मित्तल के मीत कहां?

November 07 2010


सुधांशु मित्तल अपने छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय रहे हैं, एक वक्त था जब भाजपा में उनकी तूती बोलती थी, वे दिवंगत प्रमोद महाजन के सबसे करीबियों में शुमार होते थे, वे दोस्तों के दोस्त भी है, चुनांचे उनके दोस्तों की एक बड़ी लंबी फेहरिस्त है, जो अलग-अलग राजनैतिक पार्टियों में सक्रिय हैं। पर जब से गेम्स से जुड़े मुद्दे और उनकी एक कथित निर्माण कंपनी पर आयकर का छापा पड़ा है, तब से उनके हम निवाला-हमप्याला दोस्तों की सीरत बदल गई है, वे पूछते हैं-’हू सुधांशु? व्हॉट सुधांशु?’ और जब से इस पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई है, तो उनके दोस्तों के रंग-ढंग और भी बदल गए हैं। चंद्रबाबू व जयललिता सरीखे नेता-नेत्रियों ने भले ही फोन कर मित्तल का हाल-चाल पूछा हो, पर भाजपा का हर बड़ा-छोटा नेता उनसे कन्नी काटता नजर आता है। सब जानते हैं कि मित्तल राजनाथ सिंह के कितने करीबी रहे हैं, सो जब इस संकट की घड़ी में मित्तल ने राजनाथ से बात की तो राजनाथ ने साफ कहा-’न्यूयॉर्क से लौटकर बीमार पड़ गया हूं, इसीलिए आपसे मिलने नहीं आ सकता, आप भी मुझसे मिलने मत आना इंफेक्शन का खतरा हो सकता है।’ सुधांशु ने नेता विपक्ष सुषमा स्वराज को दो बार फोन कर मदद मांगी और उनसे अनुरोध किया कि यह पूरा मामला संसद में उठना चाहिए क्योंकि ये छापे राजनीति से प्रेरित हैं, पर सुषमा की ओर से भी उन्हें कोई ठोस आश्वासन प्राप्त नहीं हुआ। यहां तक कि दिन-रात उनके इर्द-गिर्द मंडराने वाले कीर्ति आजाद और निशिकांत दूबे जैसे ताजातरीन सांसदगण तो अब मित्तल का फोन भी नहीं ले रहे।…अब क्या देखना रह गया बाकी…ऐ सियासत तुझसे दिल लगाकर देख लिया।

 
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