निर्णायक बैठकों का दौर गर्म था तो ऐसे ही किसी एक बैठक में वसुंधरा की भाजपाध्यक्ष के साथ ठन गई। वसुंधरा का शाह से कहना था कि उन्होंने पूरे राजस्थान का कम से कम चार बार दौरा कर लिया है और यहां की एक-एक सीट की समझ है और अपनी उसी समझ को मुकम्मल रूप देते हुए उन्होंने उम्मीदवारों की यह लिस्ट तैयार की है, और उन्होंने उम्मीदवारों की यह लिस्ट शाह की ओर बढ़ा दी, कहते हैं शाह ने इस लिस्ट को देखे बगैर उसे एक ओर सरका दी। इसके बाद शाह ने अपनी लिस्ट वसुंधरा को यह कहते हुए पकड़ानी चाही कि पिछले तीन महीनों में उन्होंने राज्य में चार सर्वे करवाए हैं, जिसमें प्रत्येक सीट से प्राथमिकता के आधार पर तीन-तीन नाम समाने आए हैं, हम इन तीन नामों पर बैठकर डिस्कस कर लेते हैं और इसमें से एक नाम फाइनल कर देते हैं। सूत्र बताते हैं कि वसुंधरा ने गुस्से में उस लिस्ट के टुकड़े-टुकड़े कर दिए। जब दोनों नेताओं में गर्मा-गर्मी काफी बढ़ गई तो एक सुलह का फार्मूला निकाला गया, जिसके तहत वसुंधरा को 80 सीटें दी गई और शेष 120 सीटों पर उम्मीदवार शाह ने तय किए। सूत्रों की माने तो जब चुनावी नतीजे आए तो वसुंधरा की 80 सीटों में से 62 पर भाजपा उम्मीदवार जीत गए। और शाह के चार सर्वेक्षणों के मंथन से तय हुए 119 उम्मीदवारों में से मात्र 11 ही विजयश्री को गले लगा पाए।

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सरकार के निशाने पर अब ब्यूरोक्रेसी

Posted on 20 December 2018 by admin

जब नरेंद्र मोदी दिल्ली के निज़ाम पर काबिज हुए तो नौकरशाहों की निकल पड़ी, जनता के चुने हुए जन प्रतिनिधियों के आभामंडल में जबर्दस्त गिरावट दर्ज हुई, यहां तक कि विभिन्न मंत्रालयों में भी विभाग के सचिव मंत्रियों को सुपर सीड कर सीधे पीएमओ को अपनी रिपोर्ट देने लगे। पर अब मुल्क के सर्वेसर्वा को ऐसा लगने लगा है कि उनकी सरकार की अहम जानकारियां नौकरशाहों के माध्यम से पत्रकारों को लीक हो रही हैं। अभी पिछले दिनों एक सचिव महोदय ने एक प्रमुख मंत्रालय का जिम्मा संभाला तो कोई चार पत्रकार उनसे मिलने उनके दफ्तर जा पहुंचे। पत्रकारों को इस सचिव महोदय ने बताया कि देश के किसानों की दशा-दिशा बदलने की कवायद में सरकार क्या नया करने जा रही है, नई कृषक नीति के मसौदे में किन अहम बातों को स्थान दिया जा रहा है, आदि-आदि। अभी पत्रकार गण उठकर सचिव महोदय के चैंबर से बाहर भी नहीं निकले थे कि सचिव महोदय को पीएमओ से नृपेंद्र मिश्र का फोन आ गया। सूत्र बताते हैं कि उन्हें कड़ी फटकार लगाते हुए मिश्र ने कहा कि आप नेता नहीं जो पत्रकारों से बात करें, आप मंत्रालय के काम-काज पर अपना ध्यान लगाएं। इसके अगले कुछ दिनों में एक मंत्रालय के सचिव को एक टीवी चैनल के कॉन्क्लेव में ’जल सुरक्षा नीति’ पर बोलने जाना था, उन्हें भी फोन आ गया और जबर्दस्त तरीके से डपटा गया। तो उस सचिव महोदय ने बेहद मासूमियत से कह दिया कि वे सरकार की उपलब्धियां बताने और गिनाने के लिए कॉन्क्लेव में जा रहे हैं। उनसे कहा गया कि सरकार की उपलब्धियां गिनाने के लिए कई और लोग हैं, आप अपने काम से काम रखें। माना जा रहा है कि अब देश के नौकरशाहों पर सरकार की खुफिया एजेंसियों की पैनी निगाहें हैं।

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